14 मई को कीव स्थित यूक्रेन की हाई एंटी‑करप्शन कोर्ट ने आदेश दिया कि यरमाक को 60 दिन की प्री‑ट्रायल हिरासत में रखा जाए।
हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि यदि वे 140 मिलियन ह्रीव्निया (लगभग 3.1–3.2 मिलियन डॉलर) की जमानत भरते हैं तो उन्हें अस्थायी रूप से रिहा किया जा सकता है।
अभियोजकों ने इससे भी अधिक—180 मिलियन ह्रीव्निया—की जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे घटा दिया।
जमानत मिलने की स्थिति में उन पर कुछ शर्तें लागू होंगी, जैसे:
हालांकि जमानत का विकल्प मौजूद था, फिर भी यरमाक कई दिनों तक हिरासत में रहे। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए गए:
दूसरा, यूक्रेन की हाई एंटी‑करप्शन कोर्ट सप्ताहांत पर जमानत भुगतान की पुष्टि नहीं करती। इसलिए यदि पैसा जमा भी हो जाए, तब भी अदालत के कामकाज शुरू होने तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाती।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि समर्थक और परिचित लोग मिलकर अलग‑अलग स्रोतों से पैसा जुटाने की कोशिश कर रहे थे ताकि 140 मिलियन ह्रीव्निया की पूरी राशि पूरी हो सके।
यह जांच NABU और SAPO ने शुरू की थी और इसका मुख्य फोकस यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र—विशेषकर सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी Energoatom—में कथित भ्रष्टाचार पर है।
जांचकर्ताओं के अनुसार इस बड़े नेटवर्क में कम से कम 100 मिलियन डॉलर के गबन और मनी‑लॉन्ड्रिंग का शक है।
रिपोर्टों के मुताबिक इस कथित योजना में ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदारों से कमीशन या किकबैक मांगे जाते थे।
हालांकि यरमाक के खिलाफ लगाया गया हाउसिंग‑प्रोजेक्ट वाला आरोप एक अलग प्रकरण माना जा रहा है, लेकिन कुछ जांच रिपोर्टों में कहा गया है कि यह उसी वित्तीय नेटवर्क से जुड़ सकता है जिसे ऑपरेशन मिडास में उजागर किया गया था।
इस व्यापक जांच में कई प्रभावशाली नामों का भी उल्लेख हुआ है। रिपोर्टों में जिन लोगों का जिक्र आता है, उनमें शामिल हैं:
यरमाक ने सभी आरोपों को खारिज किया है। अदालत में उन्होंने कहा कि उनके पास जमानत के लिए इतनी बड़ी रकम नहीं है।
उनकी कानूनी टीम ने अदालत के फैसले के कुछ हिस्सों के खिलाफ अपील करने की योजना भी जताई है।
इस मामले का महत्व केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख के रूप में यरमाक को लंबे समय तक ज़ेलेंस्की के सबसे प्रभावशाली सलाहकारों में से एक माना जाता था।
इस वजह से मामला कई स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
एंटी‑करप्शन संस्थाओं की परीक्षा: यूरोपीय संघ में शामिल होने की यूक्रेन की प्रक्रिया में NABU, SAPO और हाई एंटी‑करप्शन कोर्ट जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है। इतने बड़े राजनीतिक नाम के खिलाफ जांच को उसी कसौटी पर देखा जा रहा है।
सरकार पर राजनीतिक दबाव: युद्ध के दौरान राष्ट्रपति के पूर्व करीबी सहयोगी पर आरोप लगना सरकार की छवि पर असर डाल सकता है और विरोधियों को मुद्दा दे सकता है।
जनता का भरोसा: रूस के खिलाफ युद्ध जारी रहने के बीच यूक्रेन का नेतृत्व बार‑बार कहता रहा है कि भ्रष्टाचार से लड़ना अंतरराष्ट्रीय समर्थन बनाए रखने के लिए जरूरी है।
यह मामला अभी शुरुआती कानूनी चरण में है।
फिर भी इतना साफ है कि यह मामला रूस‑यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन की राजनीति में सामने आए सबसे महत्वपूर्ण भ्रष्टाचार मामलों में से एक बन चुका है।
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