यह कदम अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चीनी-प्रभुत्व वाली आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता को खतरा मानते हुए उठाया गया है। ये नियम 4 दिसंबर 2026 को सुबह 12:01 बजे (पूर्वी समय) से लागू होंगे, यानी घोषणा के 120 दिन बाद। इस अंतराल का उद्देश्य कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला और अनुबंधों को समायोजित करने का समय देना है।
| उत्पाद | न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) |
|---|---|
| पॉलीसिलिकॉन | 21 डॉलर प्रति किग्रा |
| पॉलीसिलिकॉन इंगट और वेफ़र | 100 डॉलर प्रति किग्रा |
| सोलर सेल | 0.22 डॉलर प्रति वॉट |
| सोलर मॉड्यूल | 0.38 डॉलर प्रति वॉट |
स्रोत: व्हाइट हाउस की घोषणा
यह टैरिफ़ वैश्विक स्तर पर लागू होगा, जिसमें भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश भी शामिल हैं। हालांकि, 6 अगस्त 2026 से पहले हस्ताक्षरित फिक्स्ड-प्राइस अनुबंधों को छूट दी गई है।
प्रशासन का तर्क है कि चीन की सब्सिडी और डंपिंग रणनीतियों ने अमेरिकी पॉलीसिलिकॉन और सौर विनिर्माण को कमजोर कर दिया है। इसीलिए, 15% टैरिफ़ और मूल्य तल (Price Floor) की यह दोहरी व्यवस्था बनाई गई है, ताकि अमेरिकी उत्पादकों को चीनी आयात से सुरक्षा मिल सके।
फ़र्स्ट सोलर (FSLR) इस टैरिफ़ का सबसे स्पष्ट लाभार्थी बनकर उभरा है। इसकी कैडमियम टेल्यूराइड (CdTe) पतली-फिल्म तकनीक आयातित पॉलीसिलिकॉन पर निर्भर नहीं करती है, जिससे सिलिकॉन-आधारित प्रतिस्पर्धियों पर इसकी बढ़त बढ़ गई है।
11 अगस्त 2026 को, दक्षिण कोरिया के व्यापार, उद्योग और ऊर्जा मंत्रालय ने कोरिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में एक सार्वजनिक-निजी आपात बैठक बुलाई। इस बैठक की अध्यक्षता व्यापार सहायक मंत्री पार्क जुंग-संग ने की, जिसमें सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और OCI कंपनी (एक प्रमुख पॉलीसिलिकॉन आपूर्तिकर्ता) जैसी कंपनियों और जलवायु, ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने भाग लिया।
दक्षिण कोरिया की चिंताएं:
दक्षिण कोरिया के अमेरिका को पॉलीसिलिकॉन व्युत्पन्न निर्यात का मूल्य 2025 में लगभग 4.3 बिलियन डॉलर था।
यह टैरिफ़ अमेरिकी सौर उद्योग में स्पष्ट विजेताओं और हारने वालों का एक खाका तैयार करता है:
भारतीय और अन्य घरेलू उपकरण निर्माता (विजेता):
अमेरिकी सौर इंस्टॉलर और प्रोजेक्ट डेवलपर (प्रभावित):
कुल मिलाकर, यह अमेरिकी सौर आपूर्ति श्रृंखला का एक नया रूप है, जो घरेलू विनिर्माण क्षमता को पुरस्कृत करता है और आयात-निर्भर प्रोजेक्ट अर्थव्यवस्था को दंडित करता है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे अमेरिकी सौर संयंत्र निर्माण की गति धीमी हो सकती है, भले ही यह घरेलू कारखानों के उपयोग को मजबूत करता हो।