फिर भी, इन देशों के पास नागरिकों तक राष्ट्रीय संपत्ति पहुंचाने का पुराना ढांचा मौजूद है। तेल-आधारित अर्थव्यवस्था में नागरिकों को सरकारी नौकरियों, सब्सिडी, मुफ्त या कम लागत वाली सेवाओं और बिना आयकर वाली व्यवस्था के जरिए लाभ मिलता रहा है। कुछ विश्लेषक इसे पहले से मौजूद एक तरह का ‘पूंजीगत लाभांश’ मानते हैं ।
समर्थकों का तर्क है कि इसी वितरण व्यवस्था को AI से होने वाले मुनाफे के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है , ।
पश्चिमी देशों के विपरीत, खाड़ी सरकारें केवल निजी AI कंपनियों पर कर लगाने की कोशिश नहीं कर रहीं। वे डेटा सेंटर, चिप्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI कंपनियों में सीधे हिस्सेदार बनने की कोशिश कर रही हैं।
यहीं से खाड़ी मॉडल का सबसे बड़ा तर्क निकलता है। यदि सरकार AI कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर की मालिक है, तो AI से होने वाले लाभ का कुछ हिस्सा सीधे सार्वजनिक क्षेत्र तक पहुंच सकता है। इसके लिए निजी AI कंपनियों पर नया कर लगाने की उतनी जरूरत नहीं होगी, जितनी Sam Altman के प्रस्तावित अमेरिकी ‘पब्लिक वेल्थ फंड’ मॉडल में पड़ सकती है , ।
एक Thorsten Meyer AI रिपोर्ट ने खाड़ी देशों को AI से पैदा होने वाले रोजगार जोखिम के जवाब में सरकारी पूंजी-स्वामित्व का सबसे स्पष्ट उदाहरण बताया है , ।
यह जरूरी नहीं कि मॉडल पारंपरिक यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) जैसा हो। UBI में आम तौर पर सभी नागरिकों या सभी निवासियों को बिना रोजगार की शर्त के नियमित भुगतान देने की कल्पना की जाती है।
खाड़ी देशों में अधिक संभावित मॉडल ऐसा हो सकता है जिसमें:
PwC की जनवरी 2025 की रिपोर्ट ने GCC देशों के सामाजिक अनुबंध को बदलने के लिए कम आय वाले लोगों को स्थायी आय-सहायता देने को पांच संभावित नीति साधनों में शामिल किया था ।
4.8 ट्रिलियन डॉलर की संप्रभु संपत्ति कोई ऐसा नकद भंडार नहीं है जिसे तुरंत नागरिकों में बांटा जा सके। उसका बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक निवेशों और अपेक्षाकृत कम तरल संपत्तियों में लगा है। AI क्षेत्र में कई निजी कंपनियों की कीमतें भी ऐसे स्तरों पर हैं जिन्हें आलोचक अत्यधिक आशावादी मानते हैं।
गारंटीड आय के लिए हर साल भरोसेमंद और लगातार नकदी प्रवाह चाहिए। अगर AI कंपनियों की वैल्यूएशन गिरती है या मुनाफा उम्मीद से देर से आता है, तो नागरिकों को नियमित भुगतान बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। Ethical AI Alliance की Asma Derja ने भी कहा है कि संप्रभु कोष के रिटर्न या AI कंप्यूट टैक्स जैसे संभावित वित्तीय साधन अपने-आप पर्याप्त धन पैदा नहीं करते और उनमें बुनियादी चुनौतियां हैं ।
कई GCC देशों में निजी क्षेत्र के 80–90 प्रतिशत कर्मचारियों का हिस्सा प्रवासी कामगारों का है। ऐसे में सभी निवासियों को आय देने वाली योजना वित्तीय और राजनीतिक रूप से बेहद कठिन होगी। अधिक संभावित विकल्प केवल नागरिकों के लिए गारंटीड आय है।
यह मौजूदा ‘रेंटियर’ व्यवस्था—यानी राज्य की प्राकृतिक संसाधनों से हुई आय को नागरिकों तक पहुंचाने का मॉडल—का विस्तार होगा। लेकिन इसमें विदेशी कामगार शामिल नहीं होंगे। इसलिए इसे वैश्विक अर्थ में वास्तविक UBI कहना कठिन होगा। विश्लेषकों के अनुसार, किसी भी ऐसे मॉडल में प्रवासी बहिष्कार और राजनीतिक सीमाओं का सवाल अनसुलझा रहेगा ।
AI के कारण रोजगार में बदलाव आने से पहले नागरिकों को नई तकनीकी और पेशेवर क्षमताओं से लैस करना कई विशेषज्ञों को अधिक व्यावहारिक कदम लगता है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के विश्लेषकों ने अप्रैल 2025 में लिखा कि UBI जैसी किसी योजना की सफलता टिकाऊ वित्तपोषण, शिक्षा में निवेश और सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर ध्यान देने पर निर्भर करेगी—सिर्फ अर्थव्यवस्था और रोजगार के नतीजों पर नहीं ।
PwC ने भी सामाजिक अनुबंध में बदलाव के साथ सक्रिय श्रम-बाजार नीतियों की जरूरत पर जोर दिया है । इसका अर्थ है कि सरकारी प्रशिक्षण, शिक्षा, निजी क्षेत्र में रोजगार और नागरिकों की AI-संबंधी तैयारी को नकद भुगतान से पहले या उसके साथ प्राथमिकता दी जा सकती है।
खाड़ी देशों को इस तरह के प्रयोग के लिए सक्षम बनाने वाली वही व्यवस्थाएं—वंशानुगत शासन, सीमित राजनीतिक प्रतिनिधित्व और राज्य-आधारित कल्याण प्रणाली—नीति परिवर्तन में रुकावट भी बन सकती हैं।
संप्रभु संपत्ति कोषों पर अकादमिक शोध उन्हें केवल आय बांटने वाली संस्थाओं के रूप में नहीं, बल्कि शासन की स्थिरता बनाए रखने के साधन के रूप में भी देखता है । यदि गारंटीड आय मौजूदा सरकारी नौकरियों, सब्सिडी और संरक्षण-आधारित लाभों की जगह लेने लगे, तो इससे शासक और नागरिकों के बीच मौजूद पारंपरिक समझौते पर असर पड़ सकता है।
खाड़ी देशों का AI डिविडेंड विवाद एक व्यापक वैश्विक बहस का हिस्सा है: यदि AI और रोबोट अधिकांश काम कर देंगे, तो आम लोगों की आय और रोजगार का भविष्य क्या होगा?
