हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि समूह ने “उत्तरी लाल सागर में यानबू के तट के पास सऊदी तेल टैंकर ‘वफ़ा’ को कई बैलिस्टिक मिसाइलों से सफलतापूर्वक निशाना बनाया।” उन्होंने हमले को सटीक बताया ।
सरी के अनुसार, हमले के बाद जहाज को वापस लौटना पड़ा। हालांकि, हूतियों ने टैंकर की वास्तविक स्थिति, संभावित क्षति या चालक दल के बारे में अतिरिक्त जानकारी नहीं दी । इस दावे के साथ समूह ने कहा है कि 22 जुलाई को नाकेबंदी शुरू होने के बाद से आठ सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा चुका है ।
हूतियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को सऊदी या सऊदी-संबद्ध जहाजों के लिए बंद घोषित किया है । बाब अल-मंदेब लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित एक अहम समुद्री मार्ग है, जो हिंद महासागर और भूमध्यसागर के बीच जहाजों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है।
याह्या सरी ने व्यापक अभियान में 29 अन्य, लेकिन स्पष्ट रूप से पहचान न किए गए, जहाजों को निशाना बनाने का भी दावा किया है । इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं है।
LSEG और MarineTraffic के जहाज-ट्रैकिंग रिकॉर्ड के अनुसार, एशिया से लौट रहे छह खाली सऊदी तेल टैंकर अरब सागर में बाब अल-मंदेब की ओर जाने के बजाय दक्षिण की ओर मुड़ गए और केप ऑफ गुड होप से होते हुए अफ्रीका का चक्कर लगा रहे हैं ।
इनमें से प्रत्येक सुपरटैंकर अधिकतम 20 लाख बैरल कच्चा तेल ले जा सकता है । इस वैकल्पिक मार्ग से हर यात्रा में कम-से-कम दो सप्ताह अतिरिक्त लग सकते हैं। इसके चलते ईंधन खर्च, बीमा प्रीमियम और डिलीवरी का समय बढ़ रहा है ।
जहाज-ट्रैकिंग जानकारी में एक टैंकर डिलम का गंतव्य जिब्राल्टर दर्ज था । यह बदलाव बताता है कि कारोबारी जहाज संचालक लाल सागर में सुरक्षा जोखिम को गंभीरता से ले रहे हैं ।
हूतियों ने नाकेबंदी को यमन पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की नाकेबंदी और सना अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हालिया बमबारी का जवाब बताया है। समूह अपने समुद्री अभियान को इसी कथित कार्रवाई के जवाब में उठाया गया पारस्परिक कदम बता रहा है ।
उपलब्ध स्रोत इस औचित्य का उल्लेख करते हैं, लेकिन हवाईअड्डे पर हुई बमबारी की समय-रेखा और उससे जुड़े विस्तृत तथ्य इन स्रोतों में सीमित हैं।
हूती नाकेबंदी से सऊदी और सऊदी-संबद्ध जहाजों के लिए बाब अल-मंदेब मार्ग प्रभावी रूप से जोखिमपूर्ण हो गया है। जहाजों के सामने दो विकल्प हैं—अफ्रीका के चारों ओर लंबा रास्ता अपनाना या हमले के खतरे के बीच लाल सागर से गुजरना ।
यह मार्ग मध्य पूर्व से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाले कच्चे तेल तथा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। 22 जुलाई तक यूरोपीय संघ नौसैनिक बल ने इजरायल, अमेरिका या सऊदी अरब से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों को क्षेत्र से बचने की चेतावनी दी थी ।
उपलब्ध स्रोतों में ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। इसलिए वर्तमान में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दिख रहा अतिरिक्त दबाव हूतियों की बाब अल-मंदेब नाकेबंदी से जुड़ा है, न कि स्वतंत्र रूप से पुष्ट ईरानी नाकेबंदी से।
अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अलग से बंद किया गया या उसके बंद होने का गंभीर खतरा पैदा हुआ, तो उसका असर कहीं अधिक व्यापक हो सकता है। लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती।
हूतियों ने कहा है कि सऊदी अरब क्षेत्र में समुद्री आवाजाही जारी रखता है, इसलिए वे उत्तरी लाल सागर में हमले तेज करेंगे । छह सुपरटैंकरों का अफ्रीका के रास्ते मुड़ना संकेत देता है कि शिपिंग उद्योग इस खतरे के अनुसार अपनी योजनाएं बदल रहा है ।
हर यात्रा में दो या उससे अधिक सप्ताह जुड़ने से ईंधन, बीमा और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। इससे सऊदी तेल निर्यात की लॉजिस्टिक्स जटिल हो रही है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर कीमतों का दबाव बढ़ सकता है ।