तेल बाजार ने हाल की कूटनीतिक खबरों पर काफी तेज प्रतिक्रिया दी है।
27 अप्रैल को The Star ने बताया कि ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.16 डॉलर, यानी 2.05%, बढ़कर 107.49 डॉलर प्रति बैरल हो गया, क्योंकि अमेरिका–ईरान शांति वार्ता अटक गई थी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से शिपमेंट सीमित रहे। उसी दिन WKZO पर प्रकाशित रॉयटर्स रिपोर्ट के मुताबिक तेल करीब 3% चढ़कर दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा; ब्रेंट 108.23 डॉलर और WTI 96.37 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
इसके उलट, जब बाजार को लगा कि बातचीत आगे बढ़ेगी, कीमतें नीचे आईं। 21 अप्रैल को तेल इसलिए गिरा क्योंकि कारोबारियों को उम्मीद थी कि अमेरिका–ईरान वार्ता होगी और मध्य पूर्व के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र से ज्यादा आपूर्ति आ सकेगी; ब्रेंट The Star के मुताबिक 94.44 डॉलर और Channel NewsAsia के मुताबिक 94.53 डॉलर प्रति बैरल बताया गया।
यह अंतर कोई भरोसेमंद मूल्य-लक्ष्य नहीं देता। लेकिन दिशा जरूर बताता है: अटकी हुई बातचीत और सीमित होर्मुज़ शिपमेंट तेल के लिए तेजी का संकेत रहे हैं, जबकि फिर से कूटनीति की उम्मीद कीमतों को शांत करती दिखी है।
यहां सबसे अहम सवाल केवल यह नहीं है कि बातचीत सफल होती है या नहीं। असली सवाल है कि विफल बातचीत के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से वास्तविक तेल प्रवाह कितना बाधित रहता है, और क्या आगे व्यवधान का जोखिम बढ़ता है।
हालिया रिपोर्टों ने तेल की चाल को बार-बार होर्मुज़ से जोड़ा। The Star और WKZO ने ऊंची कीमतों को अटकी हुई बातचीत और होर्मुज़ से सीमित शिपमेंट से जोड़ा, जिससे वैश्विक आपूर्ति तंग बनी रही। ICIS ने भी बताया कि शांति वार्ता टूटने के बाद अमेरिका और ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य के नियंत्रण पर गतिरोध में रहे, जिससे तेल कीमतें ऊपर रहीं।
बड़े उछाल वाला जोखिम इसलिए ज्यादा विशिष्ट है: कोई समझौता न हो और साथ ही होर्मुज़ का जोखिम बिगड़ जाए। 24 अप्रैल को तेल कीमतें दिन में पहले इसलिए चढ़ीं क्योंकि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज पर कमांडो के चढ़ने का फुटेज जारी किया था और बाजार को क्षेत्र में नए सैन्य तनाव का डर था; बाद में Reuters द्वारा बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना बताने पर कीमतें पीछे हटीं।
सबसे बड़ा संतुलनकारी कारक फिर से कूटनीति ही है। 21 अप्रैल की गिरावट ने दिखाया कि जब कारोबारियों को बातचीत आगे बढ़ने और क्षेत्र से ज्यादा आपूर्ति आने की उम्मीद दिखी, तो वे तेल को नीचे भाव देने को तैयार थे।
बाजार दिशा भी तेजी से बदल सकता है। GV Wire पर प्रकाशित Reuters रिपोर्ट के मुताबिक तेल नकारात्मक और सकारात्मक दायरे के बीच झूलता रहा, क्योंकि कारोबारी आपूर्ति व्यवधानों और अमेरिका–ईरान वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावना को साथ-साथ तौल रहे थे। ICIS ने भी बताया कि नई शांति प्रस्तावों के लिए विस्तारित युद्धविराम की कोशिश जारी थी, भले ही गतिरोध के बीच कीमतें ऊपर जा रही थीं।
अगर अमेरिका–ईरान शांति वार्ता विफल होती है, तो तेल कीमतों में कम से कम शुरुआती तेजी की संभावना रहेगी। लेकिन उछाल कितना बड़ा होगा, इसका जवाब होर्मुज़ में है। केवल कूटनीतिक टूटन से जोखिम प्रीमियम जुड़ सकता है; मगर उसी के साथ जलडमरूमध्य से शिपमेंट और सीमित हो जाए या कोई नया सैन्य घटनाक्रम हो, तो कीमतें कहीं ज्यादा ऊपर जा सकती हैं।
इसके उलट, अगर बातचीत जल्दी फिर शुरू हो जाती है या युद्धविराम की कोशिशें भरोसेमंद बनी रहती हैं, तो तेजी सीमित रह सकती है या पलट भी सकती है—जैसा हालिया कारोबार में 21 अप्रैल के आसपास दिख चुका है।
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