इस बिकवाली के लिए तत्काल उत्प्रेरक का काम राष्ट्रपति ट्रंप के बयान ने किया। उन्होंने सप्ताहांत में कहा कि ईरान के साथ एक समझौता "काफी हद तक तय" (largely negotiated) हो चुका है और जल्द ही इसकी घोषणा होगी । इस बयान ने उम्मीद जगा दी कि एक युद्धविराम की रूपरेखा से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा, जो युद्ध से पहले वैश्विक तेल और LNG शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता था ।
व्यापारियों ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। WTI क्रूड फ्यूचर्स लगभग 6% गिरकर 91 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 4.8–5.9% गिरकर 97–98.50 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में आ गया और दो सप्ताह के निचले स्तर को छू लिया । इस गिरावट को मुनाफावसूली ने और बढ़ा दिया: फरवरी 2026 के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से कई व्यापारियों ने बड़ी पोजीशन बना रखी थी और सोमवार का दिन मुनाफा वसूलने का एक स्वाभाविक मौका था ।
प्रस्तावित व्यवस्था की रूपरेखा, जिसकी सबसे पहले रिपोर्ट एक्सियोस (Axios) ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दी थी, एक 60-दिवसीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर केंद्रित है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है । मेज पर रखी गई अहम शर्तों में शामिल हैं:
अहम बात यह है कि ये शर्तें अभी भी विवादित हैं। ईरानी मीडिया ने अमेरिकी बयानों पर आपत्ति जताई है और जोर देकर कहा है कि तेहरान, होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा और परमाणु मुद्दे शुरुआती MoU का हिस्सा नहीं हैं । ये असहमतियां दिखाती हैं कि दोनों पक्ष अभी भी एक हस्ताक्षरित और लागू करने योग्य समझौते से कितनी दूर हैं।
अगर कोई समझौता हो भी जाता है, तब भी ऊर्जा विश्लेषक कई ऐसे कारकों की ओर इशारा करते हैं जो कीमतों में मौजूदा गिरावट को नाजुक और संभावित रूप से अल्पकालिक बनाते हैं।
संरचनात्मक आपूर्ति की कमी। ईरान युद्ध ने पहले ही वैश्विक तेल बाजार को अनुमानित अधिशेष से एक बड़े घाटे में बदल दिया है। अप्रैल में आठ विश्लेषकों के एक रॉयटर्स सर्वेक्षण ने अनुमान लगाया कि 2026 में मांग, आपूर्ति से औसतन 750,000 बैरल प्रति दिन अधिक रहेगी, जो पूरे वर्ष के दौरान 2.13 मिलियन बैरल प्रति दिन के अनुमानित उत्पादन नुकसान से प्रेरित है । होर्मुज के बंद होने के कारण फारस की खाड़ी के उत्पादकों को अपने उत्पादन में लगभग 6% की कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है , और यह भौतिक कमी कूटनीतिक सुर्खियों की परवाह किए बिना बनी हुई है।
आपूर्ति बहाली की धीमी प्रक्रिया। विश्लेषक आगाह करते हैं कि अगर शांति समझौते पर दस्तखत भी हो जाते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य तेल प्रवाह बहाल होने में महीनों लग सकते हैं। क्षतिग्रस्त ऊर्जा बुनियादी ढांचा, बीमा से जुड़ी अड़चनें, और सुरंगों को साफ करने और टैंकरों का रास्ता बदलने की जटिल प्रक्रिया का मतलब है कि आपूर्ति का झटका रातों-रात खत्म नहीं होगा । जैसा कि एक शीर्ष तेल विश्लेषक ने अप्रैल में चेतावनी दी थी, "अगले दो महीने एक जारी रहने वाली, संपूर्ण आपदा साबित होंगे, भले ही आप कल जलडमरूमध्य खोल दें, क्योंकि यह स्थिति अब तय हो चुकी है" ।
सुर्खियों से संचालित अस्थिरता। संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल बाजार बार-बार हिचकोले खा चुका है, जहां US-ईरान वार्ता में हर मोड़ पर कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है । ING और अन्य जगहों के विश्लेषकों ने हाल की स्थिरता को एक "भ्रामक शांति" (deceptive calm) बताया है, और कहा है कि ईरान के यूरेनियम भंडार और होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर अनसुलझी असहमतियां हर कारोबारी सत्र में अनिश्चितता का इंजेक्शन लगाती रहती हैं ।
एक ऐसा समझौता जिस पर दस्तखत नहीं हुए। सप्ताहांत की तमाम उम्मीदों के बावजूद, ट्रंप ने खुद आगाह किया कि "ईरान के साथ समझौता या तो एक महान और सार्थक होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा," जबकि ईरानी अधिकारी प्रगति पर मिले-जुले संकेत देते रहे । अल जज़ीरा के विश्लेषकों ने प्रस्तावित MoU को "एक वास्तविक समझौते के बजाय, प्रतिबंधों, तेल बिक्री, परमाणु मुद्दों और जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने वाला एक समय खरीदने वाला युद्धविराम" बताया है ।
संक्षेप में कहें तो, सोमवार की कीमतों में गिरावट वास्तविक कूटनीतिक प्रगति को दर्शाती है - लेकिन यह एक ऐसे नतीजे की कीमत तय कर रही है जो अभी भी निश्चित नहीं है। जब तक टैंकर वास्तव में होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना रोक-टोक के नहीं गुजरने लगते, तब तक तेल बाजार छुरी की धार पर संतुलित रहेगा, जहां बातचीत में कोई भी टूट कुछ ही घंटों में कीमतों को तेजी से ऊपर भेज सकती है।