यह आंकड़ा रैनसमवेयर और साइबर हमलों को लेकर चिंता के लगभग बराबर है, जो 74.9% रही । इसका अर्थ है कि कंपनियां भू-राजनीतिक तनाव को महज कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे कारोबारी और सुरक्षा जोखिम के रूप में देख रही हैं।
इस डर की एक ठोस वजह भी है। Proton के पहले के विश्लेषण के अनुसार, यूरोप की सूचीबद्ध कंपनियों में 74% से अधिक अमेरिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चलती हैं और अमेरिकी प्रदाताओं का यूरोप के क्लाउड इकोसिस्टम में लगभग 85% हिस्सा है ।
सर्वे का सबसे चिंताजनक निष्कर्ष कंपनियों की परिचालन निर्भरता से जुड़ा है। 54.5% उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिकी क्लाउड और डिजिटल सेवाएं पूरी तरह बंद होने पर वे एक कारोबारी दिन से ज्यादा काम नहीं कर पाएंगे ।
ईमेल, फाइल स्टोरेज, ग्राहक प्रबंधन प्रणाली (CRM), सॉफ्टवेयर और आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे जरूरी काम अक्सर कुछ ही अमेरिकी प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं। इससे कंपनियों के डिजिटल संचालन में एक ऐसा ‘सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर’ बन गया है, जिसके विफल होते ही पूरा कारोबार प्रभावित हो सकता है ।
बड़ी कंपनियों में 28.7% ने अनुमान लगाया कि ऐसी स्थिति में उन्हें प्रतिदिन €100,000 से अधिक का नुकसान हो सकता है । नुकसान का स्तर कंपनी की अमेरिकी हाइपरस्केलर सेवाओं पर निर्भरता के अनुसार अलग-अलग होगा, लेकिन गहरी निर्भरता वाली कंपनियों के लिए जोखिम काफी बड़ा है।
यही इस सर्वे का सबसे बड़ा विरोधाभास है: कंपनियां खतरे को गंभीर मानती हैं, लेकिन तैयारी कमजोर है। आधे से भी कम कंपनियों के पास संभावित अमेरिकी ‘किल स्विच’ के लिए दस्तावेजीकृत और परीक्षण की गई बिजनेस-कंटिन्युटी योजना है ।
हालांकि 67.8% उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है या ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं , लेकिन विकल्प तलाशना और उसे वास्तविक संकट में इस्तेमाल कर पाना दो अलग बातें हैं। बिना नियमित परीक्षण वाली योजना कागज पर मौजूद रह सकती है, पर सेवा बंद होने की स्थिति में तुरंत काम नहीं आ सकती।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी क्लाउड प्रदाताओं के सामान्य अनुबंध अक्सर सरकार के आदेश पर सेवा बंद किए जाने से ग्राहकों की रक्षा नहीं करते। अनुबंधों की शर्तों में आम तौर पर अमेरिकी कानून का पालन करने के लिए सेवा निलंबित करने की अनुमति होती है ।
कई कंपनियां मानती हैं कि उनका सर्विस-लेवल एग्रीमेंट (SLA) उन्हें सेवा बंद होने से बचाएगा। लेकिन IT Pro और The Register के मुताबिक, किसी सरकारी निर्देश की स्थिति में यह संविदात्मक सुरक्षा प्रभावहीन हो सकती है । इसलिए बैकअप प्रदाता, ऑफलाइन डेटा कॉपी और स्वतंत्र रिकवरी सिस्टम का पहले से परीक्षण करना जरूरी हो जाता है।
कानूनी तनाव का एक आधार 2018 का अमेरिकी CLOUD Act भी है। यह कानून अमेरिकी अधिकारियों को अमेरिकी कंपनियों से डेटा सौंपने की मांग करने की अनुमति देता है, भले ही वह डेटा दुनिया के किसी दूसरे देश में स्टोर हो। यह व्यवस्था यूरोप के कड़े डेटा-सुरक्षा नियम GDPR से टकराव पैदा कर सकती है ।
Proton के एक अलग सर्वे में यूके, फ्रांस और जर्मनी के 3,000 नागरिकों से राय ली गई। इसमें 73% लोगों ने कहा कि यूरोप अमेरिकी टेक कंपनियों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर है ।
काफी संख्या में लोगों ने यह भी संकेत दिया कि वे ऐसी यूरोपीय कंपनी से कारोबार करने से बच सकते हैं, जो अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो । इससे डिजिटल संप्रभुता का दबाव केवल सरकारों और कंपनी बोर्डरूम तक सीमित नहीं रहता—ग्राहक और बाजार भी कंपनियों से स्थानीय विकल्पों पर विचार करने की अपेक्षा कर रहे हैं।
यूरोपीय आयोग ने ऐसे नए नियमों का प्रस्ताव रखा है, जिनका उद्देश्य किसी विदेशी सरकार या कंपनी को यूरोप की जरूरी टेक सेवाओं को बाधित करने वाला ‘किल स्विच’ रखने से रोकना है। जून 2026 में The Guardian ने बताया कि आयोग इस सुरक्षा को कानून का रूप देने की दिशा में काम कर रहा है ।
प्रस्तावों के तहत यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को रक्षा, महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक प्रशासन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में क्लाउड प्रदाताओं के जोखिम का आकलन करना होगा ।
Future of Technology Institute (FOTI) के विश्लेषण के अनुसार, यूरोप के अधिकांश देश अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए किसी न किसी रूप में अमेरिकी क्लाउड सेवाओं पर निर्भर हैं। इससे राष्ट्रीय रक्षा प्रणालियां भी संभावित ‘किल स्विच’ जोखिम के दायरे में आती हैं ।
अमेरिकी हाइपरस्केलर से दूरी बनाना यूरोप के लिए आसान नहीं होगा। Google, Microsoft और Amazon अकेले यूरोप के अनुमानित 70% क्लाउड कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर नियंत्रण रखते हैं । Reuters और BBC के विश्लेषणों के अनुसार, यह निर्भरता संरचनात्मक है और इसे कम करने में वर्षों लग सकते हैं ।
फिर भी कुछ पहल शुरू हो चुकी हैं। अप्रैल 2026 में Cubbit, SUSE, Elemento Cloud और StorPool Storage के गठजोड़ ने अपने शब्दों में यूरोप का पहला पूरी तरह संप्रभु डिजास्टर-रिकवरी पैक पेश किया । इसके अलावा, 61% यूरोपीय CIO और टेक लीडर स्थानीय क्लाउड प्रदाताओं का इस्तेमाल बढ़ाना चाहते हैं। आधे से अधिक का कहना है कि भू-राजनीतिक परिस्थितियां उन्हें अमेरिकी हाइपरस्केलरों पर और ज्यादा निर्भर होने से रोकेंगी ।
यूरोपीय कंपनियों को अमेरिकी क्लाउड का संभावित ‘किल स्विच’ रैनसमवेयर जितना ही गंभीर खतरा लग रहा है। 54.5% कंपनियां मानती हैं कि सेवा बंद होने पर वे एक दिन के भीतर ठप हो सकती हैं। इसके बावजूद आधे से भी कम कंपनियों ने वास्तविक रूप से जांची गई आपातकालीन योजना तैयार की है।
यूरोपीय संघ सॉवरेन क्लाउड और डिजिटल संप्रभुता के जरिए इस कमजोरी को कम करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिकी हाइपरस्केलरों पर महाद्वीप की निर्भरता अभी इतनी गहरी है कि केवल चिंता जताना पर्याप्त नहीं होगा—कंपनियों को अब अपने ‘प्लान बी’ की सचमुच परीक्षा लेनी होगी।