| बजट में तेल कीमत का अनुमान | 2026 के लिए $59 प्रति बैरल; 2027–2029 के लिए $50 प्रति बैरल | ऊर्जा राजस्व को लेकर ज्यादा सतर्क सरकारी सोच दिखती है |
सरकारी कटौती अकेली नहीं है। रूस के सबसे बड़े बैंक Sberbank ने कमजोर पहली तिमाही के बाद 2026 के लिए अपना GDP वृद्धि अनुमान 1%–1.5% से घटाकर 0.5%–1% कर दिया । मार्च के अंत में Reuters poll ने 2026 की वृद्धि 0.8% बताई थी, जो एक महीने पहले के 1% अनुमान से कम थी; रूस के अर्थव्यवस्था मंत्री ने भी साल की पहली छमाही को कठिन बताया था
। क्रेमलिन से जुड़े बताए जाने वाले Center for Macroeconomic Analysis and Short-Term Forecasting, यानी CMAKP, ने भी 2026 की वृद्धि 0.5%–0.7% रहने का अनुमान लगाया, जबकि पहले यह 0.9%–1.3% था
।
रूस के अंदर सबसे साफ दबाव महंगे कर्ज का है। Sberbank से जुड़ी रिपोर्टों में 2026 की कमजोर शुरुआत के पीछे ऊंची ब्याज दरों, करों में बढ़ोतरी, मजबूत रूबल और रूसी तेल की कमजोर कीमतों को वजह बताया गया । Continuum Economics द्वारा उद्धृत प्रारंभिक आंकड़ों में भी कहा गया कि पहली तिमाही की गिरावट के पीछे ऊंची दरें, प्रतिबंध, मजबूत रूबल, सप्लाई की सीमाएं और लगातार कीमतों का दबाव था
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महंगा कर्ज घरों और कंपनियों दोनों के लिए खर्च और निवेश मुश्किल बनाता है। अगर उपभोक्ता उधार कम लेते हैं और कंपनियां विस्तार रोकती हैं, तो अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि रूस की 2023–2024 की युद्धकालीन तेजी पहले ही कमजोर पड़ रही थी। The Moscow Times ने लिखा कि उस दौर की तेज वृद्धि अब फीकी पड़ रही है, जबकि यूक्रेन युद्ध के कारण बजट पर सैन्य मांगें ऊंची बनी हुई हैं और पश्चिमी प्रतिबंध सख्त हो रहे हैं ।
पश्चिमी प्रतिबंध सिर्फ राजनीतिक दबाव नहीं हैं; वे रूस की वृद्धि गणना का हिस्सा बन चुके हैं। Reuters-सिंडिकेटेड रिपोर्ट में सरकारी हलकों के करीब माने जाने वाले TsMAKP थिंक टैंक के हवाले से कहा गया कि वैश्विक तेल कीमतें ऊंची होने पर भी रूस की वृद्धि को खास सहारा नहीं मिलेगा, क्योंकि यूक्रेनी ड्रोन हमले और नए पश्चिमी प्रतिबंध कच्चे तेल के उत्पादन और निर्यात पर दबाव डाल रहे हैं ।
यह बात महत्वपूर्ण है। आम तौर पर तेल महंगा होता है तो तेल निर्यातक देशों को राहत मिलती है। लेकिन रूस के मामले में सिर्फ प्रति बैरल कीमत ही मायने नहीं रखती। अगर उत्पादन घटे, रिफाइनरी या बंदरगाहों पर बाधा आए, या निर्यात प्रतिबंधों के कारण सीमित हो जाए, तो ऊंची कीमतें पूरी तरह GDP या बजट आय में नहीं बदल पातीं। NEST Centre ने भी चेताया है कि सैन्य खर्च बढ़ने और तेल-गैस राजस्व घटने से रूस का बजट दबाव में रह सकता है ।
