2. बायबैक का मास्टरस्ट्रोक
हाइपरलिक्विड ने एक ऐसा टोकन बायबैक प्रोग्राम शुरू किया, जिसने इसकी 'टोकनॉमिक्स' (यानी टोकन की आर्थिक संरचना) को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। इस प्रोग्राम के तहत, प्लेटफॉर्म की फीस से होने वाली कमाई का 97% से 99% हिस्सा खुले बाजार से HYPE टोकन वापस खरीदने में इस्तेमाल किया जाने लगा । इस राजस्व का एक अहम स्रोत सर्कल (Circle) और कॉइनबेस (Coinbase) के साथ हुई स्टेबलकॉइन डील है, जो हर साल लगभग $80 मिलियन की आय हाइपरलिक्विड के इकोसिस्टम में लाती है और उसे सीधे HYPE धारकों के लिए मूल्य में बदल देती है
। यह मैकेनिज्म टोकन के लिए एक निरंतर मांग पैदा करता है।
3. 'हिप-3' का जादुई फ्रेमवर्क, जो कानूनी तूफान भी लाया
संभवतः सबसे बड़ा और विवादास्पद कारण रहा प्रोटोकॉल का HIP-3 फ्रेमवर्क। इसने प्राइवेट कंपनियों के लिए सिंथेटिक प्री-IPO परपेचुअल मार्केट (Synthetic Pre-IPO Perpetual Markets) लॉन्च किए। अब कोई भी ट्रेडर स्पेसएक्स (SpaceX), एंथ्रोपिक (Anthropic) और ओपनएआई (OpenAI) जैसी दिग्गज गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के संभावित मूल्यांकन पर दांव लगा सकता है । चूंकि HYPE टोकन का इस्तेमाल प्लेटफॉर्म पर स्टेकिंग और गवर्नेंस के लिए होता है, इस नई ट्रेडिंग की धूम ने सीधे टोकन की मांग में इजाफा किया
।
जहां HIP-3 के प्री-IPO मार्केट ने जबरदस्त उत्साह और ट्रेडिंग वॉल्यूम पैदा किया है, वहीं इसने हाइपरलिक्विड को एक गहराते नियामकीय विवाद के केंद्र में भी ला खड़ा किया है। सबसे बड़ा और बुनियादी मुद्दा यह है कि ये कॉन्ट्रैक्ट खुदरा निवेशकों को बिना किसी वास्तविक इक्विटी स्वामित्व के एक ऐसे बाजार ढांचे में निजी कंपनी के मूल्यांकन तक पहुंच प्रदान करते हैं, जो अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों (U.S. securities laws) से पूरी तरह बाहर है।
ये सिंथेटिक परपेचुअल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट हैं। पहले आए टोकनाइज़्ड स्टॉक प्रोडक्ट्स के उलट — जिनमें से कई स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) का इस्तेमाल कर असली शेयर होल्ड करते थे — हाइपरलिक्विड के कॉन्ट्रैक्ट में शून्य वास्तविक इक्विटी शामिल है । उदाहरण के लिए, "SPCX-USDC" स्पेसएक्स कॉन्ट्रैक्ट एक कैश-सेटल्ड डेरिवेटिव है जो कंपनी के एक अनुमानित शेयर मूल्य को ट्रैक करता है
। किसी भी शेयर का लेन-देन नहीं होता और न ही कंपनी से किसी अधिकार की जरूरत होती है। यही इसकी खासियत है, पर यही सबसे बड़ी कमजोरी भी।
अपनी डिजाइन से ही, ये प्रोडक्ट पारंपरिक प्री-IPO सेकेंडरी बाजारों को संचालित करने वाली पूरी नियामकीय व्यवस्था को दरकिनार कर देते हैं, जिनमें मान्यता प्राप्त निवेशक (accredited investor) का दर्जा, पूर्ण जानकारी का खुलासा (disclosure), और पंजीकृत प्रतिभूतियां अनिवार्य होती हैं।
ऑल्टुरा DeFi के सीओओ मैथ्यू पिनॉक ने डिक्रिप्ट (Decrypt) को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि "नियामक अंततः इसकी जांच करेंगे कि क्या प्री-IPO परपेचुअल प्रोडक्ट खुदरा निवेशकों के लिए अनरजिस्टर्ड सिक्योरिटीज एक्सपोजर (अपंजीकृत प्रतिभूति जोखिम) का काम तो नहीं कर रहे" । कई बाजार विश्लेषकों ने इस चिंता को दोहराते हुए कहा कि HIP-3 मॉडल बड़े टेक IPO से पहले मूल्य खोज का रास्ता खोलता है, लेकिन यह संभावित अनरजिस्टर्ड सिक्योरिटीज एक्सपोजर को लेकर नियामकीय जांच को आकर्षित कर सकता है
।
खुद ये कंपनियां पहले ही इस तरह के प्रोडक्ट्स के खिलाफ कड़ा रुख दिखा चुकी हैं। OpenAI और Anthropic ने पहले ही निवेशकों को अपने शेयरों से जुड़े टोकनाइज़्ड स्टॉक प्रोडक्ट्स के ट्रेडिंग के प्रति आगाह कर दिया था और साफ कहा कि SPV-आधारित शेयर ट्रांसफर मान्य नहीं हैं । नतीजा यह हुआ कि PreStocks जैसे प्लेटफॉर्म पर ये टोकनाइज़्ड प्रोडक्ट्स, कंपनियों के बयानों के बाद, लगभग 50% तक धड़ाम हो गए
। यह घटना एक स्पष्ट मिसाल है कि जिन बाजारों को अंतर्निहित जारीकर्ता (underlying issuer) का अधिकार प्राप्त नहीं है, वे कितने नाजुक हो सकते हैं।
क्योंकि हाइपरलिक्विड एक विकेंद्रीकृत एक्सचेंज (DEX) है जिसका कोई केंद्रीय द्वारपाल नहीं है, इन प्री-IPO परपेचुअल्स के लिए न तो कोई प्रॉस्पेक्टस (विवरण पत्रिका) है, न ही कोई खुलासा अनिवार्यता, और न ही कोई निवेशक सुरक्षा ढांचा । इस नियामकीय खाई ने पारंपरिक एक्सचेंजों का शुरुआती ध्यान पहले ही खींच लिया है। खबर है कि इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (ICE) और CME ग्रुप ने CFTC (अमेरिकी वायदा कारोबार आयोग) से आग्रह किया है कि वह हाइपरलिक्विड जैसे प्लेटफार्मों के अज्ञात कारोबारी माहौल से जुड़े संभावित बाजार अखंडता जोखिमों को संबोधित करे
।
जैसे-जैसे सिंथेटिक प्री-IPO बाजारों में अधिक पूंजी आ रही है, SEC या CFTC की ओर से एक समन्वित कार्रवाई की संभावना बढ़ती जा रही है। यह प्रोडक्ट जितने बाजार ढांचे के लिहाज से नवोन्मेषी हैं, उतने ही अनुपालन के नजरिए से जोखिम भरे भी। हाइपरलिक्विड का HYPE भले ही आसमान छू रहा हो, लेकिन नियामकीय जमीन पर उसके पैर जमाने की असली चुनौती अभी बाकी है।
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