महत्वपूर्ण बात: यह हमला तीन हफ्तों में जिज़ान रिफाइनरी पर दूसरा हमला था। इससे पहले 27 जुलाई को हुए हमले में रिफाइनरी के इंटीग्रेटेड गैसिफिकेशन कंबाइंड साइकिल (IGCC) कॉम्प्लेक्स और टैंक फार्म को नुकसान पहुँचा था, जिसके बाद रिफाइनरी को बंद करना पड़ा था ।
हौथी विद्रोहियों के अनुसार, यह हमला सऊदी अरब द्वारा यमनी हवाई क्षेत्र के उल्लंघन के जवाब में किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सऊदी ड्रोन यमन के सादा (Saada) और हज्जाह (Hajjah) प्रांतों में घुस रहे थे ।
हमले का समय भी काफी अहम था। यह हमला ऐसे समय हुआ जब सऊदी अरब ने अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध की बढ़ती अस्थिरता के मद्देनज़र तुर्की और पाकिस्तान के साथ एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे ।
इसके अलावा, हौथियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ लाल सागर (Red Sea) में समुद्री नाकाबंदी (Naval Blockade) की घोषणा कर दी थी। उनका कहना था कि यह सऊदी अरब द्वारा उन पर लगाए गए घेरे के जवाब में है, जिसे रियाद (Riyadh) ने खारिज किया ।
जिज़ान रिफाइनरी सऊदी अरामको की एक प्रमुख डाउनस्ट्रीम परियोजना है। इसकी डिज़ाइन क्षमता 4,00,000 बैरल प्रतिदिन (bpd) है । अरामको के सीईओ अमीन नासिर (Amin Nasser) के अनुसार, मार्च 2023 में यह रिफाइनरी अपनी पूरी क्षमता 4,00,000 bpd पर पहुँच गई थी
। यह रिफाइनरी गैसोलीन, अल्ट्रा-लो-सल्फर डीज़ल और अन्य उत्पाद बनाती है
।
27 जुलाई के पहले हमले के बाद, जिसमें IGCC कॉम्प्लेक्स और टैंक फार्म को नुकसान पहुँचा , सऊदी अरामको ने रिफाइनरी को बंद कर दिया
। शुरुआत में 15 अगस्त तक इसे फिर से शुरू करने की योजना थी
, लेकिन 9 अगस्त के हमले के बाद मार्केट इंटेलिजेंस फर्म IIR एनर्जी के अनुसार, अरामको ने इसे टालकर 30 अगस्त कर दिया
। इसका मतलब है कि लगभग 4,00,000 bpd की सऊदी रिफाइनिंग क्षमता एक महीने से अधिक समय तक ठप रही।
हौथी हमला कोई अकेली घटना नहीं है। यह क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष की एक बड़ी तस्वीर का हिस्सा है:
1. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का दबाव: ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे वैश्विक ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है । ईरान का कहना है कि वह ओमान (Oman) के साथ नए शिपिंग मार्गों पर बातचीत के अंतिम चरण में है और वह खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों पर नियंत्रण चाहता है
।
2. हौथी लाल सागर नाकाबंदी: 20 जुलाई को हौथियों ने सऊदी अरब पर "समुद्री प्रतिबंध" (maritime embargo) लगाने की घोषणा की । 12 अगस्त को हौथी विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) में एक मालवाहक जहाज पर हमला कर 6 लोगों को मार डाला। एक साल में लाल सागर में यह पहली घातक घटना थी
।
3. सऊदी जमीनी हमले की तैयारी: जुलाई के अंत तक, सऊदी अरब यमन में हौथियों के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान (जमीनी और समुद्री) की तैयारी कर रहा था ।
4. एक साथ हमले: 9 अगस्त को रिफाइनरी पर हमले के अलावा, हौथियों ने यमन के सरकारी नियंत्रण वाले अल-मखा (मोखा) बंदरगाह पर भी हमला किया, जिसमें कम से कम 7 लोग मारे गए ।
हौथी विद्रोहियों ने दिखाया है कि वे ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से सऊदी क्षेत्र में गहरे तक हमला कर सकते हैं। ईरान से मिले हथियारों से लैस उनके पास सैकड़ों किलोमीटर तक मार करने वाले ड्रोन, एंटी-शिप मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल हैं ।
सऊदी अरब के सामने अब कई चुनौतियाँ हैं: