लेकिन करोड़ों लोगों के इस इंजीनियरिंग चमत्कार की एक इंसानी कीमत भी है, जिसे अब समझा जा रहा है। रूसी विज्ञान अकादमी (Russian Academy of Sciences) के केंद्रीय अर्थशास्त्र और गणित संस्थान के निदेशक और प्रोफेसर अल्बर्ट बख्तिज़िन ने जुलाई 2026 में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित एक लेख में तर्क दिया है कि हम लोगों को विशाल शहरों में समेटना तो सीख गए हैं, लेकिन उन्हें परिवारों में बांधने की क्षमता खोते जा रहे हैं । उनकी मुख्य चिंता यह है कि गीगासिटी का भारी आकार सामाजिक ताने-बाने को कमज़ोर कर रहा है: जनसंख्या घनत्व बढ़ने के बावजूद शारीरिक और मानसिक अलगाव बढ़ सकता है, क्योंकि विशाल शहरों का बुनियादी ढांचा, लंबी दूरी का सफर और आर्थिक दबाव सार्थक रिश्तों और परिवार निर्माण के लिए जरूरी समय-स्थान को खत्म कर रहे हैं ।
बख्तिज़िन जिसे 'गीगासिटी' (5 करोड़ या उससे अधिक आबादी वाले शहर) कहते हैं, उसकी ओर यह बदलाव मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका से आ रहा है। UN की रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान 33 मेगासिटी में से 19 एशिया में हैं । ढाका और जकार्ता इस कहानी के मुख्य पात्र हैं, लेकिन अकेले नहीं हैं। नाइजीरिया का लागोस संभावित रूप से 2100 तक 8.8 करोड़ की आबादी तक पहुंच सकता है ।
बख्तिज़िन का कहना है कि भविष्य के बड़े पैमाने के शहरीकरण का केंद्र अफ्रीका और दक्षिण एशिया की ओर खिसक रहा है । यह UN के व्यापक आंकड़ों से मेल खाता है, जो दिखाता है कि 2050 तक दुनिया की शहरी आबादी में 1.7 अरब से अधिक की वृद्धि होकर यह लगभग 6.5 अरब तक पहुंच जाएगी ।
| शहरी समूह | 2025 में आबादी | 2050 में अनुमानित आबादी |
|---|---|---|
| जकार्ता, इंडोनेशिया | ~4.2 करोड़ | 5.18 करोड़ |
| ढाका, बांग्लादेश | ~3.66 करोड़ | 5.21 करोड़ |
| टोक्यो, जापान | ~3.34 करोड़ | 3.07 करोड़ |
2050 तक, ढाका लगभग 3 लाख निवासियों के मामूली अंतर से जकार्ता से आगे रहने की उम्मीद है। दोनों शहरों में विस्फोटक वृद्धि देखने को मिलेगी - ढाका की आबादी 2000 के बाद से टोक्यो की तुलना में सात गुना से अधिक तेज़ी से बढ़ी है । दूसरी ओर, टोक्यो के सदी के मध्य तक सातवें स्थान पर खिसकने का अनुमान है, जबकि शंघाई और नई दिल्ली जैसे शहर इसे पीछे छोड़ देंगे ।
बख्तिज़िन गीगासिटी के उदय को एक इंजीनियरिंग विजय और एक सामाजिक चुनौती दोनों के रूप में देखते हैं - तकनीकी क्षमता ने इतने बड़े शहरी केंद्रों के निर्माण और प्रबंधन की अनुमति तो दे दी है, लेकिन हम उन इंसानी पैमानों के कनेक्शन को संरक्षित नहीं कर पाए हैं जो परिवारों और समुदायों को बनाए रखते हैं । यह सिर्फ एक सैद्धांतिक चिंता नहीं है। रूसी मेगासिटी पर शोध से पता चला है कि निवासी 'सामाजिक और स्थानिक रूप से अलग-थलग' हो जाते हैं, जहां उनका जीवन दोहरे दबाव में होता है: शहर की संरचनात्मक-कार्यात्मक व्यवस्था लगातार तेज़ और बदलती रहती है ।
जैसे-जैसे शहरी समूह 5 करोड़ के आंकड़े को पार करेंगे, बख्तिज़िन का सवाल और भी अहम हो जाएगा: क्या हम ऐसे गीगासिटी डिज़ाइन कर सकते हैं जो सिर्फ लोगों को रखने की जगह नहीं, बल्कि उन्हें परिवार बनाने, दोस्ती निभाने और समुदाय बनाने में भी मदद करें? UN के आंकड़े हमें चुनौती का आकार तो बताते हैं - लेकिन इस सवाल का जवाब कि क्या इतने बड़े पैमाने पर इंसानी जुड़ाव बच पाएगा, अभी लिखा जा रहा है। इतना साफ है कि अगले 25 साल हमारी इंजीनियरिंग और हमारी सामाजिक कल्पना दोनों की परीक्षा लेंगे।
यह लेख मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) के 'विश्व शहरीकरण संभावनाएँ 2025' डेटा और साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित अल्बर्ट बख्तिज़िन के विश्लेषण पर आधारित है। सभी जनसंख्या आंकड़े UN की समान पद्धति से लिए गए हैं और राष्ट्रीय जनगणना के आंकड़ों से थोड़े भिन्न हो सकते हैं।