गैसली अकेले ऐसे ड्राइवर नहीं थे जो इस जाल में फंसे। एक असामान्य रूप से बड़ी संख्या में ड्राइवरों को मामूली स्पीड उल्लंघन के लिए यही सजा मिली । पेनल्टी पाने वाले ड्राइवरों की पूरी सूची इस प्रकार है:
सबकी स्पीड लिमिट केवल 0.1 से 0.4 किमी/घंटा ही पार हुई थी। FIA की प्रारंभिक जाँच ने इस लहर का कारण ड्राइवरों द्वारा पिट लेन के एंट्री पॉइंट को काटकर (short-cutting) दूरी कम करना बताया, जिससे ट्रांसपोंडर-टाइमिंग सिस्टम का स्पीड कैलकुलेशन प्रभावित हुआ ।
गैसली ने खुद को "दिल टूटा हुआ" (heartbroken) बताया और कहा कि उन्हें लूटा गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी कार का अपना टेलीमेट्री डेटा दिखाता है कि वे सीमा के भीतर थे । आल्पाइन के कार्यकारी सलाहकार फ्लेवियो ब्रियाटोर ने बाद में कहा कि टीम इन पेनल्टीज़ से "पूरी तरह असहमत" है ।
आल्पाइन की कानूनी रणनीति FIA सिस्टम द्वारा रिपोर्ट की गई संख्या से इनकार नहीं करती। इसके बजाय, यह पिट लेन के भौतिक लेआउट के आधार पर उस रीडिंग की मूल वैधता को चुनौती देती है। इसे 'ज्यामिति बचाव' (geometry defense) कहा जा रहा है ।
1. मुख्य विवाद: मापन विधि बनाम वास्तविक गति
FIA पिट लेन की स्पीड मापने के लिए 'समय-दूरी' (time-over-distance) विधि का उपयोग करता है। यह सिस्टम दो निर्दिष्ट टाइमिंग लूप्स के बीच कार को केंद्र रेखा (centerline) पर चलने में लगने वाले समय के आधार पर औसत स्पीड की गणना करता है । आल्पाइन टेलीमेट्री डेटा पेश करने वाली है जो यह साबित करता है कि पिट लेन में प्रवेश के दौरान गैसली की वास्तविक गति कभी भी 60 किमी/घंटा से अधिक नहीं हुई । तर्क यह है कि FIA का परिकलित आंकड़ा कार की वास्तविक गति का सटीक प्रतिबिंब नहीं है।
2. टाइमिंग-लाइन प्लेसमेंट और पिट-एंट्री ज्यामिति
बचाव मोनाको पिट एंट्री के विशिष्ट लेआउट पर ध्यान केंद्रित करता है। आल्पाइन तर्क देगा कि घुमावदार एंट्री से गुजरते समय ड्राइवर द्वारा चुनी गई लाइन, एक निश्चित टाइमिंग लूप की स्थिति के साथ इस तरह से इंटरैक्ट कर सकती है कि गलत औसत-स्पीड रीडिंग उत्पन्न हो ।
3. सिस्टम की खराबी, ड्राइवर की गलती नहीं
आल्पाइन अपने मामले को मजबूत करने के लिए इस असंभाव्यता की ओर इशारा कर रही है कि चार अलग-अलग टीमों के पाँच ड्राइवरों की स्पीड लगभग समान और न्यूनतम थी। इससे पता चलता है कि यह कोई समन्वित ड्राइवर लापरवाही नहीं, बल्कि मॉनिटरिंग उपकरणों की एक प्रणालीगत समस्या (systemic issue) है । जॉर्ज रसेल ने भी सार्वजनिक रूप से सिस्टम पर सवाल उठाया और पेनल्टी के लिए "सॉफ्टवेयर की खराबी" को जिम्मेदार ठहराया ।
राइट ऑफ रिव्यू की शर्त बहुत कड़ी है। आल्पाइन को यह साबित करना होगा कि उसका टेलीमेट्री और ज्यामिति विश्लेषण एक "नया और महत्वपूर्ण" तत्व है जो मूल निर्णय के समय स्टीवर्ड्स के पास उपलब्ध नहीं था ।
आल्पाइन ने रेस खत्म होने के तुरंत बाद औपचारिक राइट ऑफ रिव्यू दाखिल किया था । FIA ने सुनवाई की तारीख और प्रारूप तय कर दिया है।
