युद्धविराम अपने आप में एक विरोधाभास है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 अप्रैल, 2026 को 10-दिवसीय युद्धविराम की घोषणा की, जिसे वाशिंगटन में तीसरे दौर की वार्ता के बाद 15 मई को 45 दिनों के लिए और बढ़ाकर एक राजनीतिक समझौते की राह बनाने की कोशिश की गई । इसके तहत, 29 मई को पेंटागन दोनों पक्षों के सैन्य प्रतिनिधिमंडलों की मेज़बानी करने वाला था, ताकि 2 और 3 जून को होने वाली राजनीतिक वार्ताओं के लिए ज़मीन तैयार हो सके
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हकीकत में, यह युद्धविराम "छलनी" साबित हुआ है। इज़राइल रोज़ाना हमले करता रहा, यह तर्क देते हुए कि वे तत्काल खतरा पैदा करने वाले हिज़्बुल्लाह कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, हिज़्बुल्लाह—जो सरकारी स्तर की वार्ताओं में शामिल नहीं है—इज़राइली क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन दागता रहा । एक विश्लेषण के अनुसार, औपचारिक समझौते के बावजूद संघर्ष "लगातार जारी" रहा
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युद्धविराम के लिए सबसे बड़ा खतरा 25 मई को उभरा, जब इज़राइल के दो धुर-दक्षिणपंथी मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से एक ऐसे बड़े सैन्य विस्तार की माँग कर दी, जिससे युद्धविराम प्रभावी रूप से खत्म हो जाता ।
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने नेतन्याहू से आग्रह किया कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ समन्वय करें और "लेबनान में युद्ध पर लौटने" की घोषणा करें। उन्होंने लेबनान की बिजली काटने और दक्षिणी लेबनान के ज़हरानी क्षेत्र पर कब्ज़ा करने की भी माँग की ।
वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच इससे भी आगे बढ़ गए। उन्होंने सीधे तौर पर बेरूत पर हमलों की माँग करते हुए कहा: "हर विस्फोटक ड्रोन के बदले, बेरूत में दस इमारतें गिरनी चाहिए" ।
ये माँगें हिज़्बुल्लाह द्वारा इज़राइली सेना के खिलाफ फाइबर-ऑप्टिक ड्रोनों के इस्तेमाल की सीधी प्रतिक्रिया थीं, जो एक ऐसी रणनीति है जिसने सैन्य जवाबी उपायों को विफल कर दिया है । नेतन्याहू ने, हालांकि बेरूत पर हमलों का सार्वजनिक समर्थन नहीं किया, लेकिन सेना को हमले तेज़ करने और हिज़्बुल्लाह को कुचलने के लिए "अपनी मारक क्षमता बढ़ाने" का आदेश दे दिया
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विश्लेषक इस वृद्धि को नेतन्याहू के घरेलू राजनीतिक अस्तित्व से जुड़ा हुआ मानते हैं। उनके कट्टरपंथी गठबंधन सहयोगियों के पास सरकार की स्थिरता पर निर्णायक दबाव है, जिससे गठबंधन टूटने के जोखिम के बिना उनकी माँगों को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है । इसलिए, व्यापक युद्ध की यह माँग दोहरे उद्देश्य को पूरा करती है: यह हिज़्बुल्लाह के ड्रोन हमलों का जवाब भी है और घरेलू स्तर पर राजनीतिक समर्थन को मज़बूत करने का एक ज़रिया भी
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आगे की राह बेहद संकरी और नाज़ुक है।
कागज़ों पर, 45-दिवसीय युद्धविराम का विस्तार जून के अंत तक चलेगा। 29 मई को पेंटागन वार्ता और 2-3 जून को स्टेट डिपार्टमेंट की अगुआई में होने वाली वार्ताओं का उद्देश्य एक "स्थायी राजनीतिक समझौता" बनाना है । लेबनानी सरकार ने औपचारिक युद्धविराम और दक्षिणी लेबनान से इज़राइली वापसी पर ज़ोर दिया है, लेकिन वह हिज़्बुल्लाह का सीधे सामना करने में असमर्थ या अनिच्छुक बनी हुई है
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ट्रंप प्रशासन, जिसने इस युद्धविराम की मध्यस्थता की थी, किसी भी कूटनीतिक समाधान के केंद्र में है। हालाँकि, ईरान की सामरिक क्षमताओं को नष्ट करने के समानांतर युद्ध के कारण उसकी व्यस्तता बहुत बढ़ गई है—एक ऐसा अभियान जिसमें इज़राइल शासन परिवर्तन के लिए "पूरी ताकत" लगा रहा है ।
तत्काल जोखिम यह है कि इज़राइली वृद्धि और दक्षिणपंथी बयानबाजी, हिज़्बुल्लाह के लगातार हमलों के साथ मिलकर, राजनीतिक वार्ताओं के परिणाम देने से पहले ही युद्धविराम को असंभव बना सकती है। आने वाले हफ्ते बताएंगे कि यह संघर्षविराम किसी समझौते तक पहुँचने का पुल है या एक बड़े तूफान से पहले की शांति।
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