रविवार 31 मई 2026 की रात, एक बेनाम सूत्र के हवाले से दावा किया गया कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने IRGC के सरकार पर 'कब्ज़े' का विरोध करते हुए अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है [1][4]। लंदन स्थित विपक्षी आउटलेट 'ईरान इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के अनुसार, पत्र में लिखा था कि कट्टरपंथी गुटों ने राष्ट्रपति और अन्य अधिकारिय...

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रविवार, 31 मई 2026 की देर रात, तेहरान की राजनीति में एक बड़ा भूकंप आता हुआ प्रतीत हुआ जब एक खबर ने दावा किया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के राज्य पर बढ़ते नियंत्रण का सीधा विरोध करते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया है। खबर फैलते ही ईरानी अधिकारियों ने कुछ ही घंटों के भीतर इसे सिरे से नकार दिया। पेश है इस पूरे मामले की पूरी कहानी — दावे, खंडन, और राजनीतिक पृष्ठभूमि।
यह पूरी कहानी शुरू हुई लंदन बेस्ड फारसी-भाषा के विपक्षी आउटलेट ईरान इंटरनेशनल से। इसने "मामले से परिचित" सिर्फ एक बेनाम सूत्र के हवाले से खबर दी कि पेज़ेश्कियन ने सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई के कार्यालय में अपना आधिकारिक इस्तीफा भेज दिया है ।
रिपोर्ट के अनुसार, उस कथित पत्र में बहुत ही गंभीर और विस्फोटक आरोप लगाए गए थे:
इस दावे ने तुरंत इस ओर इशारा किया कि ईरान के निर्वाचित असैनिक नेतृत्व और देश की सबसे ताकतवर सैन्य-सुरक्षा संस्था के बीच एक गहरी और सार्वजनिक दरार आ गई है।
ईरानी सरकार की प्रतिक्रिया बिजली की रफ्तार से और बिल्कुल स्पष्ट थी। कुछ ही घंटों के भीतर, कई अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने इस रिपोर्ट को एक विदेशी-प्रायोजित मनगढ़ंत कहानी बताकर रद्द कर दिया।
राष्ट्रपति कार्यालय के संचार विभाग के प्रमुख इलियास हज़रती का बयान IRGC से संबद्ध तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने प्रकाशित किया। उन्होंने इस्तीफे की अफवाह को "वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं" बताया और जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति "अपनी पूरी ताकत से देश के मामलों को आगे बढ़ाने और लोगों की सेवा करने में व्यस्त हैं" । एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने अनादोलु एजेंसी से बात करते हुए इसे महज "मीडिया गेम" करार दिया
।
अन्य सरकारी हस्तियों ने एक कदम आगे बढ़कर इस खबर को विदेशी खुफिया एजेंसियों के ऑपरेशन से जोड़ दिया। इसे "मोसाद और ईरान इंटरनेशनल" का प्रोपेगेंडा बताया गया, जिसका मकसद अमेरिका-ईरान के बीच चल रही नाज़ुक युद्धविराम वार्ताओं के दौरान देश को अस्थिर करना है । गौर करने वाली बात यह है कि बाद में खुद ईरान इंटरनेशनल ने भी रिपोर्ट किया कि तस्नीम सहित ईरानी अधिकारियों ने साफ तौर पर इस बात से इनकार किया है कि राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया है
।
हालांकि खुद इस्तीफे की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसमें बताया गया राजनीतिक तनाव सालों से दर्ज है और कोई नई बात नहीं है।
सुधारवादी छवि वाले पेज़ेश्कियन, पदभार संभालने के बाद से ही ईरान के कट्टरपंथी प्रतिष्ठान के साथ लगातार संघर्ष कर रहे हैं। मार्च 2025 में, कट्टरपंथियों ने सफलतापूर्वक उनके दो अहम सहयोगियों को बाहर कर दिया था, एक घटना जिसके बारे में ईरान इंटरनेशनल ने खबर दी थी कि राष्ट्रपति "थोड़े कमज़ोर" महसूस कर रहे हैं, लेकिन फिर भी आगे बढ़ने के लिए दृढ़ हैं ।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को तय करने में IRGC की व्यापक भूमिका हमेशा से विवाद का एक बड़ा मुद्दा रही है। तीन महीने तक चलने वाले सैन्य संघर्ष के बाद अब अमेरिका के साथ युद्ध के बाद की वार्ताओं के मौजूदा हालात ने स्थिति और नाज़ुक बना दी है, क्योंकि इसमें सैन्य कमांडरों का ही देश के सबसे अहम विदेश नीति के फैसलों पर निर्णायक नियंत्रण है ।
रविवार देर रात तक, सबसे अहम जानकारी अब भी गायब है: सुप्रीम लीडर के कार्यालय या स्वयं राष्ट्रपति के कार्यालय से इस मामले में कोई भी आधिकारिक पुष्टि या खंडन जारी नहीं किया गया ।
ईरान के संविधान के तहत, राष्ट्रपति सुप्रीम लीडर की मर्जी से ही अपने पद पर बना रहता है। अगर सच में इस्तीफा दिया गया है, तो इसका स्वीकार किया जाना एक अलग बड़ा राजनीतिक सवाल है। एक स्वीकृति सार्वजनिक रूप से सत्ता के सर्वोच्च स्तर पर मौजूद गहरी दरार को मान्य कर एक गंभीर राजनीतिक संकट खड़ी कर देगी।
हिंदुस्तान टाइम्स, Ynet, और गल्फ न्यूज जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आउटलेट्स इस पूरी कहानी को बेहद सावधानी के साथ पेश कर रहे हैं। वे इस बात को रेखांकित करते हैं कि यह रिपोर्ट सिर्फ एक बेनाम स्रोत पर आधारित है और सरकार इसे सिरे से खारिज कर चुकी है । फिलहाल, हालात को कुछ ऐसे समझा जा सकता है: एक गहरे राजनीतिक विभाजन की विश्वसनीय लेकिन अपुष्ट खबर का सामना आधिकारिक खंडन की एक दीवार से हुआ है, और अंतिम नतीजा सुप्रीम लीडर के उस संकेत पर निर्भर है जो अभी तक नहीं आया है।
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रविवार 31 मई 2026 की रात, एक बेनाम सूत्र के हवाले से दावा किया गया कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने IRGC के सरकार पर 'कब्ज़े' का विरोध करते हुए अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है [1][4]।
रविवार 31 मई 2026 की रात, एक बेनाम सूत्र के हवाले से दावा किया गया कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने IRGC के सरकार पर 'कब्ज़े' का विरोध करते हुए अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है [1][4]। लंदन स्थित विपक्षी आउटलेट 'ईरान इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के अनुसार, पत्र में लिखा था कि कट्टरपंथी गुटों ने राष्ट्रपति और अन्य अधिकारियों को सभी अहम फैसलों से पूरी तरह बाहर कर दिया है [4][20]।
ईरानी प्रशासन ने तुरंत इसे 'मीडिया गेम' और झूठी खबर बताकर खारिज किया, लेकिन सुप्रीम लीडर के कार्यालय या राष्ट्रपति कार्यालय से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन देर रात तक नहीं आया था [1][8][12]।