हालाँकि केवल हंगरी ही बाधा नहीं है। ब्रसेल्स से आई रिपोर्टों के अनुसार लगभग एक दर्जन EU सरकारों ने वार्ता क्लस्टर खोलने से पहले कुछ चिंताएँ या सुरक्षा उपायों की मांग की है।
इनमें फ्रांस और पोलैंड प्रमुख हैं। दोनों देशों को डर है कि यूक्रेन के विशाल कृषि क्षेत्र के EU के सिंगल मार्केट में शामिल होने से यूरोपीय कृषि प्रतिस्पर्धा और सब्सिडी प्रणाली पर बड़ा असर पड़ सकता है। यूक्रेन दुनिया के बड़े अनाज उत्पादकों में से एक है और उसके पास विशाल कृषि भूमि है।
परिवहन क्षेत्र भी संवेदनशील है। कुछ EU देशों को चिंता है कि यूक्रेन की ट्रकिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियाँ यदि जल्दी EU बाज़ार में प्रवेश कर गईं तो मौजूदा कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण कई सरकारें सभी क्लस्टर एक साथ खोलने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की बात कर रही हैं।
यूक्रेन चाहता है कि वार्ता तेजी से आगे बढ़े। कीव के अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि पहला नेगोशिएशन क्लस्टर मई 2026 तक खोल दिया जाए और बाकी क्लस्टर भी जल्द शुरू किए जाएँ।
लेकिन यूरोपीय आयोग अपेक्षाकृत सावधानी बरत रहा है। EU के विस्तार आयुक्त मार्टा कोस (Marta Kos) ने सदस्य देशों से आग्रह किया है कि पहला क्लस्टर जून के अंत तक—जब EU परिषद की घूर्णन अध्यक्षता साइप्रस के पास है—खोल दिया जाए। बाकी क्लस्टर जुलाई में खोले जा सकते हैं, यदि सदस्य देश सहमत हो जाते हैं।
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार यदि देशों के बीच मतभेद समय पर दूर नहीं हुए तो यह समयसीमा और आगे खिसक सकती है।
राजनीतिक बाधाओं के बावजूद सदस्यता प्रक्रिया का तकनीकी हिस्सा आगे बढ़ता रहा है। यूरोपीय आयोग ने सभी छह नेगोशिएशन क्लस्टरों पर प्रारंभिक तैयारी जारी रखी है ताकि बातचीत पूरी तरह ठप न हो।
यूक्रेन ने अपने कानूनों को EU मानकों के अनुरूप बनाने के लिए आवश्यक विधायी समीक्षा का बड़ा हिस्सा भी पूरा कर लिया है, जिसे ब्रसेल्स सदस्यता प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम मानता है।
यूक्रेनी अधिकारियों ने देरी को स्वीकार किया है, लेकिन इस बात से इनकार किया है कि सदस्यता समयसीमा को लेकर EU और कीव के बीच गंभीर तनाव पैदा हो गया है। उनका कहना है कि तेज़ समयसीमा का प्रस्ताव युद्धकाल में सुधारों को तेज़ी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता को दर्शाता है, न कि EU नियमों को दरकिनार करने की कोशिश।
यूक्रेन का नेतृत्व अभी भी दशक के दूसरे हिस्से में सदस्यता की दिशा में बड़ा कदम उठाने की उम्मीद कर रहा है, हालांकि EU अधिकारी याद दिलाते हैं कि अंतिम निर्णय हमेशा सदस्य देशों की राजनीतिक सहमति पर निर्भर करेगा।
यूक्रेन की EU सदस्यता वार्ता इसलिए नहीं धीमी है कि देश सुधार नहीं कर रहा। असली कारण EU की अपनी राजनीतिक गतिशीलता है—सर्वसम्मति का नियम, राष्ट्रीय आर्थिक चिंताएँ और हंगरी जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय विवाद।
जब तक इन मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक वार्ता के औपचारिक क्लस्टर खोलने का फैसला यूक्रेन की तैयारी से ज्यादा EU सदस्य देशों की राजनीतिक सहमति पर निर्भर रहेगा।
Comments
0 comments