इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य-पूर्व संघर्ष से पैदा हुआ ऊर्जा संकट माना जा रहा है। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और ईंधन की कीमतों में अस्थिरता बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहन उन उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक हो गए, जो पेट्रोल-डीजल की लगातार बदलती लागत से बचना चाहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2026 में दुनिया भर में लगभग 2.3 करोड़ EV बिक सकते हैं। इससे इलेक्ट्रिक वाहन वैश्विक नई कार बिक्री के 28–30% तक पहुंच सकते हैं।
इस तेजी का तत्काल कारण फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य का बंद होना बताया गया है। इन घटनाओं से कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव पड़ा और तेल तथा ईंधन की कीमतें बढ़ीं।
IEA का कहना है कि तेल आयात पर निर्भर देशों में EV अब केवल पर्यावरण नीति का हिस्सा नहीं हैं। इन्हें ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और उपभोक्ताओं व कारोबारों को ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के उपाय के रूप में भी देखा जा रहा है।
पहली तिमाही में चीन और अमेरिका में कमजोर प्रदर्शन के कारण वैश्विक EV बिक्री घटी थी। इसके बाद दूसरी तिमाही में तेज सुधार हुआ। हालांकि अप्रैल-जून की बिक्री पिछले साल की समान अवधि से लगभग 4% ही अधिक रही, फिर भी 2026 की पहली छमाही में 90 से अधिक देशों ने साल-दर-साल बिक्री वृद्धि दर्ज की।
“सड़क परिवहन दुनिया में तेल की कुल खपत का लगभग आधा हिस्सा करता है। इसलिए यह क्षेत्र ईंधन कीमतों में उछाल और आपूर्ति बाधाओं से खास तौर पर प्रभावित होता है।” — IEA, Engadget की रिपोर्ट के अनुसार
यूरोप ने प्रमुख EV बाजारों में 2026 की पहली छमाही के दौरान सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की। चीन और अमेरिका में कमजोरी के बावजूद यूरोप की बिक्री ने वैश्विक बाजार को सहारा दिया। पूरे साल के लिए यूरोप में बिकने वाली हर तीन नई कारों में से लगभग एक के इलेक्ट्रिक होने का अनुमान है।
चीन और अमेरिका में पहली तिमाही और दूसरी तिमाही की शुरुआत में मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही। फिर भी चीन में बिक्री का कुल स्तर काफी बड़ा रहा। BYD ने दूसरी तिमाही में 5,57,090 पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन वितरित किए, जबकि Tesla की डिलीवरी 4,80,126 रही। इस तरह BYD ने Tesla को पीछे छोड़ दिया।
अमेरिका में EV बिक्री पर संघीय टैक्स क्रेडिट खत्म किए जाने और आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों के लिए ईंधन-दक्षता नियमों में ढील का असर पड़ा।
ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, दक्षिण कोरिया और वियतनाम में मार्च से जून के बीच EV बिक्री 2025 की समान अवधि की तुलना में लगभग दोगुनी रही। भारत में अकेले मार्च में साल-दर-साल खरीद 87% बढ़ी।
दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों में भी तेजी देखी गई। यहां चीनी वाहन निर्माताओं का विस्तार, बैटरी की गिरती कीमतें और अधिक किफायती मॉडल EV अपनाने को बढ़ावा दे रहे हैं।
IEA की Global EV Outlook 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारें बढ़ती तेल कीमतों और ईंधन आपूर्ति के जोखिमों से निपटने की रणनीति में EV को तेजी से शामिल कर रही हैं। कई देशों ने ऊर्जा संकट के दौरान EV अपनाने के लिए प्रोत्साहनों को तेज किया, हालांकि इन नीतियों का स्वरूप देश-दर-देश अलग रहा।
इस बदलाव का व्यापक अर्थ यह है कि इलेक्ट्रिक वाहन अब केवल उत्सर्जन घटाने का साधन नहीं, बल्कि तेल कीमतों की अस्थिरता से बचाव और ऊर्जा सुरक्षा का माध्यम भी माने जा रहे हैं।
चीन में EV प्रोत्साहनों के लिए पात्रता नियम कड़े किए गए, जिसका बाजार पर असर पड़ा। दूसरी ओर, IEA ने कहा कि चीनी EV निर्माताओं की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी से प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
IEA का 2.3 करोड़ वाहनों का अनुमान दूसरी तिमाही की पूरी बिक्री सामने आने से पहले तैयार किया गया था। इसलिए Q2 की तेज वृद्धि के बाद वास्तविक आंकड़ा इस अनुमान की ऊपरी सीमा के करीब जा सकता है।