वियना में 14 सितंबर को हुई अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की आम बैठक ने अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु विवाद को असाधारण रूप से स्पष्ट कर दिया। वॉशिंगटन ने एक विकल्प रखा—ईरान को देश के बाहर से परमाणु ईंधन की आपूर्ति—लेकिन इसके बदले घरेलू यूरेनियम संवर्धन छोड़ने और IAEA के साथ फिर से पूरा सहयोग करने की शर्त लगाई। साथ ही, अमेरिकी अधिकारियों के बयान यह भी दिखाते हैं कि कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता नहीं माना जा रहा है।
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ईंधन का प्रस्ताव, लेकिन कड़ी शर्तों के साथ
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि परमाणु मुद्दे का समाधान होने पर अमेरिका ईरान को देश के बाहर से परमाणु ईंधन दे सकता है। प्रस्ताव का मूल विचार यह था कि ईरान की असैन्य परमाणु ईंधन जरूरतें पूरी हों, लेकिन उसके पास घरेलू संवर्धन क्षमता न रहे।
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यह पेशकश दबाव भरे संदेश के साथ आई। इससे पहले राइट ने कहा था कि परमाणु समझौता संभव न भी हो सकता है और विकल्प के तौर पर ईरान की संबंधित क्षमताओं को नष्ट करने की बात की थी। वियना में अमेरिकी राष्ट्रीय वक्तव्य ने भी ईरान के सुरक्षा-निरीक्षण रिकॉर्ड की आलोचना की और IAEA के साथ पूर्ण सहयोग की मांग की।
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यानी अमेरिकी रुख में प्रोत्साहन और अल्टीमेटम, दोनों शामिल थे: बाहरी सहायता से असैन्य परमाणु कार्यक्रम का रास्ता, लेकिन उन्हीं सीमाओं को स्वीकार करने के बाद जिनका तेहरान लंबे समय से विरोध करता आया है।
सबसे तात्कालिक मुद्दा: निरीक्षण और सत्यापन
विवाद केवल भविष्य में संवर्धन जारी रखने का नहीं है। असल व्यावहारिक सवाल यह है कि IAEA मौजूदा परमाणु गतिविधियों और सामग्री का स्वतंत्र सत्यापन कर पा रही है या नहीं।
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने कहा कि जून में बुशेहर परमाणु बिजलीघर के निरीक्षण को छोड़कर एजेंसी ने छह महीने से अधिक समय से ईरान में कोई प्रत्यक्ष सत्यापन नहीं किया है। उनके अनुसार, एजेंसी को पहले घोषित परमाणु सामग्री की जानकारी भी नहीं मिल रही है और न ही उसे उन सुविधाओं तक पहुंच है जहां सत्यापन जरूरी है। उन्होंने इसे गंभीर प्रसार-संबंधी चिंता बताया।
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IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स पर भी ईरान के सहयोग को लेकर दबाव बढ़ा। रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी बोर्ड में ऐसा प्रस्ताव आगे बढ़ाना चाहते थे, जिसके तहत ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजा जाए। यह पहल उन निष्कर्षों के बाद हुई जिनमें कहा गया था कि तेहरान ने अघोषित स्थलों पर पाए गए यूरेनियम कणों की जांच में पूरा सहयोग नहीं किया।
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इसी वजह से संवर्धन और निरीक्षण के मुद्दे को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। पर्याप्त पहुंच और जानकारी के बिना IAEA तथा अन्य देश ईरान के कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति का स्वतंत्र आकलन नहीं कर सकते।
मोहम्मद इस्लामी को प्रवेश न मिलने से बढ़ा कूटनीतिक तनाव
ईरान के परमाणु मामलों के उपराष्ट्रपति और एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। ऑस्ट्रिया ने उनके प्रवेश के लिए जरूरी प्रतिबंध-छूट देने से इनकार कर दिया। राइट ने पुष्टि की कि वॉशिंगटन ने इस छूट का विरोध किया था और इस्लामी को प्रतिबंधित व्यक्ति बताया।
