यह बदलाव अचानक शुरू नहीं हुआ है। सर्वे में शामिल 56% कंपनियों ने चार से पांच साल पहले अपने कामकाज में AI को शामिल करना शुरू कर दिया था। इसके विपरीत, केवल 9% कंपनियों ने पिछले एक साल में AI अपनाना शुरू किया। इससे संकेत मिलता है कि एसेट मैनेजमेंट उद्योग AI यात्रा के शुरुआती चरण में नहीं, बल्कि उसके बीच के दौर में है ।
स्टडी का सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष AI निवेश को लेकर मौजूद यह विरोधाभास है:
Clearwater Analytics ने इसे “इन्वेस्टमेंट पैराडॉक्स” यानी निवेश विरोधाभास कहा है। इसका अर्थ है कि उद्योग AI को परिवर्तनकारी तकनीक तो मानता है, लेकिन इस बात पर सहमति नहीं है कि इस पर कितना खर्च सही माना जाए। Clearwater के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी सौविक दास के अनुसार, कंपनियों के सामने चुनौती ऐसी तकनीक में निवेश का सही स्तर तय करने की है जिसका असर स्पष्ट दिखाई देता है, लेकिन निवेश पर मिलने वाला रिटर्न अभी भी अनिश्चित है ।
सर्वे में अधिकारियों से पूछा गया कि अगले 12 महीनों में AI किन कामकाजी क्षेत्रों में सबसे बड़ा बदलाव ला सकता है। जवाबों से संकेत मिलता है कि AI का इस्तेमाल मुख्य रूप से डेटा-आधारित काम और इंसानी निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जाएगा:
इन आंकड़ों से यह नहीं लगता कि उद्योग पोर्टफोलियो मैनेजरों को पूरी तरह AI से बदलना चाहता है। इसके बजाय, AI का इस्तेमाल उन विश्लेषणात्मक और डेटा-प्रधान कार्यों को तेज करने के लिए हो रहा है जो निवेश संबंधी फैसलों की नींव तैयार करते हैं।
AI पर अधिक पैसा खर्च करना अपने-आप बेहतर नतीजों की गारंटी नहीं देता। स्टडी का सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि किसी कंपनी के पास मौजूद डेटा की सटीकता और गुणवत्ता यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है कि AI निवेश वास्तव में कितना लाभ देगा।
Institutional Investor ने स्टडी का सार बताते हुए लिखा कि एसेट मैनेजर AI पर खर्च तो तेजी से बढ़ा रहे हैं, लेकिन बड़े बजट हमेशा बेहतर नतीजों में नहीं बदल रहे । जिन कंपनियों की डेटा गवर्नेंस मजबूत है, वे जोखिम प्रबंधन, रिपोर्टिंग और विश्लेषण में अधिक ठोस सुधार हासिल कर रही हैं। दूसरी ओर, कमजोर डेटा आधार वाली कंपनियां समान स्तर का लाभ पाए बिना खर्च कर सकती हैं।
“GenAI and the Data Divide” स्टडी ऐसे उद्योग की तस्वीर पेश करती है जो AI पर बड़े दांव लगा रहा है, जबकि इस तकनीक से मिलने वाले लाभ का आकलन करने के लिए अभी स्पष्ट मानक विकसित नहीं हुए हैं। ज्यादातर कंपनियां कई वर्षों से AI को अपनाने की प्रक्रिया में हैं, फिर भी दो-तिहाई वरिष्ठ अधिकारियों को लगता है कि उनकी संस्था शायद जरूरत से ज्यादा खर्च कर रही है।
इस शोध से निकलने वाला सबसे स्पष्ट संदेश यह है कि AI की सफलता केवल बजट के आकार पर निर्भर नहीं करती। सटीक, सुव्यवस्थित और अच्छी तरह नियंत्रित डेटा पर निवेश करने वाली कंपनियों के AI से जोखिम प्रबंधन और निर्णय लेने में वास्तविक सुधार हासिल करने की संभावना अधिक है।
इसलिए एसेट मैनेजरों के लिए अगला सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI पर कितना खर्च किया जाए। उससे पहले यह पूछना जरूरी है कि AI मॉडलों को मिलने वाला डेटा कितना साफ, भरोसेमंद और उपयोगी है।