आयोजक समिति की रिपोर्टिंग के मुताबिक, प्रतियोगिता अब तीन दिन और छह प्रतिस्पर्धी इकाइयों से बढ़कर पांच दिन और नौ इकाइयों की हो गई है।
इस आयोजन में छह महाद्वीपों के 16 देशों की टीमें हिस्सा लेंगी। उपलब्ध रिपोर्टों में रोबोटिक्स क्षेत्र की प्रमुख ताकतों के रूप में अमेरिका, जर्मनी और जापान का उल्लेख है। चीन और ब्राज़ील भी इसमें शामिल हैं। ब्राज़ील ने प्रतियोगिता के लिए अपनी पांच RoboCup टीमों को मिलाकर एक राष्ट्रीय दल तैयार किया है।
हालांकि, उपलब्ध स्रोत सभी 16 देशों की आधिकारिक पूरी सूची नहीं देते। इसलिए ऊपर बताए गए देशों को पूरी प्रतिभागी सूची नहीं माना जाना चाहिए।
प्रतियोगिता में चीन की भागीदारी सबसे बड़ी रहने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की ओर से 641 टीमें और 1,975 रोबोट शामिल होंगे, जिनका प्रतिनिधित्व 157 कंपनियां तथा 200 शोध संस्थान और विश्वविद्यालय कर रहे हैं। व्यापक स्तर पर घरेलू भागीदारी में रोबोटिक्स कंपनियों के साथ उच्च शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों की टीमें भी शामिल हैं।
सबसे स्पष्ट बढ़ोतरी टीमों की संख्या में हुई है। दूसरे संस्करण में 666 पंजीकृत टीमें हैं, जबकि अगस्त 2025 में हुए पहले आयोजन में 280 टीमें थीं। यह 138% की वृद्धि है।
इस बार रोबोटों की संख्या 2,056 तक पहुंच गई है। आयोजक और कई रिपोर्टें इसे पहले आयोजन की तुलना में लगभग चार गुना भागीदारी बताती हैं, लेकिन एक अन्य उपलब्ध रिपोर्ट इस बढ़ोतरी को अलग तरीके से पेश करती है। इसलिए सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि रोबोटों की भागीदारी में भारी उछाल आया है, जबकि सटीक गुणक को लेकर स्रोत पूरी तरह एकमत नहीं हैं।
प्रतियोगिताओं का दायरा भी बढ़ा है। शुरुआती घोषणाओं में 30 से अधिक स्पर्धाओं की बात कही गई थी, जबकि अंतिम प्रकाशित कार्यक्रम में 51 स्पर्धाएं और 1,301 प्रतियोगिता सत्र दर्ज हैं।
2026 के कार्यक्रम में लंबी कूद, भारोत्तोलन, रस्साकशी और टेबल टेनिस जोड़े गए हैं। इन स्पर्धाओं का उद्देश्य सिर्फ यह देखना नहीं है कि रोबोट चल या दौड़ सकता है। इनके जरिए संतुलन, बल पर नियंत्रण, समन्वय, यांत्रिक डिजाइन और मुख्य घटकों की क्षमता को परखा जाएगा।
कार्यक्रम में फुटबॉल, फ्रीस्टाइल फाइटिंग, नृत्य और ट्रैक-एंड-फील्ड मुकाबले भी शामिल हैं। इस तरह ये गेम्स सार्वजनिक प्रतियोगिता के साथ-साथ एक दोहराए जा सकने वाले इंजीनियरिंग परीक्षण की तरह भी काम करते हैं। लंबी कूद में एक सेंटीमीटर या भारोत्तोलन में एक किलोग्राम का सुधार मोटर, रिड्यूसर, जोड़, नियंत्रण प्रणाली और सटीक निर्माण तकनीक में प्रगति का संकेत हो सकता है।
इस आयोजन का सबसे अहम बदलाव वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित स्पर्धाओं पर जोर है। रोबोटों को केवल मैदान में दौड़ाने या लड़ाने के बजाय कारखानों, होटलों, घरों, लॉजिस्टिक्स केंद्रों, आपातकालीन बचाव, पुस्तकालयों, खुदरा दुकानों, कार्यालय सेवाओं और वाहन चार्जिंग जैसे वातावरण का अनुकरण कराया जाएगा।
इन परीक्षणों में औद्योगिक असेंबली, घर की सफाई, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पुस्तकालय में किताबों की छंटाई जैसे काम शामिल हैं। ‘Dexterous Hand Challenge’ में औजार जोड़ना, पाउडर तौलना, ब्लॉक जमाना, कील ठोकना, बोतल खोलना, सामान की पैकिंग खोलना, चिमटी से वस्तु उठाना और केबल जोड़ना जैसी बारीक गतिविधियों की जांच की जाएगी।
इन कार्यों का केंद्र वह कठिन अंतिम चरण है, जिसमें रोबोट किसी वस्तु को पहचानने के बाद उसे अनिश्चित और इंसानों के लिए बनाए गए माहौल में भरोसेमंद ढंग से पकड़ता और इस्तेमाल करता है। आयोजक इसी सूक्ष्म, ‘लास्ट-मीटर’ क्षमता और बढ़ती स्वायत्तता को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
आयोजक इस प्रतियोगिता को embodied intelligence, यानी शरीर और वातावरण के साथ तालमेल बनाकर काम करने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तथा व्यावहारिक उपयोग का परीक्षण मंच बताते हैं। उनका कहना है कि कठिन नियम, अधिक स्वायत्त स्पर्धाएं और बेहतर सूक्ष्म-हेरफेर क्षमता प्रयोगशालाओं और प्रतियोगिताओं में हुई प्रगति को औद्योगिक प्रणालियों और वास्तविक कार्यस्थल के ऑर्डरों में बदलने में मदद कर सकती है।
हालांकि, यह दावा व्यापक व्यावसायीकरण का प्रमाण नहीं है। 2026 के गेम्स यह दिखा सकते हैं कि रोबोट तय परिस्थितियों में कितना अच्छा प्रदर्शन करते हैं, लेकिन किसी प्रतियोगिता को पूरा कर लेना अपने-आप में इस बात का सबूत नहीं है कि रोबोट सामान्य औद्योगिक या सेवा क्षेत्रों में भरोसेमंद और कम लागत वाला काम करने के लिए तैयार हैं।
इस आयोजन का सबसे बड़ा संकेत किसी एक दौड़ या मुकाबले में नहीं, बल्कि बड़ी भागीदारी, कठिन शारीरिक परीक्षणों और वास्तविक जीवन जैसे कार्यों के मेल में है। इससे पता चलता है कि ह्यूमनॉइड रोबोट प्रतियोगिताएं अब सिर्फ मशीनों की चाल-ढाल नहीं, बल्कि उनकी बढ़ती स्वायत्तता और उपयोगी काम करने की क्षमता को भी मापने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।