इसीलिए कीव छोटे, प्रतीकात्मक विराम और असली युद्धविराम में फर्क करता रहा है। अप्रैल 2026 में पुतिन ने रूस के “विक्ट्री डे” समारोहों के आसपास अस्थायी विराम की बात की, तो ज़ेलेंस्की ने सवाल उठाया कि यह सिर्फ मॉस्को की परेड के लिए कुछ घंटों की सुरक्षा है या कुछ अधिक; यूक्रेन ने लंबी अवधि के युद्धविराम की मांग रखी ।
यूक्रेन की स्थिति में एक महत्वपूर्ण पेच है: कीव ने कभी-कभी नेता-स्तर की सीधी बातचीत को युद्धविराम हासिल करने या उसे पक्का करने का रास्ता भी माना है, सिर्फ युद्धविराम के बाद मिलने वाला “इनाम” नहीं। तुर्किये में प्रस्तावित वार्ता के संदर्भ में ज़ेलेंस्की ने कहा था कि वह पुतिन से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए वहां होंगे, जबकि वह युद्धविराम की उम्मीद भी जता रहे थे ।
उस समय कुछ रिपोर्टों ने यह भी नोट किया कि यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि ज़ेलेंस्की अपनी तुर्किये मौजूदगी को युद्धविराम पहले शुरू होने पर सख्ती से निर्भर कर रहे थे या नहीं । बाद में उनके बारे में रिपोर्ट आया कि यूक्रेन पहले चर्चा में रही पूर्वशर्तों—युद्धविराम या सुरक्षा गारंटी—के बिना भी बातचीत की मेज पर बैठने को तैयार है
।
हालिया बयान में भी ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन लंबे समय से बैठकों के लिए तैयार है; असली काम अब ठोस संवाद-प्रारूप तय करना, युद्ध खत्म करना और सुरक्षा की भरोसेमंद गारंटी सुनिश्चित करना है । इसलिए बेहतर समझ यह है: यूक्रेन युद्धविराम पहले चाहता है, लेकिन अगर बैठक ही लड़ाई रोकने का वास्तविक रास्ता बनती है, तो वह मुलाकात से पीछे नहीं हटना चाहता।
दूसरी बड़ी रेखा यह है कि यूक्रेन ऐसी बातचीत नहीं चाहता जो पहले से ही रूस की मांगों को मानकर शुरू हो। जून 2025 में ज़ेलेंस्की ने रूस के एक युद्धविराम प्रस्ताव को “अल्टीमेटम” बताते हुए खारिज किया और गतिरोध तोड़ने के लिए पुतिन के साथ आमने-सामने बातचीत की मांग दोहराई ।
यानी कीव बातचीत को तैयार दिखता है, लेकिन मॉस्को की शुरुआती शर्तों को पहले से तय एजेंडा या स्वीकार किए गए पैरामीटर के रूप में नहीं मानना चाहता ।
नेता-स्तर की वार्ता के लिए यूक्रेन ने यह भी साफ किया है कि पुतिन खुद टेबल पर हों—सिर्फ निचले स्तर के रूसी अधिकारी नहीं। तुर्किये वार्ता के संदर्भ में रिपोर्टों के मुताबिक, ज़ेलेंस्की ने पुतिन से आमने-सामने मुलाकात पर जोर दिया और रूसी अधिकारियों के साथ विकल्पी बैठक को पर्याप्त नहीं माना ।
क्षेत्रीय मुद्दा इसकी बड़ी वजह है। ज़ेलेंस्की ने कहा है कि क्षेत्रीय समझौते पुतिन से सीधे संपर्क के बिना संभव नहीं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन रूस और अमेरिका को शामिल करने वाले प्रारूपों के लिए खुला है, और किसी चरण में यूरोप की मौजूदगी चाहता है, क्योंकि सुरक्षा गारंटी यूरोपीय संघ और व्यापक “Coalition of the Willing” से जुड़ी हैं ।
कीव के लिए बात सिर्फ गोलीबारी रोकने की नहीं है। यूक्रेन चाहता है कि कोई भी वार्ता युद्ध खत्म करने और उसके बाद की सुरक्षा तय करने की दिशा में जाए। ज़ेलेंस्की ने इसी वजह से “विशिष्ट संवाद ढांचा” खोजने, युद्ध समाप्त करने और भरोसेमंद सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित करने को मुख्य काम बताया है ।
यही कारण है कि यूक्रेन के लिए बैठक में कौन बैठेगा, एजेंडा क्या होगा और अमेरिका-यूरोप जैसे साझेदार सुरक्षा गारंटी में कैसे शामिल होंगे—ये सब सिर्फ औपचारिक सवाल नहीं, बल्कि बातचीत की असली कसौटी हैं ।
ज़ेलेंस्की-पुतिन सीधी बातचीत से पहले यूक्रेन की प्राथमिक शर्तें मोटे तौर पर ये हैं:
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