अमेरिका और ईरान ने 17 जून 2026 को 14 सूत्रीय 'इस्लामाबाद ज्ञापन' पर हस्ताक्षर किए, जिससे फरवरी 2026 से चल रहे सक्रिय संघर्ष का अंत हुआ [1][7][11]। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की मध्यस्थता में हुआ यह समझौता लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी युद्ध विराम का प्रावधान करता है [5][14]। अमेरिका 30 दिनों...

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अमेरिका और ईरान ने 17 जून, 2026 को एक 14-सूत्रीय 'समझौता ज्ञापन' (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए, जिससे फरवरी 2026 में शुरू हुए महीनों के सक्रिय संघर्ष का अंत हो गया । यह समझौता, जिसे इस्लामाबाद ज्ञापन (Islamabad MoU) कहा जाता है, पाकिस्तान की मध्यस्थता में संपन्न हुआ और इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल युद्ध विराम और स्थायी शांति समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है
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यह समझौता दोनों पक्षों को लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तत्काल और स्थायी रूप से बंद करने के लिए प्रतिबद्ध करता है । पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच महीनों तक चली अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थता की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्साय पैलेस (पैलिस ऑफ वर्साय) में आयोजित रात्रिभोज पर व्यक्तिगत रूप से इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए, जो G7 शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद हुआ। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने तेहरान में रिमोटली (डिजिटल हस्ताक्षर) से इस पर हस्ताक्षर किए
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यह समझौता अप्रैल में घोषित युद्ध विराम को 60 दिनों के लिए और बढ़ाता है, ताकि दोनों पक्ष अंतिम शांति संधि पर बातचीत कर सकें । ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि यह कोई अंतिम शांति संधि नहीं है, बल्कि पूर्ण वार्ता से पहले का एक प्रारंभिक कदम है
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ज्ञापन का पाठ अमेरिकी पक्ष द्वारा बुधवार शाम को औपचारिक रूप से जारी किया गया और यह तुरंत प्रभाव में आ गया ।
डेमोक्रेटिक सांसदों ने व्हाइट हाउस से तुरंत इस समझौते की शर्तों पर विस्तृत जानकारी (ब्रीफिंग) देने की मांग की । कांग्रेस में द्विदलीय सहमति (Bipartisan consensus) बनी कि किसी भी अंतिम परमाणु समझौते को कांग्रेस की मंज़ूरी मिलनी चाहिए, जो एक कार्यकारी आदेश-आधारित समझौते के विरोध का संकेत है
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G7 नेताओं ने इस प्रारंभिक समझौते का स्वागत किया, लेकिन विशेष रूप से लेबनान में तत्काल युद्ध विराम का आह्वान किया। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में विविधता लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य की विश्वसनीयता को लेकर चिंताओं को दर्शाता है ।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान के नेता "सही व्यवहार नहीं करते" या अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो अमेरिका ईरान पर फिर से बमबारी शुरू कर सकता है ।
तेहरान ने इसे जीत बताया और तर्क दिया कि यह ज्ञापन प्रतिबंध हटाने और नाकाबंदी समाप्त करने सहित अमेरिकी रियायतों को दर्शाता है । ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने इस समझौते को "एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ और एक शक्तिशाली ईरान का संदेश" करार दिया
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इज़राइल इस समझौते का प्रत्यक्ष हस्ताक्षरकर्ता नहीं था, लेकिन उसके साथ घनिष्ठ परामर्श किया गया; यह युद्ध विराम लेबनान और ईरान-समर्थित बलों से जुड़े सभी मोर्चों पर लागू होता है । ज्ञापन में इज़राइल का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है, जिसने मार्च की शुरुआत से लेबनान में बार-बार हमले किए थे
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ज्ञापन के पहले भाग में कहा गया है कि दोनों देश "लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों की तत्काल और स्थायी समाप्ति" के लिए सहमत हुए हैं। दोनों राष्ट्र "लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता" की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं । समझौते में लेबनान में ईरान-समर्थित बलों की भूमिका का विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन यह उन महीनों के संघर्ष के बाद तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें इज़राइली हमले और ईरान-समर्थित अभियान शामिल थे।
60 दिनों की बातचीत की यह खिड़की एक व्यापक शांति समझौते के उद्देश्य से वार्ता का द्वार खोलती है। प्रमुख मुद्दों में प्रतिबंधों की अंतिम स्थिति, पुनर्निर्माण योजना का दायरा और ईरान की परमाणु प्रतिबद्धताओं के सत्यापन तंत्र शामिल हैं। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह दबाव बनाने के लिए फिर से सैन्य कार्रवाई की धमकी को बनाए रखेगा, जबकि ईरान इस समझौते को अपनी सामरिक स्थिति की वैधता के रूप में पेश कर रहा है।
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अमेरिका और ईरान ने 17 जून 2026 को 14 सूत्रीय 'इस्लामाबाद ज्ञापन' पर हस्ताक्षर किए, जिससे फरवरी 2026 से चल रहे सक्रिय संघर्ष का अंत हुआ [1][7][11]।
अमेरिका और ईरान ने 17 जून 2026 को 14 सूत्रीय 'इस्लामाबाद ज्ञापन' पर हस्ताक्षर किए, जिससे फरवरी 2026 से चल रहे सक्रिय संघर्ष का अंत हुआ [1][7][11]। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की मध्यस्थता में हुआ यह समझौता लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी युद्ध विराम का प्रावधान करता है [5][14]।
अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, प्रतिबंधों में ढील देने और ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण योजना विकसित करने पर सहमत हुआ है [1][5][9][12]।