गेट वोल्टेज बदलने पर इस ट्रैप का विभव-परिदृश्य बदलता है। इससे एक्साइटॉन कभी अलग-अलग, अच्छी तरह परिभाषित क्वांटम अवस्थाओं में कसकर सीमित हो जाते हैं और कभी अपेक्षाकृत स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। ट्रैप इतना मजबूत है कि इससे जुड़े अलग-अलग ऊर्जा स्तर उत्सर्जित प्रकाश में साफ दिखाई देते हैं ।
टीम मूल रूप से डिवाइस में किसी दूसरे प्रभाव का अध्ययन कर रही थी। इसी दौरान शोधकर्ताओं ने एक बहुत छोटे क्षेत्र से “असामान्य रूप से तेज और अलग-अलग स्तरों वाली रोशनी” निकलते देखी। यह संकेत अपेक्षित परिणाम से अलग था, इसलिए उन्होंने इसकी उत्पत्ति की जांच शुरू की ।
आगे के परीक्षणों से पता चला कि यह रोशनी किसी साधारण स्थानीय दोष या सामान्य आवेश-संग्रह का परिणाम नहीं थी, बल्कि इलेक्ट्रोस्टैटिक रूप से सीमित एक्साइटॉन अवस्थाओं से जुड़ी थी।
शोधकर्ताओं ने कम तापमान पर ऑप्टिकल स्पेक्ट्रोस्कोपी की। इसमें photoluminescence यानी प्रकाश-उत्सर्जन और reflectance यानी परावर्तन, दोनों माप शामिल थे। इन मापों में उन्होंने अलग-अलग क्वांटम-सीमित एक्साइटॉन अवस्थाओं को सीधे देखा और यह भी दर्ज किया कि विद्युत नियंत्रण के साथ ये अवस्थाएं कैसे बदलती हैं ।
अलग-अलग और वोल्टेज के साथ बदलने वाले ऊर्जा स्तर वास्तविक क्वांटम confinement की प्रमुख पहचान हैं। इसका अर्थ है कि एक्साइटॉन की गति निरंतर ऊर्जा-वितरण के बजाय विशिष्ट, असतत क्वांटम स्तरों में बंट गई थी।
अब टीम नैनोकरल की ज्यामिति पर अधिक सटीक नियंत्रण हासिल करना चाहती है। इसके बाद लक्ष्य एक स्पष्ट दो-स्तरीय क्वांटम व्यवस्था तक पहुंचना है । ऐसी व्यवस्था में किसी क्वांटम प्रणाली को दो विशिष्ट अवस्थाओं के बीच नियंत्रित किया जा सकता है।
यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह तकनीक सिंगल-फोटॉन स्रोतों, फोटॉन-सहसंबंध प्रयोगों और ऐसे उपकरणों के लिए उपयोगी हो सकती है जिनमें क्वांटम सूचना पदार्थ-आधारित अवस्था में रखी जाए और प्रकाश के जरिए स्थानांतरित की जाए।
अभी बड़े पैमाने पर उपयोग की राह में कई तकनीकी चरण बाकी हैं। यदि इस प्रक्रिया को बड़े और समान नैनोकरल ऐरे में दोहराया जा सका, तो विद्युत-समायोज्य एक्साइटॉन ट्रैप भविष्य में क्वांटम संचार प्रणालियों, फोटोनिक प्रोसेसरों और ठोस-अवस्था वाली क्वांटम अवस्थाओं को अलग-अलग फोटॉन से जोड़ने वाले स्केलेबल नेटवर्क में योगदान दे सकते हैं ।