महंगाई की चिंता और यह उम्मीद कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, ने भी बॉन्ड यील्ड को ऊपर रखा और डॉलर को मजबूती दी, जिससे सोने पर दबाव बना।
हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद सोने की कीमतें स्थिर हुईं और बाद में उनमें सुधार दिखा। इसके पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक प्रगति की खबरें थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान, जिनमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है, ने बाजार में कुछ सकारात्मकता पैदा की। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं थोड़ी कम हुईं और डॉलर में नरमी आई।
जब डॉलर कमजोर पड़ता है तो सोना आम तौर पर मजबूत होता है, क्योंकि तब यह अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। यही कारण रहा कि सात हफ्तों के निचले स्तर को छूने के बाद सोने में फिर से खरीदारी दिखी।
मध्य‑पूर्व में ईरान से जुड़ी अनिश्चितता—खासकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका—ने भी वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है।
तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतें अक्सर ऊपर जाती हैं। इससे महंगाई का खतरा बढ़ता है और केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं, जो सोने पर दबाव डाल सकते हैं।
लेकिन जब बातचीत या समझौते की उम्मीद बढ़ती है, तो महंगाई की चिंता घट सकती है, डॉलर कमजोर हो सकता है और सोने को सहारा मिल सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे से जुड़ी हर बड़ी खबर सोना, तेल, बॉन्ड और करेंसी बाजारों में तेज हलचल पैदा कर रही है।
चांदी की कीमतों में भी उसी अवधि में उतार‑चढ़ाव देखने को मिला। रिपोर्टों के मुताबिक चांदी करीब 75 डॉलर प्रति औंस से नीचे चली गई, क्योंकि भू‑राजनीतिक तनाव और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने कीमती धातुओं पर दबाव डाला।
चांदी की कीमतें अक्सर सोने से ज्यादा तेज़ी से बदलती हैं, क्योंकि इसका उपयोग सिर्फ निवेश या सुरक्षित संपत्ति के रूप में ही नहीं बल्कि उद्योगों—जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर—में भी होता है। इसलिए आर्थिक उम्मीदों में बदलाव का असर इस पर ज्यादा तेजी से दिख सकता है।
हाल की गिरावट के बावजूद कई बड़े वित्तीय संस्थान सोने के लंबी अवधि के रुझान को सकारात्मक मानते हैं।
हालांकि विभिन्न बैंकों के अनुमान अलग‑अलग हो सकते हैं, लेकिन कई विश्लेषक हाल की गिरावट को एक अस्थायी सुधार (correction) मानते हैं, न कि लंबी अवधि की गिरावट की शुरुआत।
सोने का सात हफ्तों के निचले स्तर तक गिरना मुख्य रूप से आर्थिक कारकों—जैसे बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और मजबूत डॉलर—का परिणाम था। बाद में डॉलर में नरमी और अमेरिका‑ईरान वार्ता से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने कीमतों को संभालने में मदद की।
जब तक ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की चाल और मध्य‑पूर्व की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक सोने और अन्य कीमती धातुओं में उतार‑चढ़ाव बने रहने की संभावना है—हालांकि कई विश्लेषक अभी भी दीर्घकाल में इसके लिए मजबूत रुझान देखते हैं।
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