नए मॉडल में Gemini हर इंटरैक्शन का कम्प्यूटेशनल खर्च मापता है। इसका मतलब है कि एक ही प्रॉम्प्ट दूसरे से कहीं ज्यादा कोटा इस्तेमाल कर सकता है।
कैलकुलेशन में मुख्यतः तीन चीजें शामिल होती हैं:
उदाहरण के लिए:
Google ने लिमिट रीसेट होने का तरीका भी बदल दिया है।
इसका मतलब है कि अब एक ही दिन में कई बार नया कोटा मिल सकता है, लेकिन पूरे सप्ताह की एक बड़ी सीमा भी लागू रहती है।
Google के सपोर्ट दस्तावेज़ के अनुसार यह बदलाव शुरुआत में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के उपयोगकर्ताओं पर लागू हुआ, जबकि कम उम्र के उपयोगकर्ताओं पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ा।
इसी बदलाव के आसपास Google ने अपने उपभोक्ता AI प्लान्स को भी पुनर्गठित किया। प्रमुख प्लान इस प्रकार बताए गए:
Google के अनुसार भुगतान वाले प्लान्स में आम तौर पर उच्च compute limits और मॉडलों तक प्राथमिक पहुँच मिलती है।
यदि कोई यूज़र अपनी उपलब्ध सीमा तक पहुँच जाता है, तो Gemini पूरी तरह बंद नहीं होता। कुछ मामलों में सिस्टम:
इसके अलावा Google कुछ सेवाओं में अतिरिक्त AI क्रेडिट खरीदने या उच्चतर सब्सक्रिप्शन प्लान में अपग्रेड करने का विकल्प भी देता है।
यह बदलाव तकनीकी रूप से अधिक लचीला माना जा रहा है, लेकिन कई Gemini यूज़र्स ने इसकी आलोचना की है।
कुछ प्रमुख शिकायतें हैं:
सोशल मीडिया और फ़ोरम पर कई लोगों ने इस बदलाव को "bait‑and‑switch" तक कहा, क्योंकि उपयोग नियम अधिक सख्त लगने लगे जबकि कीमतें ज्यादा नहीं बदलीं।
Gemini का यह बदलाव एक व्यापक उद्योग प्रवृत्ति को भी दिखाता है। कई आधुनिक AI सेवाएँ अब प्रॉम्प्ट गिनने के बजाय वास्तविक कम्प्यूट या टोकन उपयोग के आधार पर लागत और सीमाएँ तय कर रही हैं।
ऐसा इसलिए क्योंकि:
कम्प्यूट‑आधारित मॉडल से कंपनियाँ अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सकती हैं, खासकर जब AI सिस्टम लगातार अधिक शक्तिशाली और महंगे होते जा रहे हों।
मई 2026 का यह अपडेट Gemini के लिए सबसे बड़े संरचनात्मक बदलावों में से एक है। अब प्लेटफ़ॉर्म सिर्फ संदेशों की संख्या नहीं गिनता, बल्कि यह देखता है कि हर इंटरैक्शन को चलाने में कितनी कम्प्यूटिंग शक्ति खर्च हुई।
साधारण उपयोगकर्ताओं के लिए अनुभव बहुत अलग नहीं लग सकता। लेकिन भारी उपयोग करने वालों—जैसे लंबे चैट, जटिल प्रॉम्प्ट या उन्नत टूल इस्तेमाल करने वाले—के लिए नई compute‑based सीमाएँ पहले से कहीं जल्दी सामने आ सकती हैं।
Comments
0 comments