रिपोर्टों के अनुसार हर जहाज़ की कीमत 10 अरब स्वीडिश क्रोनर से थोड़ी अधिक हो सकती है, जो अंतिम हथियार प्रणाली के आधार पर बदल सकती है। कुल कार्यक्रम लागत लगभग €3.5 अरब से अधिक (करीब $4 अरब) तक पहुँचती है।
स्वीडन ने इस कार्यक्रम के लिए कई यूरोपीय प्रस्तावों की समीक्षा की। अंतिम चरण में तीन प्रमुख विकल्प थे:
अलग‑अलग आकार और युद्ध प्रणाली वाले इन प्रस्तावों में से स्वीडिश सरकार ने अंततः फ्रांसीसी डिज़ाइन को चुना।
विश्लेषकों के अनुसार इसके पीछे कई कारण रहे:
स्वीडन ने नए डिज़ाइन विकसित करने की बजाय पहले से मौजूद प्लेटफ़ॉर्म चुनकर कार्यक्रम को तेज़ बनाने की कोशिश की।
मौजूदा योजना के अनुसार:
पहले के योजनाओं में लक्ष्य था कि दो जहाज़ 2030 तक और बाकी दो 2035 तक सेवा में आ जाएँ, हालांकि अंतिम अनुबंध और कॉन्फ़िगरेशन के अनुसार टाइमलाइन बदल सकती है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वीडन की समुद्री वायु‑रक्षा क्षमता को मजबूत करना है।
FDI प्लेटफ़ॉर्म आम तौर पर उन्नत वायु‑रक्षा प्रणाली से जुड़ा होता है, जिसमें Aster‑परिवार की सतह‑से‑वायु मिसाइलें जैसे Aster 30 शामिल होती हैं। ये मिसाइलें विमानों और कुछ प्रकार की मिसाइलों के खिलाफ क्षेत्रीय रक्षा प्रदान कर सकती हैं।
हालाँकि स्वीडन के लिए अंतिम हथियार विन्यास अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन मजबूत वायु‑रक्षा इस कार्यक्रम का प्रमुख लक्ष्य है।
कई दशकों तक स्वीडन की नौसेना का ध्यान छोटे और स्टील्थ तटीय युद्धपोतों पर रहा, जैसे Visby‑class कॉर्वेट।
लेकिन Luleå‑class फ्रिगेट एक नई दिशा दर्शाते हैं—ऐसे बड़े जहाज़ जो बाल्टिक सागर में लंबे समय तक ऑपरेशन, समुद्री नियंत्रण और सहयोगी अभियानों के लिए सक्षम होंगे।
स्वीडिश नौसेना के अनुसार रणनीति अब केवल दुश्मन को क्षेत्र से दूर रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि बाल्टिक क्षेत्र में सक्रिय नियंत्रण स्थापित करने की ओर बढ़ रही है।
स्वीडन के NATO में शामिल होने के बाद बाल्टिक सागर का सामरिक महत्व और बढ़ गया है। नए फ्रिगेट कई क्षेत्रों में गठबंधन को मदद कर सकते हैं:
आधुनिक वायु‑रक्षा फ्रिगेट जोड़कर स्वीडन NATO के उत्तरी मोर्चे को मजबूत करेगा और बाल्टिक क्षेत्र में सहयोगी नौसेनाओं के साथ बेहतर समन्वित संचालन कर सकेगा।
Luleå‑class कार्यक्रम स्वीडन की नौसेना के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह लगभग पचास वर्षों में देश के सबसे बड़े सतही युद्धपोतों को पेश करेगा और स्वीडन की व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है।
अभी कुछ तकनीकी विवरण—जैसे अंतिम हथियार प्रणाली—स्पष्ट होने बाकी हैं, लेकिन दिशा साफ है: स्वीडन ऐसी नौसेना बनाना चाहता है जो उच्च स्तर के समुद्री युद्ध और NATO के साथ संयुक्त अभियानों में प्रभावी भूमिका निभा सके।
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