गाजा का स्वास्थ्य ढांचा लगभग पूरी तरह चरमरा गया है। अक्टूबर 2023 से इजरायली बमबारी ने 38 अस्पतालों और 96 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को या तो नष्ट कर दिया है या उन्हें बेकार कर दिया है । 2 अगस्त 2026 को गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इजरायल द्वारा एक दवा गोदाम को नष्ट करने के बाद चिकित्सा प्रणाली ढहने के कगार पर पहुंच गई है । WHO ने लगातार हमलों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की सुरक्षा की मांग की है । जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति रोक दी गई है, जबकि संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे हैं । गाजा के आधे से भी कम अस्पताल आंशिक रूप से काम कर रहे हैं ।
डॉ. हुसाम अबू सफिया, जो एक फिलिस्तीनी बाल रोग विशेषज्ञ और कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक हैं, को 27 दिसंबर 2024 से इजरायल ने हिरासत में ले रखा है। उन्हें अस्पताल में ड्यूटी के दौरान गिरफ्तार किया गया था । 8 अगस्त 2026 तक, गाजा के स्वास्थ्य प्रमुख ने डॉ. सफिया को "बचाने" के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की, क्योंकि देर होने पर स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने बताया कि डॉ. सफिया को हिरासत में पीटा गया है, जिससे उनकी आंख, सिर और छाती पर चोटें आई हैं ।
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने मार्च 2026 में कहा कि डॉ. अबू सफिया को हिरासत में "गंभीर यातना" सहनी पड़ी है । जुलाई 2026 में, एक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय ने उनकी हिरासत को "मनमाना" करार दिया और तत्काल रिहाई का आग्रह किया । एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि यातना और दुर्व्यवहार के कारण उनके जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है ।
डॉ. सफिया अकेले नहीं हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 400 स्वास्थ्यकर्मियों को हिरासत में लिया गया है; जुलाई 2026 तक, 83 अब भी इजरायली हिरासत में थे । अप्रैल 2026 में, इजरायली मानवाधिकार समूह फिजिशियन फॉर ह्यूमन राइट्स-इज़राइल (PHRI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की कि 14 गाजा डॉक्टरों को बिना किसी आरोप के एक साल से अधिक समय से हिरासत में रखे जाने के कारण उन्हें रिहा किया जाए ।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इस स्थिति की व्यापक रूप से निंदा की है:
युद्धविराम की घोषणा के लगभग 10 महीने बाद भी गाजा में स्थिति सामान्य नहीं हुई है। इजरायली सैन्य हमले जारी हैं, स्वास्थ्य क्षेत्र बुरी तरह तबाह है, डॉक्टरों पर यातना के आरोपों के बीच एक प्रमुख डॉक्टर हिरासत में हैं, और अंतरराष्ट्रीय निकाय व्यापक रूप से स्थिति की निंदा कर रहे हैं। आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति पर नाकेबंदी जारी है और मानवीय क्षति लगातार बढ़ रही है ।