तेल और गैस रूस की सरकारी आमदनी और बाहरी खातों के लिए लंबे समय से बड़ा सहारा रहे हैं। लेकिन इस बार वही सहारा ज्यादा अनिश्चित दिख रहा है। The Moscow Times ने CMAKP के हवाले से बताया कि बंदरगाहों और रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूस की कच्चा तेल और ईंधन निर्यात करने की क्षमता प्रभावित हो रही है और उत्पादन कटौती तक की नौबत आ सकती है ।
Reuters-सिंडिकेटेड रिपोर्ट में भी कहा गया कि 2026–2029 के लिए रूस के तेल और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात के अनुमान नीचे संशोधित किए गए हैं । यानी यह सिर्फ सामान्य तेल-कीमत चक्र नहीं है। असली सवाल यह है कि युद्ध और प्रतिबंधों के बीच रूस कितना तेल निकाल, प्रोसेस और बेच पाएगा।
सरकार ने बजट में तेल कीमतों को लेकर भी अधिक सावधान रुख अपनाया है। 2026 के लिए तेल कीमत का अनुमान $59 प्रति बैरल रखा गया है, जबकि 2027–2029 के लिए इसे घटाकर $50 प्रति बैरल किया गया है ।
कम तेल-कीमत अनुमान का मतलब यह नहीं कि GDP अपने-आप गिर जाएगी। लेकिन इसका मतलब यह है कि सरकार भविष्य के ऊर्जा राजस्व को लेकर बहुत ज्यादा भरोसे में नहीं है। जब सैन्य खर्च ऊंचा हो और तेल-गैस आय कमजोर पड़े, तो सरकार के पास अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए अतिरिक्त खर्च करने की गुंजाइश सीमित हो जाती है ।
अनुमान घटाने की सबसे तात्कालिक वजह 2026 की पहली तिमाही के आंकड़े रहे। रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, Q1 2026 में अर्थव्यवस्था 0.3% सिकुड़ी। यह Q1 2023 के बाद पहली गिरावट थी, जबकि सैन्य खर्च, बढ़ती मजदूरी और राजकोषीय प्रोत्साहन जैसे सहारे मौजूद थे ।
इससे कहानी बदल गई। पहले बात सिर्फ संभावित सुस्ती की थी; अब कमजोरी आंकड़ों में दिखने लगी। यही वजह है कि बैंक, सर्वेक्षणों में शामिल विश्लेषक और आधिकारिक अनुमान—तीनों 2026 के लिए कम वृद्धि की ओर आ गए ।
2026 के लिए 0.4% GDP वृद्धि का सरकारी अनुमान लगभग ठहराव जैसा है । 2027 के अनुमान को 2.8% से घटाकर 1.4% करना बताता है कि नीति-निर्माता अब तेज वापसी की उम्मीद नहीं कर रहे
। 2029 तक 2.4% वृद्धि का रास्ता अभी भी सरकारी अनुमान में है, लेकिन यह कई अनिश्चित चीजों पर निर्भर करेगा—तेल उत्पादन और निर्यात, प्रतिबंधों का दबाव, युद्ध से जुड़ी बजटीय मांगें और केंद्रीय बैंक की वह क्षमता कि वह महंगाई को फिर भड़काए बिना ब्याज दरों में राहत दे सके
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निचोड़ यह है कि रूस ने अनुमान इसलिए घटाया क्योंकि युद्धकालीन प्रोत्साहन से मिली आसान वृद्धि अब खत्म हो रही है, जबकि अर्थव्यवस्था पर महंगे कर्ज, प्रतिबंधों और तेल क्षेत्र की सीमाओं का दबाव बढ़ रहा है। आधिकारिक अनुमान अब भी 2029 तक क्रमिक सुधार की बात करता है, लेकिन 2026 की 0.4% वृद्धि यह दिखाती है कि रूस की आर्थिक गलती की गुंजाइश काफी कम हो गई है ।
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