25 जुलाई 2026 को The Economist की प्रधान संपादक Zanny Minton Beddoes के साथ बातचीत में Elon Musk ने कहा कि “2036 में पैसे की अहमियत नहीं रहेगी”। उनका तर्क था कि AI और रोबोट इतने अधिक सामान और सेवाएं पैदा करेंगे कि भोजन, आवास, परिवहन और मनोरंजन जैसी जरूरतें बेहद सस्ती हो जाएंगी , , ।
Musk ने इस भविष्य को ‘यूनिवर्सल हाई इनकम’ का दौर बताया और महंगाई के बजाय डिफ्लेशन यानी कीमतों में गिरावट की संभावना जताई , । तकनीकी निवेशक Vinod Khosla ने इस दिशा से सहमति जताई, हालांकि Forbes की रिपोर्ट के अनुसार उनकी प्रतिक्रिया में एक अधिक सावधान करने वाली चेतावनी भी छिपी थी ।
MIT के अर्थशास्त्री Daron Acemoglu AI से जुड़ी ‘असीम प्रचुरता’ वाली भविष्यवाणियों के प्रमुख आलोचकों में रहे हैं। उपलब्ध स्रोतों में 2026 में Musk के खास 2036 टाइमलाइन को चुनौती देने वाला Acemoglu का कोई सीधा उद्धरण नहीं है।
हालांकि, उनका स्थापित आर्थिक ढांचा Musk के दावे से अलग दिशा दिखाता है। Acemoglu के अनुसार, AI से उत्पादकता बढ़ भी जाए, तो लाभ समाज में अपने-आप समान रूप से नहीं बंटते। इसका परिणाम कर-नीति, श्रमिकों की सौदेबाजी की ताकत और सार्वजनिक निवेश जैसे फैसलों पर निर्भर करता है।
उन्होंने ‘सो-सो ऑटोमेशन’ की अवधारणा पर भी चेतावनी दी है—ऐसी तकनीक जो कर्मचारियों की जगह तो लेती है, लेकिन उनके लिए नए काम पैदा नहीं करती। इससे श्रम की मांग घट सकती है और असमानता बढ़ सकती है। इस नजरिए से केवल AI का अधिक उत्पादन करना नागरिकों के लिए आय सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
एक बात स्पष्ट है: इस विषय पर अधिक सार्वजनिक और नीतिगत चर्चा की जरूरत है। The National में 2024 के एक विचार लेख ने सुझाव दिया था कि UBI पर वैश्विक ज्ञान की कमी को दूर करने के लिए खाड़ी देशों में दशकों से चल रहे संपत्ति-वितरण के अनुभवों का अध्ययन किया जाना चाहिए ।
लेकिन अभी पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि कोई GCC सरकार AI संपत्तियों से जुड़ी गारंटीड आय योजना का सक्रिय अध्ययन या पायलट कार्यक्रम चला रही है। फिलहाल यह विचार विश्लेषण और अटकलों के स्तर पर ही है।
खाड़ी देशों के पास एक ऐसा ढांचा जरूर है जिसे पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के लिए दोहराना कठिन होगा: लगभग 4.8 ट्रिलियन डॉलर की संप्रभु संपत्ति, नागरिकों तक लाभ पहुंचाने का पुराना तंत्र और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रत्यक्ष सरकारी स्वामित्व , । इसलिए AI से होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा नागरिकों तक पहुंचाने की सैद्धांतिक संभावना मौजूद है।
लेकिन इसे आसान या तत्काल समाधान समझना गलत होगा। AI निवेशों की अस्थिर वैल्यूएशन, नियमित नकदी प्रवाह की अनिश्चितता, प्रवासी कामगारों का बहिष्कार, कौशल-विकास की तत्काल जरूरत और मौजूदा राजनीतिक ढांचे बड़ी चुनौतियां हैं।
इसलिए निकट भविष्य में खाड़ी का मॉडल सार्वभौमिक बुनियादी आय से अधिक नागरिकों के लिए लक्षित AI-संपत्ति लाभांश जैसा दिख सकता है—और वह भी तभी, जब AI निवेश वास्तव में स्थिर और बड़े पैमाने पर रिटर्न देना शुरू करें।