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ईरानी सरकारी टीवी के मुताबिक, इस्लामी और उनका प्रतिनिधिमंडल वियना के लिए रवाना हुआ था, लेकिन रास्ते में रोके जाने के बाद उसे तेहरान लौटना पड़ा।
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इस घटना ने सिर्फ सम्मेलन का कार्यक्रम नहीं बदला। परमाणु निगरानी संस्था के साथ संवाद के लिए बने मंच से ईरान के शीर्ष परमाणु अधिकारी का बाहर रहना दिखाता है कि तकनीकी विवाद अब ज्यादा गहरे राजनीतिक और कूटनीतिक संघर्ष में बदल चुका है। तेहरान इसे प्रक्रिया पर राजनीतिक अंकुश के रूप में देखता है, जबकि अमेरिका का तर्क है कि प्रतिबंधों का पालन IAEA सम्मेलन में भी होना चाहिए।
पिकऐक्स माउंटेन पर गतिविधि से अनिश्चितता
ध्यान पिकऐक्स माउंटेन नामक किलेबंद परिसर पर भी गया, जो ईरान के प्रमुख संवर्धन केंद्र के पास स्थित है। ग्रोसी ने कहा कि दूरस्थ तस्वीरों में निर्माण स्थल के आसपास गतिविधि के संकेत मिले हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि IAEA के पास वहां वास्तव में क्या काम हो रहा है, इसकी ठोस जानकारी नहीं है।
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ईरान ने इन आरोपों को “मीडिया हाइप” बताया और कहा कि वह IAEA के प्रति अपनी सुरक्षा-निरीक्षण संबंधी जिम्मेदारियां निभा रहा है।
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उपलब्ध जानकारी से इतना ही निष्कर्ष निकलता है कि एजेंसी ने निर्माण से जुड़ी हलचल देखी है; भूमिगत परिसर के भीतर किस तरह का कार्य चल रहा है, यह स्थापित नहीं हुआ है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकर विवाद ने दिखाया व्यापक जोखिम
परमाणु तनाव के समानांतर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा स्थिति भी बिगड़ी हुई थी। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एल गैया को जलडमरूमध्य के दक्षिण में प्रतिबंधित क्षेत्र में नौसैनिक बारूदी सुरंग लगी और उसमें आग लग गई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज किया। उसका कहना था कि टैंकर पर पिछले महीने पहले ईरानी मिसाइल से हमला हुआ था और फिर ओमान के तट के पास ड्रोन से निशाना बनाया गया।
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रॉयटर्स ने दोनों विरोधाभासी दावों की रिपोर्टिंग की है। इसलिए घटनाक्रम और जिम्मेदारी का स्वतंत्र रूप से अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों से नहीं निकलता। लेकिन इतना स्पष्ट है कि एल गैया को नुकसान पहुंचने का विवाद भी क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच अमेरिका और ईरान के परस्पर विरोधी बयानों का नया मोर्चा बन गया।
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वियना से क्या संकेत मिला
सम्मेलन किसी नए परमाणु समझौते का रास्ता नहीं खोल सका। इसके बजाय उसने तीन आपस में जुड़ी समस्याएं उजागर कीं: अमेरिका की यह मांग कि ईरान संवर्धन छोड़े और निरीक्षण पहुंच बहाल करे; IAEA की सत्यापन करने में असमर्थता; और ऐसा बिगड़ता कूटनीतिक माहौल जिसमें ईरान का परमाणु प्रमुख बैठक में भाग भी नहीं ले सका।
अमेरिकी ईंधन प्रस्ताव से यह जरूर संकेत मिला कि बातचीत के जरिए असैन्य परमाणु व्यवस्था का विचार अभी पूरी तरह छोड़ा नहीं गया है। लेकिन निरीक्षण की कमी, बल प्रयोग की चेतावनियां और इस्लामी की यात्रा पर टकराव बताते हैं कि किसी भी ऐसी व्यवस्था को लागू करने लायक भरोसा और पहुंच फिलहाल बहुत दूर है।
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