रोमानिया के राष्ट्रपति निकुशोर दान ने स्वयं इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "ड्रोन के टुकड़ों की जांच के नतीजे इसकी रूसी उत्पत्ति की पुष्टि करते हैं" । एक निर्णायक कदम उठाते हुए, उन्होंने सार्वजनिक रूप से मलबे की तस्वीरें भी जारी कीं, जिनमें टुकड़ों पर सिरिलिक लिपि में "गेरान-2" लिखा हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा था। इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों, नेविगेशन सिस्टम और इंजन के विश्लेषण ने भी इस बात की तस्दीक की
।
रोमानिया की प्रतिक्रिया तत्काल और बहुआयामी थी। राष्ट्रपति दान ने उसी दिन कोट्रोचेनी पैलेस में सर्वोच्च राष्ट्रीय रक्षा परिषद (CSAT) की एक आपात बैठक बुलाई । बैठक के बाद उन्होंने ऐलान किया कि रोमानिया "अपने नागरिकों के जीवन को खतरे में डालने वाली किसी भी घटना को न तो अनदेखा करेगा और न ही कम करके आंकेगा"
।
उठाए गए तत्काल कदमों में शामिल थे:
रोमानिया के अनुरोध पर, 1 जून, 2026 को न्यूयॉर्क समयानुसार दोपहर 3:00 बजे (रोमानियाई समयानुसार रात 10:00 बजे) सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई । रोमानिया की विदेश मंत्री ओआना सोइयू ने सबूत पेश करने के लिए खुद न्यूयॉर्क जाकर बैठक में भाग लिया
।
घटना के बाद दुनिया भर से कड़ी निंदा हुई, जिसने इसे एक अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बना दिया।
यह कोई अकेली घटना नहीं थी। गलाती का हमला रूसी ड्रोन द्वारा नाटो हवाई क्षेत्र के उल्लंघन के एक बढ़ते और खतरनाक पैटर्न का हिस्सा था। रोमानिया और नाटो अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 2023-2025 के दौरान डेन्यूब नदी के सीमावर्ती इलाके में रूसी ड्रोन के टुकड़े बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि, गलाती की घटना पहली बार थी जब किसी रूसी ड्रोन ने नाटो सदस्य देश के अंदर सीधे एक रिहायशी इमारत पर हमला किया, जिससे नागरिक हताहत हुए और आग लगी ।
नाटो के पूर्व उप महासचिव मिर्चा जियोआना ने इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार करते हुए कहा कि इस घटना ने नाटो के पूर्वी हिस्से में पर्याप्त ड्रोन-रोधी सैन्य क्षमताओं और सैन्य खरीद प्रक्रियाओं की कमी के कारण मौजूद गंभीर कमजोरी को उजागर कर दिया है । यह एक ऐसा स्पष्ट संदेश था कि मौजूदा सुरक्षा ढांचे को नए युग के खतरों से निपटने के लिए तत्काल उन्नत करने की आवश्यकता है।
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