इन प्लेटफॉर्म्स पर Bitcoin और Ethereum फ्यूचर्स में सबसे बड़ी हानि दर्ज हुई, क्योंकि इन दोनों का डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम सबसे अधिक है।
इसके अलावा कुछ बड़े ऑल्टकॉइन भी प्रभावित हुए, जैसे:
यह लिक्विडेशन केवल एक तकनीकी घटना नहीं थी—इसके पीछे पहले से बन रहा दबाव भी था।
कुछ प्रमुख कारक:
इन कारणों से बाजार पहले से कमजोर था। जैसे ही कीमत नीचे गई, खरीदारों की संख्या कम रही और बिकवाली तेजी से बढ़ गई।
फंडिंग रेट्स के बारे में इस विशेष घटना से ठीक पहले स्पष्ट डेटा सीमित है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि उच्च लेवरेज और भारी लॉन्ग पोज़िशनिंग ने गिरावट को तेज़ बनाया।
यह गिरावट एक बड़े दीर्घकालिक करेक्शन के बीच हुई।
यानी उस समय बाजार लगभग 40% नीचे ट्रेड कर रहा था।
यह अंतर बताता है कि 2025 के बाद से जारी गिरावट और अनिश्चितता अभी भी ट्रेडरों के व्यवहार और लेवरेज को प्रभावित कर रही थी।
मई का यह लिक्विडेशन अलग‑थलग घटना नहीं था। 2026 के दौरान क्रिप्टो डेरिवेटिव मार्केट में कई बड़े “लिक्विडेशन वेव” देखे गए।
उदाहरण के लिए:
लिक्विडेशन वेव केवल अस्थायी गिरावट नहीं होती। यह बाजार की संरचना के बारे में बहुत कुछ बताती है।
जब बड़ी संख्या में ट्रेडर लेवरेज के साथ पोज़िशन लेते हैं, तो छोटी सी कीमत गिरावट भी स्वचालित लिक्विडेशन की श्रृंखला शुरू कर सकती है। इससे अस्थिरता बढ़ जाती है।
हालाँकि, कई बार ऐसे बड़े लिक्विडेशन के बाद बाजार में लेवरेज कम हो जाता है और कुछ समय के लिए ट्रेडिंग अपेक्षाकृत स्थिर भी हो सकती है—जब तक कि नए सट्टा पोज़िशन फिर से जमा न हो जाएँ।
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