दक्षिण कोरिया के नूरी रॉकेट की पाँचवीं उड़ान में 15 उपग्रह ले जाने की योजना है—नूरी के किसी एक मिशन में अब तक की सबसे बड़ी संख्या। लेकिन इस बार गिनती से अधिक अहम है तैनाती का तरीका। पाँच मुख्य उपग्रहों को एक साथ नहीं, बल्कि क्रम से अलग-अलग दिशा में छोड़ा जाएगा, ताकि वे आगे चलकर पृथ्वी-अवलोकन के एक उपग्रह नक्षत्र के रूप में काम कर सकें। प्रक्षेपण अभी होना बाकी है; सफल पृथक्करण और नक्षत्र का परिचालन, दोनों को फिलहाल लक्ष्य ही समझना चाहिए।
3
6
12
प्रक्षेपण कब और कहाँ होगा?
दक्षिण कोरिया की अंतरिक्ष एजेंसी KASA ने 7 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। नूरी को गोह्युंग स्थित नारो अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्च पैड 2 से दक्षिण कोरियाई समय के अनुसार दोपहर 12:23 से 1:23 बजे के बीच छोड़े जाने की योजना है। मौसम या अन्य कारणों से देरी होने पर 8 से 14 अक्टूबर की अवधि रखी गई है।
2
14
किन उपग्रहों को ले जाएगा नूरी?
पाँच मुख्य उपग्रह नियोनसैट संख्या 2 से 6 हैं। प्रत्येक का वजन 100 किलोग्राम से कम है। इन्हें कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAIST) के सैटेलाइट टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर ने विकसित किया है; सैटरेक इनिशिएटिव को भी विकास साझेदार बताया गया है। इनके इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे राष्ट्रीय सुरक्षा और जंगल की आग तथा बाढ़ जैसी आपदाओं की निगरानी के लिए तस्वीरें जुटाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। कई उपग्रहों के साथ काम करने से एक ही क्षेत्र को अकेले उपग्रह की तुलना में अधिक बार देखा जा सकेगा।
9
19
10
13
बाकी 10 क्यूबसैट—छोटे शोध और तकनीकी-परीक्षण उपग्रह—दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और कंपनियों से हैं। बताई गई परियोजनाओं में आयनमंडल और समुद्री धाराओं का अवलोकन तथा देश में विकसित उपकरणों की अंतरिक्ष में जाँच शामिल है। स्पेसऐंडबीन का SD001 अपने क्यूबसैट के साथ कंपन कम करने वाली उपग्रह-तैनाती ट्यूब की भी परीक्षा करेगा। उपलब्ध रिपोर्टों से सभी 10 क्यूबसैट के विकासकर्ताओं और उनके कामों की पूरी, भरोसेमंद सूची स्थापित नहीं होती।
19
22
21
पाँच उपग्रहों को छोड़ना कठिन क्यों है?
योजना के मुताबिक, उड़ान शुरू होने के लगभग 13 मिनट 30 सेकंड बाद नियोनसैट संख्या 2 अलग होगा। उसके बाद बाकी चार को 35–40 सेकंड के अंतराल पर, एक-एक करके अलग दिशाओं में छोड़ा जाएगा। ऐसा करते समय रॉकेट का रुख और उपग्रहों के निकलने की दिशा सटीक रखनी होगी, ताकि वे एक-दूसरे के रास्ते में न आएँ।
1
2
6
इस उड़ान में नया कम-झटका देने वाला पृथक्करण उपकरण लगाया गया है, जिसका उद्देश्य उपग्रहों को छोड़े जाते समय लगने वाला बल घटाना है। पेलोड हिस्से में इवॉल्व्ड सेकेंडरी पेलोड एडैप्टर (ESPA) का निचला रिंग भी है, जिस पर कई क्यूबसैट लगाकर उन्हें अलग किया जा सकता है।
6
8 हालांकि, उपग्रहों का रॉकेट से सुरक्षित अलग हो जाना ही परिचालन नक्षत्र बन जाने के बराबर नहीं है। उन्हें उपयुक्त कक्षाओं में पहुँचकर साथ काम भी शुरू करना होगा; रिपोर्टों के अनुसार नक्षत्र बनाने की प्रक्रिया में दो से तीन महीने लग सकते हैं।
9
पिछली उड़ानों से क्या बदलेगा?
21 अक्टूबर 2021 की पहली नूरी उड़ान तय ऊँचाई तक पहुँची थी, लेकिन अपने परीक्षण पेलोड को कक्षा में नहीं पहुँचा सकी। 21 जून 2022 की दूसरी उड़ान सफल रही। इसके बाद 25 मई 2023 और 27 नवंबर 2025 को तीसरी और चौथी उड़ानें हुईं।
28
33 चौथी उड़ान में एक मुख्य और 12 अन्य उपग्रह छोड़े गए थे। पाँचवीं उड़ान कुल संख्या 13 से बढ़ाकर 15 करेगी, पर बड़ा बदलाव यह होगा कि पाँच मुख्य उपग्रहों को भविष्य में एक नक्षत्र की तरह काम करने के लिए तैनात करने की कोशिश की जाएगी।
31
3
अंतरिक्ष उद्योग के लिए इसका क्या मतलब है?
हानव्हा एयरोस्पेस को 2022 में नूरी परियोजना का सिस्टम इंटीग्रेटर बनाया गया था। उसने कोरिया एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (KARI) के साथ तीसरी और चौथी उड़ानों में भी भूमिका निभाई। चौथी उड़ान को पहले ही निजी कंपनी की अगुवाई वाला प्रक्षेपण बताया गया था, जिसमें हानव्हा ने रॉकेट की प्रक्षेपण-पूर्व तैयारियों की जिम्मेदारी संभाली थी। इसलिए पाँचवीं उड़ान उस भूमिका को आगे बढ़ाएगी, उसकी शुरुआत नहीं करेगी।
29
31
35
यदि अक्टूबर का मिशन सफल होता है, तो दक्षिण कोरिया को अपने पृथ्वी-अवलोकन नक्षत्र के प्रक्षेपण का अनुभव मिलेगा और छोटे उपग्रह विकसित करने वालों को उड़ान का एक और अवसर। लेकिन इस एक मिशन से न तो हानव्हा को प्रक्षेपण का विशेषाधिकार मिलना सिद्ध होगा, न ही यह कि नियोनसैट नक्षत्र पूरी तरह काम करने लगा है।
3
19
29