2. यूरोज़ोन की Q2 जीडीपी उम्मीद से बेहतर
यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था 2026 की दूसरी तिमाही में तिमाही-दर-तिमाही 0.4% बढ़ी, जो 0.2% के अनुमान से कहीं बेहतर थी। यह 2025 की शुरुआत के बाद सबसे तेज तिमाही वृद्धि थी । जुलाई के अंत में जारी इस आंकड़े ने यूरो को एक मजबूत नींव दी।
3. यूरोज़ोन में बढ़ती महंगाई
जुलाई 2026 में यूरोज़ोन की हेडलाइन महंगाई दर साल-दर-साल 2.9% पर पहुंच गई, जो जून में 2.8% थी। इसमें ऊर्जा की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला, जो 8.5% से बढ़कर 10.0% हो गया । कोर महंगाई (जिसमें खाद्य और ऊर्जा शामिल नहीं है) भी 2.4% से बढ़कर 2.5% हो गई । महंगाई के इस लगातार बने रहने से यह उम्मीद मजबूत हुई कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रखेगा। बाजार में यह अनुमान लगाया जाने लगा कि 2027 की शुरुआत तक ECB की जमा दर 2.75% तक पहुंच सकती है ।
4. फेडरल रिजर्व का सुस्त (Dovish) रुख
EUR/USD के $1.15 से ऊपर जाने का सबसे बड़ा कारण फेडरल रिजर्व की जुलाई बैठक के बाद अमेरिकी रियल यील्ड (मुद्रास्फीति-समायोजित ब्याज दरों) में तेज गिरावट थी । बाजारों ने साफ संकेत समझ लिया कि ब्याज दर बढ़ाने का चक्र खत्म हो गया है, और अब सवाल 'कितनी और बढ़ोतरी?' से बदलकर 'कब कटौती शुरू होगी?' हो गया है । फेड की इस घोषणा के बाद डॉलर में भारी बिकवाली हुई, जिससे EUR/USD ने जुलाई का अंत 1.1530 के करीब किया और महीने के अंतिम हफ्ते में लगभग 1.4% का लाभ कमाया । अमेरिकी विकास दर के कमजोर आंकड़ों और नरम मासिक महंगाई ने डॉलर पर और दबाव बढ़ाया ।
मजबूत बुनियादी कारकों के बावजूद, यूरो की यह तेजी एक अच्छी तरह से परिभाषित तकनीकी अवरोध से टकरा गई है। 1.1570 का स्तर 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और जनवरी 2026 की डाउनट्रेंड लाइन का संगम है। यह वह क्षेत्र है जिसने तीसरी बार यूरो को आगे बढ़ने से रोका है । अगस्त की शुरुआत में, EUR/USD 1.1505-1.1525 के संकीर्ण दायरे में कारोबार कर रहा था, जिसका तत्काल समर्थन स्तर 1.1500-1.1480 पर था । इस समर्थन स्तर के नीचे जाने पर कीमतें मध्य-1.14 के स्तर तक आ सकती हैं।
डॉलर पर दबाव डालने वाला प्रमुख कारक फेड का सतर्क रुख है, लेकिन संरचनात्मक पृष्ठभूमि कहीं अधिक जटिल है। फेड और ECB की प्रमुख नीतिगत दरों के बीच का अंतर अभी भी लगभग 137 आधार अंक (बेसिस पॉइंट) है, जो ऐतिहासिक रूप से यूरो की तेजी को सीमित करता रहा है । हालांकि, ECB द्वारा दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदें इस अंतर को कुछ हद तक कम कर रही हैं। बाजार ने 2027 की शुरुआत तक ECB द्वारा दो और दर वृद्धि की पूरी संभावना जताई है ।
शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल (रोजगार) रिपोर्ट को वह अल्पकालिक ट्रिगर माना जा रहा है जो EUR/USD को उसके 1.1500-1.1570 के दायरे से बाहर निकाल सकता है । एक कमजोर आंकड़ा फेड के सुस्त रुख को मजबूत करेगा और संभवतः यूरो को 1.1570 के प्रतिरोध से ऊपर धकेल देगा। दूसरी ओर, एक मजबूत आंकड़ा डॉलर की बिकवाली को उलट सकता है और कीमतों को $1.15 से नीचे ला सकता है।
यूरो फिलहाल एक मजबूत बुनियादी पृष्ठभूमि और एक जिद्दी तकनीकी छत के बीच फंसा हुआ है। मध्य पूर्व की कूटनीतिक स्थिति, यूरोज़ोन की विकास दर और अमेरिकी रियल यील्ड की दिशा प्रमुख कारक बने रहेंगे। अभी के लिए, यह तय करने के लिए सबकी निगाहें शुक्रवार के रोजगार आंकड़ों पर हैं कि क्या EUR/USD आखिरकार ऊपर की ओर बढ़ पाएगा या $1.15 का स्तर एक अस्थायी शिखर साबित होगा।