निवेशकों ने इसे संभावित भू‑राजनीतिक तनाव में कमी का संकेत माना—और बिटकॉइन फिर ऊपर की ओर बढ़ गया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए:
जब यह संकेत मिला कि जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है, तो बाज़ार ने संभावित ऊर्जा संकट की आशंका कम माननी शुरू कर दी। इससे बिटकॉइन सहित कई एसेट्स में राहत दिखी।
इस पूरे दौर में बिटकॉइन ने अक्सर पारंपरिक बाज़ारों की तरह प्रतिक्रिया दी—यानी यह सिर्फ “जियोपॉलिटिकल हेज” नहीं बल्कि मैक्रो जोखिम भावना (risk sentiment) के साथ चलता दिखाई दिया।
उदाहरण के लिए:
इससे स्पष्ट हुआ कि उस समय क्रिप्टो बाज़ार वैश्विक राजनीतिक सुर्खियों के प्रति बेहद संवेदनशील था।
23 मई को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार यह समझौता अभी एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के रूप में बातचीत के चरण में था—यानी अंतिम शांति संधि नहीं।
रिपोर्टों में जिन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख हुआ, उनमें शामिल थे:
हालाँकि उस समय तक प्रतिबंधों में राहत या यूरेनियम संवर्धन (enrichment) पर अंतिम शर्तें स्पष्ट नहीं थीं, जिससे संकेत मिलता है कि वार्ता अभी अधूरी थी।
ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट्स—जहाँ लोग भविष्य की घटनाओं पर दांव लगाते हैं—भी उस समय बाज़ार की उम्मीदों का संकेत दे रहे थे।
मई के अंत में Polymarket के आँकड़ों के अनुसार:
लेकिन परमाणु समझौते को लेकर भरोसा कम था:
इससे संकेत मिलता है कि बाज़ार को पहले संघर्ष कम होने या युद्धविराम की उम्मीद थी, जबकि परमाणु मुद्दों का समाधान लंबी प्रक्रिया माना जा रहा था।
बिटकॉइन का $74K से गिरकर फिर $77K के पास पहुँचना इस बात का उदाहरण है कि वैश्विक राजनीतिक घटनाएँ क्रिप्टो बाज़ार को कितनी तेजी से प्रभावित कर सकती हैं।
जब वार्ता टूटने की खबर आई, तो बिटकॉइन गिर गया। लेकिन जैसे ही संभावित शांति समझौते और ऊर्जा आपूर्ति मार्ग खुलने की संभावना सामने आई, निवेशकों ने फिर जोखिम लेने की प्रवृत्ति दिखाई—और बिटकॉइन वापस ऊपर चढ़ गया।
संक्षेप में, 2026 के अमेरिका‑ईरान संघर्ष के दौरान बिटकॉइन केवल एक डिजिटल एसेट नहीं बल्कि वैश्विक जोखिम भावना का संकेतक भी बन गया था।