गैसली अकेले ऐसे ड्राइवर नहीं थे जो इस जाल में फंसे। एक असामान्य रूप से बड़ी संख्या में ड्राइवरों को मामूली स्पीड उल्लंघन के लिए यही सजा मिली । पेनल्टी पाने वाले ड्राइवरों की पूरी सूची इस प्रकार है:
सबकी स्पीड लिमिट केवल 0.1 से 0.4 किमी/घंटा ही पार हुई थी। FIA की प्रारंभिक जाँच ने इस लहर का कारण ड्राइवरों द्वारा पिट लेन के एंट्री पॉइंट को काटकर (short-cutting) दूरी कम करना बताया, जिससे ट्रांसपोंडर-टाइमिंग सिस्टम का स्पीड कैलकुलेशन प्रभावित हुआ ।
गैसली ने खुद को "दिल टूटा हुआ" (heartbroken) बताया और कहा कि उन्हें लूटा गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी कार का अपना टेलीमेट्री डेटा दिखाता है कि वे सीमा के भीतर थे । आल्पाइन के कार्यकारी सलाहकार फ्लेवियो ब्रियाटोर ने बाद में कहा कि टीम इन पेनल्टीज़ से "पूरी तरह असहमत" है ।
आल्पाइन की कानूनी रणनीति FIA सिस्टम द्वारा रिपोर्ट की गई संख्या से इनकार नहीं करती। इसके बजाय, यह पिट लेन के भौतिक लेआउट के आधार पर उस रीडिंग की मूल वैधता को चुनौती देती है। इसे 'ज्यामिति बचाव' (geometry defense) कहा जा रहा है ।
1. मुख्य विवाद: मापन विधि बनाम वास्तविक गति
FIA पिट लेन की स्पीड मापने के लिए 'समय-दूरी' (time-over-distance) विधि का उपयोग करता है। यह सिस्टम दो निर्दिष्ट टाइमिंग लूप्स के बीच कार को केंद्र रेखा (centerline) पर चलने में लगने वाले समय के आधार पर औसत स्पीड की गणना करता है । आल्पाइन टेलीमेट्री डेटा पेश करने वाली है जो यह साबित करता है कि पिट लेन में प्रवेश के दौरान गैसली की वास्तविक गति कभी भी 60 किमी/घंटा से अधिक नहीं हुई । तर्क यह है कि FIA का परिकलित आंकड़ा कार की वास्तविक गति का सटीक प्रतिबिंब नहीं है।
2. टाइमिंग-लाइन प्लेसमेंट और पिट-एंट्री ज्यामिति
बचाव मोनाको पिट एंट्री के विशिष्ट लेआउट पर ध्यान केंद्रित करता है। आल्पाइन तर्क देगा कि घुमावदार एंट्री से गुजरते समय ड्राइवर द्वारा चुनी गई लाइन, एक निश्चित टाइमिंग लूप की स्थिति के साथ इस तरह से इंटरैक्ट कर सकती है कि गलत औसत-स्पीड रीडिंग उत्पन्न हो ।
3. सिस्टम की खराबी, ड्राइवर की गलती नहीं
आल्पाइन अपने मामले को मजबूत करने के लिए इस असंभाव्यता की ओर इशारा कर रही है कि चार अलग-अलग टीमों के पाँच ड्राइवरों की स्पीड लगभग समान और न्यूनतम थी। इससे पता चलता है कि यह कोई समन्वित ड्राइवर लापरवाही नहीं, बल्कि मॉनिटरिंग उपकरणों की एक प्रणालीगत समस्या (systemic issue) है । जॉर्ज रसेल ने भी सार्वजनिक रूप से सिस्टम पर सवाल उठाया और पेनल्टी के लिए "सॉफ्टवेयर की खराबी" को जिम्मेदार ठहराया ।
राइट ऑफ रिव्यू की शर्त बहुत कड़ी है। आल्पाइन को यह साबित करना होगा कि उसका टेलीमेट्री और ज्यामिति विश्लेषण एक "नया और महत्वपूर्ण" तत्व है जो मूल निर्णय के समय स्टीवर्ड्स के पास उपलब्ध नहीं था ।
आल्पाइन ने रेस खत्म होने के तुरंत बाद औपचारिक राइट ऑफ रिव्यू दाखिल किया था । FIA ने सुनवाई की तारीख और प्रारूप तय कर दिया है।