रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में 15-24 वर्ष के युवाओं के बीच वैश्विक बेरोज़गारी दर 12.4% तक पहुंच गई, जो 2024 के 12.3% से अधिक है । इसका मतलब है कि दुनियाभर में लगभग 6.7 करोड़ युवा बेरोज़गार हैं । यह वृद्धि कोविड-19 के बाद की रिकवरी को पलट रही है, जब 2023 में युवा बेरोज़गारी दो दशकों के निचले स्तर पर थी ।
गौर करने वाली बात यह है कि युवाओं में बेरोज़गारी का खतरा बाकी कामगारों की तुलना में 2.5 गुना अधिक है। जहां 2025 में वैश्विक बेरोज़गारी दर 4.9% पर स्थिर रही, वहीं युवाओं में यह दर कहीं अधिक है ।
बेरोज़गारी दर से भी ज़्यादा चिंताजनक आंकड़ा NEET का है। ILO के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 26 करोड़ युवा ऐसे हैं जो न तो रोज़गार में हैं, न शिक्षा या प्रशिक्षण में (NEET) । यह दुनिया के हर पांच में से एक युवा के बराबर है ।
यह समस्या निम्न आय वाले देशों में सबसे गंभीर है, जहां NEET दर 27.9% तक पहुंच गई है – यानी हर तीन युवाओं में से एक काम, शिक्षा या प्रशिक्षण से दूर है । ILO ने दुनिया की सबसे गरीब अर्थव्यवस्थाओं में युवाओं के लिए नौकरी की संभावनाओं को "डरावना" (daunting) बताया है ।
युवा बेरोज़गारी का असर सभी क्षेत्रों पर एक जैसा नहीं है। उच्च आय वाले देशों में युवा बेरोज़गारी में सबसे तेज़ बढ़ोतरी देखी गई, जिसे ILO AI के कारण नौकरी के बाज़ार में आ रहे शुरुआती बदलावों से जोड़ता है । वहीं, उत्तरी अफ्रीका और अरब राज्यों में युवा बेरोज़गारी दर वैश्विक औसत से क्रमशः लगभग 2.2 और 1.7 गुना अधिक है ।
कोविड-19 के बाद की रिकवरी विभिन्न क्षेत्रों में बेहद असमान रही है ।
2026 की इस रिपोर्ट का एक केंद्रीय विषय युवा नौकरी चाहने वालों के लिए AI का बढ़ता खतरा है । ILO ने चेतावनी दी है कि AI युवा कामगारों के लिए नौकरी के बाज़ार को फिर से आकार दे रहा है। AI उन रूटीन प्रशासनिक और क्लर्किकल कामों को ऑटोमेट कर रहा है, जो पारंपरिक रूप से युवाओं के लिए नौकरी की सीढ़ी का पहला पायदान हुआ करते थे ।
डेटा एंट्री, कस्टमर सर्विस और बेसिक एडमिनिस्ट्रेशन जैसे एंट्री-लेवल पद सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वालों में से हैं । रिपोर्ट में कहा गया है कि AI युवाओं के लिए श्रम बाज़ार के दबाव को और बढ़ा सकता है, जिससे पहली महत्वपूर्ण नौकरी हासिल करना और मुश्किल हो जाएगा । जनवरी 2026 की ILO की एक अलग रिपोर्ट में भी AI और व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताओं को युवाओं की नौकरी की संभावनाओं के लिए खतरा बताया गया था ।
दूसरी ओर, AI विशेष तकनीकी कौशल वाली नौकरियों की मांग भी पैदा कर रहा है, लेकिन निम्न आय वाले देशों में कई युवाओं के पास इन भूमिकाओं के लिए आवश्यक प्रशिक्षण तक पहुंच नहीं है । इससे विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच खाई और चौड़ी होने का खतरा है।
ILO की यह रिपोर्ट एक ऐसी नौकरी के बाज़ार की तस्वीर पेश करती है, जो युवाओं के लिए प्रवेश करना और भी कठिन बना रहा है, भले ही वयस्कों के लिए बेरोज़गारी के आंकड़े स्थिर हों। बढ़ती NEET दरें, क्षेत्रीय असमानता और AI ऑटोमेशन के शुरुआती प्रभाव बताते हैं कि महामारी के बाद की रिकवरी युवाओं के लिए अल्पकालिक साबित हो सकती है।
नीति निर्माताओं के लिए, यह रिपोर्ट शिक्षा और प्रशिक्षण में लक्षित निवेश की आवश्यकता को रेखांकित करती है, खासकर निम्न आय वाले देशों में। इसके साथ ही, युवाओं को AI-संवर्धित भविष्य की नौकरियों में परिवर्तित होने में मदद करने के लिए सक्रिय रणनीतियों की भी आवश्यकता है ।