इन्हीं आशंकाओं के कारण वैश्विक शेयर सूचकांक शुरुआती कारोबार में नीचे चले गए।
दिन के बाद के हिस्से में माहौल तब बदला जब रिपोर्ट आई कि अमेरिका बातचीत के दौरान ईरानी कच्चे तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से निलंबित कर सकता है।
अगर ऐसा होता है तो वैश्विक बाजार में अतिरिक्त तेल की आपूर्ति आ सकती है। इस संभावना ने तेल की कीमतों को तेजी से नीचे धकेल दिया। जैसे ही कच्चे तेल की कीमतें गिरीं, शेयर बाजारों में भी तेजी लौट आई और यूरोप तथा अमेरिका के इंडेक्स ने अपनी शुरुआती गिरावट का बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया।
तेल की कीमतें गिरने से निवेशकों को यह संकेत मिलता है कि महंगाई का दबाव उतना गंभीर नहीं रहेगा—और यही कारण है कि शेयर बाजार अक्सर ऊर्जा कीमतों में बदलाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।
हालांकि बाजार संभल गए, लेकिन निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई। सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से शेयरों पर दबाव बना रहा। आम तौर पर जब यील्ड बढ़ती है, तो:
इसका असर खासतौर पर टेक और ग्रोथ शेयरों पर ज्यादा पड़ता है, क्योंकि उनकी वैल्यूएशन भविष्य की कमाई की उम्मीदों पर आधारित होती है।
यूरोपीय शेयर बाजार शुरुआत में तेल की तेज बढ़ोतरी और भू‑राजनीतिक जोखिम से प्रभावित होकर गिर गए। लेकिन बाद में जब तेल की कीमतें नीचे आईं तो प्रमुख इंडेक्स ने गिरावट का बड़ा हिस्सा वापस पा लिया।
एशियाई बाजारों ने भी दिन की शुरुआत कमजोरी के साथ की। क्षेत्र के कई देश तेल के बड़े आयातक हैं, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में उछाल उनकी कंपनियों और मुद्राओं दोनों पर दबाव डाल सकता है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। इसलिए तेल महंगा होने पर यहां महंगाई, रुपये की मजबूती और कॉर्पोरेट मुनाफे पर असर पड़ता है। जब बाद में तेल की कीमतें नीचे आईं तो बाजार पर दबाव कुछ कम हुआ।
वॉल स्ट्रीट पर कारोबार मिला‑जुला रहा। ऊर्जा कंपनियों को ऊंचे तेल दामों से फायदा हुआ, जबकि टेक शेयरों पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मुनाफावसूली का दबाव रहा।
इस उतार‑चढ़ाव भरे दिन में निवेशक दो बड़ी कंपनियों की आने वाली कमाई रिपोर्टों का भी इंतजार कर रहे थे:
इन रिपोर्टों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि कंपनियां बढ़ती लागत और आर्थिक अनिश्चितता के माहौल में कैसी प्रदर्शन कर रही हैं।
सोमवार की तेज बाजार पलट ने एक बार फिर दिखाया कि वैश्विक वित्तीय बाजार कितने संवेदनशील हैं—खासकर तब जब बात तेल की कीमतों और भू‑राजनीतिक घटनाओं की हो। तेल की कीमतों में अचानक उछाल महंगाई और आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ा सकता है, जबकि अतिरिक्त आपूर्ति की उम्मीद बाजारों को तेजी से राहत दे सकती है।
फिलहाल निवेशक तीन मुख्य कारकों पर नजर रखे हुए हैं:
इनमें से किसी भी मोर्चे पर बड़ा बदलाव आने पर बाजारों में फिर इसी तरह की तेज हलचल देखने को मिल सकती है।
Comments
0 comments