यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Meta की नीतियां भ्रामक चिकित्सा जानकारी को विज्ञापन-राजस्व के लिए अयोग्य बताती हैं और कुछ विवादित सामाजिक मुद्दों वाले कंटेंट पर कम या सीमित मोनेटाइजेशन लागू करती हैं।
Meta ने इन खातों को भुगतान से हटाने की सार्वजनिक घोषणा नहीं की। कंपनी ने संबंधित पेजों पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि मोनेटाइजेशन टूल इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों के लिए स्पष्ट नीतियां मौजूद हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि आपत्तिजनक होने भर के आधार पर कंटेंट की निगरानी करना Meta की भूमिका नहीं है।
जून 2026 में प्रकाशित एक अलग अध्ययन ने भी इसी तरह के सवाल उठाए। अध्ययन के मुताबिक, तथ्य-जांचकर्ताओं द्वारा 10 से अधिक बार फर्जी कंटेंट के लिए चिह्नित किए गए Facebook पेज निलंबन के बाद भी कमाई करते रहे।
आलोचकों का कहना है कि यह भुगतान मॉडल ऐसे कंटेंट को बढ़ावा दे सकता है जिसका उद्देश्य जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को गुस्सा दिलाकर अधिक प्रतिक्रियाएं और शेयर जुटाना है। इसे आम तौर पर ‘rage-bait’ कहा जाता है—यानी जानबूझकर उकसाने वाला कंटेंट, जिससे ज्यादा एंगेजमेंट और संभावित रूप से ज्यादा विज्ञापन-राजस्व मिल सकता है।
International Business Times ने Meta के लगभग 3 अरब डॉलर के क्रिएटर प्रोग्राम पर इसी वजह से नए सिरे से उठ रही आलोचना का उल्लेख किया।
अगस्त 2026 में Wired और Tech Transparency Project (TTP) की जांच ने Meta के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा किया। जांच के अनुसार, कंपनी ने AI-जनित बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) वाले 50 से अधिक भुगतान किए गए विज्ञापनों को मंजूरी दी।
रिपोर्ट में बताए गए प्रमुख बिंदु:
Wired के सवालों के बाद Meta ने इन विज्ञापनों को हटाया। फरवरी 2026 में स्पेन ने भी Meta, X और TikTok पर AI-जनित CSAM के कथित प्रसार को लेकर जांच की घोषणा की थी।
5 अगस्त 2026 को Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत सरकार से कई मुद्दों को लेकर माफी मांगी। इनमें Instagram के भुगतान वाले विज्ञापनों में CSAM की मौजूदगी, प्लेटफॉर्म पर फैल रहे डीपफेक और संचालन से जुड़ी त्रुटियां शामिल थीं।
इन त्रुटियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट या वीडियो का अस्थायी रूप से हटाया जाना भी शामिल था। Meta के Chief Global Affairs Officer Joel Kaplan ने IT मंत्री अश्विनी वैष्णव से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी।
यह घटनाक्रम भारत सरकार की उस कार्रवाई के बाद आया, जिसमें जुलाई 2026 में Instagram विज्ञापनों में CSAM को लेकर Meta को नोटिस दिया गया था। बैठक के दौरान सरकार ने कंपनी से भारतीय कानूनों का पालन करने की बात स्पष्ट रूप से कही।
कुछ सरकारी सूत्रों के मुताबिक, Meta ने यह भी स्वीकार किया कि अवैध कंटेंट को बढ़ावा देने और खास दर्शकों तक भुगतान वाले प्रमोशन पहुंचाने में चूक हुई।
कैमरा और माइक्रोफोन से लैस Meta के Ray-Ban स्मार्ट ग्लासेज़ को लेकर भी कई देशों में प्राइवेसी संबंधी चिंताएं उठी हैं।
ग्लासेज़ का कैमरा हाथों को इस्तेमाल किए बिना फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ लोगों ने इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और अन्य लोगों की जानकारी के बिना रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किया। Instagram ने जुलाई 2026 में ऐसे वीडियो पर कार्रवाई शुरू की।
इस विवाद के कारण इंटरनेट पर इन डिवाइसों के लिए अपमानजनक “pervert glasses” उपनाम भी इस्तेमाल किया गया।
Meta ने कहा कि वह दूसरी पीढ़ी के ग्लासेज़ में ऐसा बदलाव कर रही है, जिससे रिकॉर्डिंग के दौरान जलने वाली प्राइवेसी LED को ढकने, तोड़ने या उसके साथ छेड़छाड़ का पता चलने पर कैमरा बंद हो जाएगा।
जून 2026 में सुरक्षा शोधकर्ताओं और Wired की रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि Meta AI ऐप में स्मार्ट ग्लासेज़ के लिए फेस-रिकग्निशन से जुड़ा “NameTag” कोड मौजूद था। यह ऐप लाखों फोन पर डाउनलोड किया जा चुका है। इसने संभावित निगरानी और लोगों की पहचान उनकी जानकारी के बिना किए जाने को लेकर चिंता बढ़ाई।
यूरोपीय संसद में उठाए गए एक सवाल में स्वीडिश मीडिया की जांच का हवाला देते हुए कहा गया कि स्मार्ट ग्लासेज़ उपयोगकर्ताओं की जानकारी और आसपास मौजूद तीसरे पक्षों की सहमति के बिना निजी परिस्थितियों तथा संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को रिकॉर्ड कर सकते हैं। इस पर GDPR यानी यूरोपीय डेटा-सुरक्षा नियमों के अनुपालन को लेकर सवाल उठे।
अप्रैल 2026 में 75 से अधिक वकालत संगठनों ने भी इस तकनीक के खिलाफ पत्र जारी किया। उन्होंने इसे प्राइवेसी और नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए गंभीर खतरा बताया।
इन घटनाओं को साथ रखकर देखें तो Meta के सामने एक ही बुनियादी सवाल बार-बार लौटता है: क्या प्लेटफॉर्म की कमाई का मॉडल ऐसे कंटेंट को पर्याप्त रूप से रोक पा रहा है जो नफरत, गलत सूचना, शोषण या निजता के उल्लंघन को बढ़ावा दे सकता है?
विवादित क्रिएटर्स को भुगतान, संवेदनशील AI विज्ञापनों की मंजूरी और स्मार्ट ग्लासेज़ की रिकॉर्डिंग क्षमताओं से जुड़े मामले दिखाते हैं कि कंटेंट मॉडरेशन केवल पोस्ट हटाने का मुद्दा नहीं है। यह इस बात से भी जुड़ा है कि प्लेटफॉर्म किसे पहुंच देता है, किस कंटेंट को आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करता है और उपयोगकर्ताओं व आसपास के लोगों की सुरक्षा के लिए कितनी जवाबदेही स्वीकार करता है।