इसे शॉर्ट स्क्वीज़ कहा जाता है। जब कीमत तेजी से बढ़ती है तो शॉर्ट ट्रेडर्स को अपनी पोज़िशन बंद करने के लिए एसेट वापस खरीदना पड़ता है। यह अतिरिक्त खरीदारी कीमत को और ऊपर धकेल सकती है, जिससे और शॉर्ट लिक्विडेशन ट्रिगर होते हैं।
क्रिप्टो डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में निवेशक अक्सर उधार लेकर बड़ी पोज़िशन लेते हैं। यदि मार्केट उनके खिलाफ जाता है, तो एक्सचेंज पोज़िशन को स्वतः बंद कर देता है जब मार्जिन तय सीमा से नीचे गिर जाता है।
इससे एक चक्र बन जाता है:
क्रिप्टो मार्केट, खासकर फ्यूचर्स और परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट्स में, यही डेरिवेटिव्स‑ड्रिवन डायनेमिक्स अक्सर अल्पकालिक कीमत तय करते हैं।
इस घटना ने बिटकॉइन के कुछ अहम स्तरों को भी उजागर किया जहाँ बड़ी मात्रा में पोज़िशन जमा थीं।
$76K–$77K: दबाव वाला सपोर्ट ज़ोन
जब कीमत इस स्तर से नीचे गई तो लॉन्ग पोज़िशन की भारी लिक्विडेशन शुरू हुई और गिरावट तेज़ हो गई।
$77K–$78K: शॉर्ट स्क्वीज़ ट्रिगर ज़ोन
कीमत के इस रेंज को पार करते ही बड़ी संख्या में शॉर्ट पोज़िशन बंद करनी पड़ीं, जिससे तेज़ उछाल आया।
लगभग $80K: प्रमुख रेज़िस्टेंस
विश्लेषकों के अनुसार $80,000 एक मनोवैज्ञानिक और तकनीकी रेज़िस्टेंस बना हुआ है, जहाँ अक्सर बिक्री के ऑर्डर और नई शॉर्ट पोज़िशन जमा हो जाती हैं।
यह पूरा एपिसोड आधुनिक क्रिप्टो मार्केट की कुछ बुनियादी सच्चाइयाँ सामने लाता है:
नतीजा यह होता है कि कीमत कभी‑कभी बहुत कम समय में दोनों दिशाओं में तेज़ी से घूम सकती है। और जब बड़े पैमाने पर लेवरेज्ड पोज़िशन जमा हों, तो ऐसी लिक्विडेशन कैस्केड क्रिप्टो डेरिवेटिव्स बाज़ार की एक सामान्य विशेषता बन जाती है।
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