भूराजनीतिक तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा। खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत अस्थायी रूप से $112 प्रति बैरल से ऊपर चली गई।
तेल की कीमतें बढ़ने से वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा होता है। यदि महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें जल्दी कम नहीं करते या उन्हें बढ़ा भी सकते हैं। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर जोखिम भरे एसेट्स—जैसे क्रिप्टो—से दूरी बनाते हैं।
संस्थागत निवेशकों की गतिविधि भी गिरावट का बड़ा कारण बनी। क्रिप्टो निवेश उत्पादों से $1 बिलियन से अधिक का शुद्ध आउटफ्लो दर्ज किया गया।
खासतौर पर स्पॉट Bitcoin ETF से बड़ी निकासी देखने को मिली, जिसमें एक दिन में करीब $635 मिलियन बाहर निकल गया।
ETF से पैसा निकलने का मतलब है कि फंड मैनेजरों को निवेशकों के रिडेम्प्शन के लिए वास्तविक Bitcoin या अन्य एसेट बेचने पड़ते हैं। इससे बाजार में सीधा बिक्री दबाव पैदा होता है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक एक ही दिन में करीब $290 मिलियन स्पॉट Bitcoin ETF से बाहर गया।
क्रिप्टो बाजार में बड़ी मात्रा में ट्रेडिंग लीवरेज के साथ होती है—यानी उधार लेकर बड़ी पोजिशन लेना।
जब कीमतें गिरती हैं, तो ऐसे कई ट्रेड अपने‑आप बंद हो जाते हैं। हाल की गिरावट के दौरान सिर्फ 24 घंटों में $657 मिलियन से ज्यादा क्रिप्टो पोजिशन लिक्विडेट हो गईं, जिनमें अधिकांश लंबी (long) पोजिशन थीं।
इससे एक चक्र बन जाता है:
यही वजह है कि कई बार छोटी गिरावट भी अचानक तेज बिकवाली में बदल जाती है।
क्रिप्टो बाजार पहले से ही व्यापक आर्थिक दबाव का सामना कर रहा था। लगातार महंगाई और ऊंची ब्याज दरों की आशंका के कारण वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ रही थी और बाजार में लिक्विडिटी कम हो रही थी।
ऐसे माहौल में तकनीकी शेयरों से लेकर क्रिप्टोकरेंसी तक—अधिकांश जोखिम वाले निवेश दबाव में आ जाते हैं। Bitcoin का $80,000 के स्तर से नीचे फिसलना इसी व्यापक जोखिम‑विमुख माहौल को दर्शाता है।
क्रिप्टो बाजार में Bitcoin और Ethereum सबसे बड़े और सबसे अधिक तरल (liquid) एसेट हैं। अधिकतर संस्थागत निवेश, ETF और बड़े ट्रेडिंग डेस्क इन्हीं में निवेश करते हैं।
इसलिए जब बड़े निवेशक जोखिम कम करते हैं, तो सबसे पहले बिक्री BTC और ETH में दिखाई देती है—और फिर उसका असर पूरे क्रिप्टो बाजार में फैल जाता है।
हालिया गिरावट किसी एक खबर का परिणाम नहीं थी। यह कई दबावों के एक साथ आने का परिणाम था:
जब ये सभी कारक एक साथ आते हैं, तो बाजार में तेज और अचानक गिरावट देखी जा सकती है—भले ही क्रिप्टो का दीर्घकालिक दृष्टिकोण बदला न हो।
निवेशकों के लिए यह घटना इस बात का संकेत भी है कि अब क्रिप्टो बाजार वैश्विक राजनीति और मैक्रोइकॉनॉमिक घटनाओं से पहले से कहीं अधिक प्रभावित होता है।
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