इस संकट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला असर एंट्री-लेवल और बजट स्मार्टफोन सेगमेंट पर पड़ा है।
इसके विपरीत, प्रीमियम सेगमेंट में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। CMR के अनुसार, भारत में 2026 की पहली तिमाही में प्रीमियम सेगमेंट (आमतौर पर ₹50,000 से ऊपर के फोन) में 25% की वृद्धि हुई, जबकि कुल मार्केट 2-3% गिर गया ।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई अस्थायी गिरावट नहीं, बल्कि एक स्थायी ढांचागत बदलाव है। मेमोरी चिप की कीमतें पिछले कुछ समय में चार गुना तक बढ़ गई हैं। एक सस्ते फोन की कुल निर्माण लागत (BoM) में मेमोरी का हिस्सा काफी बड़ा होता है, ऐसे में कंपनियों के लिए मुनाफा कमाना असंभव हो गया है । IDC ने सीधे शब्दों में कहा है कि लगभग 171 मिलियन यूनिट वाला सब-$100 सेगमेंट स्थायी रूप से अलाभकारी होने की कगार पर है
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निर्माता अब मजबूरी में अपने सबसे सस्ते मॉडलों को बंद कर रहे हैं। जो ग्राहक पहले ₹7,000-₹8,000 में नया स्मार्टफोन खरीद लेते थे, अब उनके लिए बाजार में नए विकल्प लगभग खत्म होते जा रहे हैं।
जैसे-जैसे नए एंट्री-लेवल डिवाइस अप्राप्य और अलाभकारी होते जा रहे हैं, सेकेंडरी (रिफर्बिश्ड) बाजार कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहकों के लिए डिफ़ॉल्ट चैनल बनता जा रहा है । आने वाले वर्षों में, खासकर भारत, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों में, पुराने और रिन्यू किए गए फोनों की मांग में तगड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
यह संकट जल्दी खत्म होने वाला नहीं है क्योंकि:
यह एक विरोधाभासी स्थिति है: स्मार्टफोन शिपमेंट (मात्रा) रिकॉर्ड स्तर तक गिर रही है, लेकिन बाजार का कुल मूल्य (वैल्यू) 3.8% बढ़कर नई ऊंचाई पर पहुंचने का अनुमान है । इसका कारण यह है कि बिक्री का मिश्रण तेजी से महंगे मॉडलों की ओर खिसक रहा है। Apple का iOS, हुवावे का HarmonyOS, और फोल्डेबल फोन इस संकट में भी फल-फूल रहे हैं
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यह संकट निर्माताओं की प्राथमिकताओं को हमेशा के लिए बदल देगा। अब कंपनियां कम मार्जिन वाले लाखों फोन बेचने के बजाय, ज्यादा कीमत वाले कम फोन बेचने पर ध्यान देंगी। यह बदलाव अरबों ग्राहकों वाले बजट बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल देगा।
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