2025 में वैश्विक ऊर्जा निवेश $3.3 ट्रिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसमें से लगभग $2.3 ट्रिलियन स्वच्छ ऊर्जा में गया । नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा ने मिलकर दुनिया की 42% बिजली पैदा की, और नवीकरणीय क्षमता में लगभग 800 गीगावॉट का इज़ाफा हुआ
। लेकिन इन लाभों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है: ग्रिड कंजेशन (बिजली आपूर्ति में रुकावट), परमिट में देरी, व्यापार प्रतिबंध और संघर्ष-आधारित व्यवधान निवेश को सिस्टम-स्तरीय प्रगति में बदलने से रोक रहे हैं
। ट्रांज़िशन रेडीनेस में गिरावट संकेत देती है कि स्थायी प्रगति के लिए बुनियादी शर्तें कमज़ोर हो रही हैं
।
स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क ने वैश्विक स्तर पर अपने शीर्ष तीन स्थान बरकरार रखे हैं, जो मजबूत बुनियादी ढांचे, विविध कम-कार्बन ऊर्जा प्रणालियों और दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता को दर्शाता है । शीर्ष 20 में से 14 स्थान उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के पास हैं
।
भारत दो स्थान चढ़कर 70वें स्थान पर पहुंच गया और वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत सुधार करने वाले देशों में शामिल रहा, खासकर ट्रांज़िशन रेडीनेस में । यह सुधार ऊर्जा पहुंच, दक्षता और स्वच्छ ऊर्जा तैनाती में वृद्धि के कारण हुआ, जबकि वैश्विक पृष्ठभूमि खराब हो रही थी
।
सऊदी अरब को मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र का स्टैंडआउट देश बताया गया। इसका कुल ETI स्कोर 1.5% बढ़कर 57.4 हो गया । यह सुधार मजबूत वित्तीय समर्थन, त्वरित नवीकरणीय ऊर्जा तैनाती और बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज में निवेश के कारण संभव हुआ
। सऊदी अरब, इज़राइल और यूएई के साथ मिलकर इस क्षेत्र में वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं
।
रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण जोखिमों को रेखांकित करती है:
WEF ने सक्षम माहौल को फिर से मजबूत करने के लिए तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया है, जिसमें शामिल हैं: ग्रिड बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, बैटरी स्टोरेज को बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना, और रिकॉर्ड निवेश को ठोस परिणामों में बदलने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता बनाए रखना ।
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