क्योंकि बड़े हब हर घंटे सैकड़ों कनेक्टिंग फ्लाइट्स संभालते हैं, इसलिए एक छोटी रुकावट भी कई देशों की उड़ानों को प्रभावित कर सकती है।
वसंत 2026 के दौरान एक और बड़ा कारक था—जेट‑फ्यूल की घटती आपूर्ति। मध्य पूर्व में बढ़ते भू‑राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ (दुनिया के प्रमुख तेल मार्गों में से एक) से गुजरने वाली शिपिंग में बाधा ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया ।
इससे केरोसीन यानी जेट‑फ्यूल की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं और एयरलाइनों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ा। आम तौर पर ईंधन एयरलाइन के कुल संचालन खर्च का लगभग एक‑तिहाई हिस्सा होता है ।
इस स्थिति से निपटने के लिए एयरलाइनों ने अपने शेड्यूल घटाने शुरू कर दिए। रिपोर्टों के अनुसार एयरलाइनों ने मिलकर करीब 13,000 फ्लाइट्स और लगभग 20 लाख सीटें मई के शेड्यूल से हटा दीं ।
कुछ मामलों में कटौती बहुत बड़ी थी। उदाहरण के लिए, लुफ्थांसा ग्रुप ने ईंधन कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के बीच लगभग 20,000 उड़ानें रद्द करने की योजना घोषित की ।
ये कटौतियाँ हर दिन की देरी का सीधा कारण नहीं थीं, लेकिन उन्होंने पूरे सिस्टम को कम लचीला बना दिया—जिससे अचानक समस्या आने पर रिकवरी करना मुश्किल हो गया।
हर एयरलाइन इस संकट से समान रूप से प्रभावित नहीं हुई। कुछ कंपनियों ने पहले से ही ईंधन खरीद कर या वित्तीय हेजिंग के ज़रिए जोखिम कम कर लिया था।
उदाहरण के तौर पर, ब्रसेल्स एयरलाइंस ने कहा कि उसने साल के अंत तक की अपनी लगभग 80% जेट‑फ्यूल ज़रूरतें हेजिंग के जरिए सुरक्षित कर ली हैं, जिससे उसे तत्काल रद्दीकरण से बचने में मदद मिली ।
दूसरी एयरलाइनों ने यात्रियों को संभावित किराया वृद्धि और सीमित शेड्यूल के बारे में चेतावनी दी । इसलिए यात्रियों का अनुभव काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता था कि वे किस एयरलाइन और किस रूट से यात्रा कर रहे थे।
यूरोप की एविएशन प्रणाली अत्यधिक जुड़ी हुई है। इसलिए जब कई समस्याएँ एक साथ आती हैं, तो उनका प्रभाव तेजी से बढ़ जाता है। इस मामले में तीन मुख्य कारक एक‑दूसरे को बढ़ा रहे थे:
इन तीनों के मेल से देरी और रद्दीकरण पूरे महाद्वीप में फैल गए।
मई का संकट अचानक नहीं आया था। इससे पहले भी पूरे यूरोप में कई व्यवधान देखे गए थे:
ये घटनाएँ बताती हैं कि मौसम, लॉजिस्टिक्स और भू‑राजनीतिक घटनाएँ मिलकर यूरोप के एविएशन सिस्टम को अस्थिर बना सकती हैं।
मई 2026 में यूरोप की फ्लाइट व्यवधान किसी एक कारण से नहीं हुआ। इसके पीछे तीन मुख्य कारकों का मेल था:
अलग‑अलग देखने पर ये समस्याएँ संभाली जा सकती थीं। लेकिन जब ये एक साथ हुईं, तो उन्होंने पूरे महाद्वीप में यात्रा को प्रभावित करने वाला संकट पैदा कर दिया—जिसका असर यात्रियों, एयरलाइनों और पूरे एविएशन उद्योग पर पड़ा।
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