ये ऐसे सिस्टम हैं जो रोजमर्रा के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण तो होते हैं, लेकिन ऑपरेटिंग सिस्टम या वैश्विक क्लाउड प्लेटफॉर्म की तुलना में बदलना अपेक्षाकृत आसान होता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि हांगकांग सरकार ने पश्चिमी तकनीक को हटाने का कोई शहर‑व्यापी आदेश जारी नहीं किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बदलाव मुख्य रूप से खरीद निर्णयों और परियोजना स्तर पर हो रहा है, न कि किसी आधिकारिक नीति के कारण।
इसी वजह से कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ—खासकर वित्तीय क्षेत्र में—अब भी पश्चिमी क्लाउड सेवाओं, डेवलपर टूल्स और प्रोडक्टिविटी सॉफ्टवेयर पर काफी निर्भर हैं। इसलिए शहर के टेक इकोसिस्टम में पश्चिमी कंपनियों की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सॉफ्टवेयर विक्रेताओं में बदलाव के साथ‑साथ हांगकांग सरकार साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है ताकि अलग‑अलग विभागों के सिस्टम बेहतर तरीके से जुड़ सकें।
इनमें प्रमुख हैं:
ये प्लेटफॉर्म सरकारी विभागों को कंप्यूटिंग संसाधन साझा करने, डेटा का आदान‑प्रदान करने और एआई या डेटा एनालिटिक्स परियोजनाएँ चलाने में मदद करते हैं। दिसंबर 2024 तक ये ढांचा 500 से अधिक डिजिटल सरकारी सेवाओं को सपोर्ट कर रहा था।
इसके अलावा सरकार ने iAM Smart नाम का डिजिटल पहचान प्लेटफॉर्म भी विकसित किया है। इससे नागरिक एक ही लॉग‑इन के जरिए सरकारी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं और डिजिटल हस्ताक्षर भी कर सकते हैं। 2025 तक सभी सरकारी विभागों ने इसे अपनाकर एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल बना लिया था।
ये साझा सिस्टम हांगकांग के डिजिटल प्रशासन का आधार बन रहे हैं और भविष्य में विभिन्न सॉफ्टवेयर विक्रेताओं के साथ काम करना आसान बना सकते हैं।
इस बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण मुख्यभूमि चीन के ग्रेटर बे एरिया (GBA)—जिसमें ग्वांगडोंग, हांगकांग और मकाऊ शामिल हैं—के साथ बढ़ती आर्थिक और तकनीकी साझेदारी भी है।
नीतियाँ इस क्षेत्र में शोध, नवाचार, डेटा प्रवाह और पूंजी के अधिक मुक्त आदान‑प्रदान को बढ़ावा देती हैं। उदाहरण के लिए, शेनझेन‑हांगकांग विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग क्षेत्र जैसी परियोजनाएँ सीमा‑पार तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं।
क्योंकि कई मुख्यभूमि कंपनियाँ पहले से ही चीनी सॉफ्टवेयर और मानकों पर काम करती हैं, इसलिए उनके साथ काम करने वाले संगठनों के लिए वही प्लेटफॉर्म अपनाना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा भी हांगकांग के आईटी निर्णयों को प्रभावित कर रही है। निर्यात नियंत्रण, प्रतिबंधों और तकनीकी आपूर्ति शृंखला से जुड़े जोखिमों ने सरकारों और बड़े संगठनों को अपने डिजिटल सिस्टम के बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर किया है।
हांगकांग के अधिकारी भी तकनीकी क्षेत्र में भू‑राजनीतिक जोखिमों को विविधीकृत (diversify) करने की जरूरत पर जोर दे चुके हैं।
इस संदर्भ में कुछ संस्थाएँ विदेशी तकनीकी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना भविष्य की अनिश्चितताओं से बचाव का एक तरीका मानती हैं।
अधिकांश विशेषज्ञों के अनुसार सबसे संभावित परिणाम यह नहीं है कि पश्चिमी तकनीक पूरी तरह गायब हो जाएगी। बल्कि हांगकांग में एक हाइब्रिड या दो‑ध्रुवीय टेक स्टैक विकसित हो सकता है।
संभव परिदृश्य कुछ इस तरह हो सकता है:
हांगकांग की विशिष्ट स्थिति—एक वैश्विक वित्तीय केंद्र और साथ ही चीन की अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा शहर—इस तरह के मिश्रित तकनीकी ढांचे को संभव बनाती है।
हांगकांग में जो बदलाव हो रहा है वह पश्चिमी तकनीक को अचानक हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि डिजिटल बुनियादी ढांचे का धीरे‑धीरे पुनर्संतुलन है।
इस परिवर्तन को तीन मुख्य शक्तियाँ आगे बढ़ा रही हैं:
इन सबके मिलकर असर से हांगकांग का टेक इकोसिस्टम उस मॉडल की ओर बढ़ रहा है जहाँ पश्चिमी और चीनी दोनों तकनीकी प्रणालियाँ साथ‑साथ मौजूद रहेंगी—और कई जगहों पर एक‑दूसरे से प्रतिस्पर्धा भी करेंगी।
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