आग 1 जून को लगी, जब Strategy (पूर्व में MicroStrategy) ने SEC के पास 8-K फाइलिंग में खुलासा किया कि उसने 26-31 मई के बीच 32 BTC को औसत $77,135 पर बेचा है, जिससे लगभग $2.5 मिलियन जुटाए गए । यह पैसा कंपनी के प्रेफर्ड स्टॉक डिविडेंड का भुगतान करने के लिए था ।
यह बिक्री अपने आप में बहुत छोटी थी — कंपनी के कुल 843,706 BTC भंडार का मात्र 0.0038% । विश्लेषकों ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह कोई रणनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि नियमित ट्रेजरी प्रबंधन का हिस्सा था । लेकिन बाजार ने आकार पर नहीं, बल्कि प्रतीक पर प्रतिक्रिया दी। कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष माइकल सेलर चार साल से सार्वजनिक रूप से कहते आ रहे थे कि Strategy "कभी बिटकॉइन नहीं बेचेगा"। इस सिद्धांत को तोड़ने से वह मूल कथा (narrative) चकनाचूर हो गई जो लंबे समय से क्रिप्टो बुलिश सेंटीमेंट को मजबूत रखती थी ।
इस खुलासे के कुछ ही मिनटों में बिटकॉइन $72,000 से नीचे गिर गया। BTC फ्यूचर्स में $90 मिलियन से अधिक का लिक्विडेशन शुरू हो गया । अगले दिन तक बिटकॉइन $67,700 के आसपास कारोबार कर रहा था ।
शुरुआती झटके ने एक क्रूर डीलेवरेजिंग इवेंट को जन्म दिया। 2-3 जून के बीच, कुल क्रिप्टो लिक्विडेशन $1.23 बिलियन से लेकर $1.86 बिलियन तक पहुंच गया । इसमें 90% से अधिक लॉन्ग पोजीशन शामिल थीं — यानी बाजार शॉर्ट सेलर्स को फायदा पहुंचाने की बजाय ओवर-लेवरेज्ड आशावादियों को सजा दे रहा था ।
CoinGlass के अनुसार, सिर्फ बिटकॉइन का लिक्विडेशन $626 मिलियन से $896 मिलियन के बीच रहा । 2 जून को अकेले एक 24 घंटे की विंडो में कुल $1.23 बिलियन का लिक्विडेशन हुआ, जिसमें $1.08 बिलियन लॉन्ग पोजीशन से था — यह साबित करता है कि बाजार ओवर-लेवरेज्ड ऑप्टिमिज्म को सजा दे रहा था, न कि शॉर्ट सेलर्स को इनाम । फोर्स्ड सेलिंग की इस चेन रिएक्शन ने कीमत को और नीचे धकेल दिया, और जून के पहले दो दिनों में ही बिटकॉइन लगभग $7,000 टूटकर $66,346 के इंट्राडे लो पर आ गया ।
जहां डेरिवेटिव बाजार बर्बाद हो रहा था, वहीं स्पॉट मार्केट भी विश्वास के संकट से जूझ रहा था। अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार 11 दिनों तक नेट आउटफ्लो का रिकॉर्ड बना, जिसने संस्थागत मांग को खत्म कर दिया । इसी बीच, लंबे समय से निष्क्रिय Mt. Gox एस्टेट से ताजा ऑन-चेन मूवमेंट ने बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति के डर को फिर से जगा दिया ।
सबसे संरचनात्मक और अक्सर अनदेखा किया जाने वाला कारक था — इतिहास के सबसे बड़े IPO में पूंजी का भारी रोटेशन। SpaceX ने Nasdaq लिस्टिंग SPCX के लिए S-1 फाइल किया था, जिसका लक्ष्य 12 जून को $1.75–$2 ट्रिलियन वैल्यूएशन पर $75 बिलियन जुटाना था ।
सबसे अहम बात: SpaceX ने रिकॉर्ड 30% IPO फ्लोट — लगभग $22.5 बिलियन के शेयर — रॉबिनहुड, श्वाब और फिडेलिटी जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित कर दिए । यह सामान्य मेगा-कैप IPO के मुकाबले तीन गुना अधिक है। 4 जून के आसपास IPO रोडशो शुरू होने वाला था, इसलिए सट्टेबाजी पूंजी क्रिप्टो से निकलकर नकदी में जाने लगी, ताकि SpaceX में हिस्सा ले सके । विश्लेषकों ने स्पष्ट रूप से बिटकॉइन से अमेरिकी इक्विटी, खासकर मेगा-कैप शेयरों में इस रोटेशन को सेलऑफ का एक प्रमुख कारण बताया ।
सबसे बड़ा संकेत कि यह एक 'रिस्क-ऑफ' इवेंट नहीं बल्कि सिर्फ क्रिप्टो में लक्षित गिरावट था, वह इक्विटी मार्केट से मिला। जब बिटकॉइन सपोर्ट लेवल तोड़ रहा था, S&P 500 ने 7,599 के पार नया ऑल-टाइम हाई बनाया । इस स्पष्ट अंतर ने पुष्टि की कि पूंजी सुरक्षित ठिकाने (safe haven) की ओर नहीं भाग रही थी — वह सिर्फ सट्टेबाजी वाले क्रिप्टो से हाई-कन्विक्शन इक्विटी स्टोरीज की ओर जा रही थी, जिसमें आने वाला SpaceX डेब्यू भी शामिल था।
फेडरल रिजर्व का सख्त रुख, ब्याज दर बढ़ने की संभावना, और ईरान पर अमेरिकी हमलों से लगातार भू-राजनीतिक तनाव ने क्रिप्टो से पारंपरिक लार्ज-कैप स्टॉक्स की ओर शिफ्ट को और प्रोत्साहित किया ।
जून 2026 का यह क्रैश एक लंबी गिरावट का हिस्सा था। अक्टूबर 2025 में बिटकॉइन का $126,000 का सर्वकालिक उच्च स्तर अब दूर की याद बन चुका था । जून की शुरुआत तक बिटकॉइन अपने पीक से लगभग 50% नीचे कारोबार कर रहा था । महीनों से जारी ETF आउटफ्लो, सख्त होती मैक्रो लिक्विडिटी, और चुनाव के बाद के उत्साह के फीके पड़ने से घटती सट्टेबाजी भूख ने कीमत को उस स्तर पर ला दिया जो अप्रैल की शुरुआत के बाद नहीं देखा गया था ।