विडंबना यह है कि Anthropic को AI क्षेत्र की सबसे अधिक वेतन देने वाली कंपनियों में बताया जाता है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का कुल सालाना मुआवज़ा लगभग 3,75,000 डॉलर से लेकर 13 लाख डॉलर तक बताया गया है । ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जब कंपनी खुद इतनी बड़ी रकम दे रही हो, तो उसमें शामिल होने वाले हर व्यक्ति के पूरी तरह मिशन-प्रेरित होने की उम्मीद कितनी व्यावहारिक है।
बड़ी सैलरी प्रतिभा को आकर्षित कर सकती है, लेकिन वह लंबे समय की निष्ठा, सांस्कृतिक मेल या किसी उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता की गारंटी नहीं देती ।
Amodei की चिंता केवल Anthropic तक सीमित नहीं है। OpenAI, Google DeepMind, Meta और Thinking Machines Lab जैसी कंपनियां सीमित संख्या में उपलब्ध शीर्ष शोधकर्ताओं के लिए लगातार प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। इस प्रतिस्पर्धा में वेतन के अलावा GPU और कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच, शोध की दिशा पर प्रभाव और तकनीकी स्वतंत्रता भी अहम हो गई है।
OpenAI की पूर्व CTO Mira Murati द्वारा स्थापित Thinking Machines Lab ने 2025 में 2 अरब डॉलर की सीड फंडिंग जुटाई थी और उसका मूल्यांकन 12 अरब डॉलर बताया गया था। इसके बावजूद लॉन्च के बाद उसकी 42-सदस्यीय संस्थापक टीम में से लगभग एक-तिहाई—13 लोग—कंपनी छोड़ चुके हैं। इनमें छह में से तीन सह-संस्थापक शामिल हैं ।
Barret Zoph और Luke Metz जनवरी 2026 में OpenAI लौट गए, जबकि फरवरी में दो अन्य संस्थापक सदस्य Meta से जुड़ गए । अप्रैल 2026 तक Thinking Machines Lab के कम-से-कम सात पूर्व कर्मचारी Meta में काम कर रहे थे । इन बदलावों के पीछे बड़े मुआवज़ा पैकेजों को एक प्रमुख कारण बताया गया है ।
जून 2026 में Google DeepMind को लगातार दो हाई-प्रोफाइल विदाइयों का सामना करना पड़ा। 18 जून को Gemini के सह-प्रमुख और 2017 के महत्वपूर्ण शोधपत्र “Attention Is All You Need” के सह-लेखक Noam Shazeer ने Google छोड़कर OpenAI जाने की घोषणा की । यह शोधपत्र आधुनिक फ्रंटियर AI मॉडलों के पीछे मौजूद Transformer आर्किटेक्चर की नींव माना जाता है।
इसके लगभग 48 घंटे बाद, 2024 के नोबेल पुरस्कार विजेता और AlphaFold के सह-निर्माता John Jumper ने Google DeepMind छोड़कर Anthropic जाने की घोषणा की । 22 जून को बाजार खुलने पर Alphabet के शेयरों में 6.8% की गिरावट आई और कंपनी के बाजार मूल्य से लगभग 270 अरब डॉलर मिट गए । इसके बाद Jonas Adler और Alexander Pritzel जैसे शोधकर्ताओं के भी Google से Anthropic जाने की खबरें आईं ।
Mark Zuckerberg के नेतृत्व में Meta को AI प्रतिभा को आकर्षित करने वाली सबसे आक्रामक कंपनियों में गिना जा रहा है। शीर्ष कर्मचारियों के लिए चार वर्षों में 30 करोड़ डॉलर तक के पैकेज की रिपोर्ट सामने आई है ।
हालांकि Meta की कथित रिटेंशन दर 64% है, जो Anthropic की बताई गई 80% दर से कम है, फिर भी Thinking Machines Lab और Google से आए शोधकर्ताओं ने उसकी AI टीम को मजबूत किया है ।
AI उद्योग की इस होड़ को अक्सर “मिशनरी बनाम मर्सेनरी” के फ्रेमवर्क से समझाया जा रहा है । यहां “मिशनरी” से आशय उन कर्मचारियों से है जो किसी दीर्घकालिक उद्देश्य और उसके सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता देते हैं, जबकि “मर्सेनरी” उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो बेहतर आर्थिक सौदे के आधार पर कंपनी बदल सकते हैं।
नौकरी बदलते समय शीर्ष शोधकर्ता आम तौर पर चार बातों पर विचार कर रहे हैं:
Anthropic का शुरुआती मॉडल यह था कि प्रतिस्पर्धियों से कम वेतन उन लोगों को अलग कर देगा जो वास्तव में मिशन में विश्वास करते हैं। लेकिन अब कंपनी का कथित मूल्यांकन लगभग 965 अरब डॉलर है और संभावित IPO की चर्चा चल रही है। उसकी सैलरी प्रतिस्पर्धियों से आगे निकल चुकी है, जिससे वह वेतन के मामले में उन्हीं कंपनियों जैसी दिखने लगी है जिनका सुरक्षा-केंद्रित विकल्प बनने का उसका मूल उद्देश्य था ।
कंपनी के भीतर से सुरक्षा शोधकर्ताओं के सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने की घटनाएं भी सामने आई हैं। एक पूर्व सुरक्षा शोधकर्ता ने चेतावनी दी कि “दुनिया संकट में है” और सुरक्षा टीमों पर महत्वपूर्ण काम को पीछे रखने का लगातार दबाव रहता है ।
Amodei ने स्वयं कहा है कि Anthropic पर व्यावसायिक दबाव बहुत अधिक है। कंपनी को तेज़ी से आगे बढ़ते हुए लाभ कमाने की दिशा में भी काम करना है, जबकि वह AI के संभावित खतरों को कम करने वाली अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रियाओं को बनाए रखना चाहती है ।
यही इस पूरे विवाद का मूल है: Anthropic को प्रतिभाशाली इंजीनियरों को आकर्षित करने के लिए बड़ी रकम देनी पड़ती है, लेकिन वह चाहती है कि वे केवल रकम के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित AI बनाने के उद्देश्य के लिए भी काम करें। अब “मिशनरी बनाम मर्सेनरी” का सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि शोधकर्ता किस AI लैब में शामिल होते हैं। यह Anthropic के भीतर भी उसकी संस्कृति, भर्ती और भविष्य के फैसलों को प्रभावित कर रहा है ।