अमेरिकी आलोचना के बाद, 13 अगस्त को कैट्ज़ ने अपने बयान से पीछे हटते हुए स्पष्ट किया कि इज़राइल तब तक नहीं हटेगा जब तक हिज़बुल्लाह पूरी तरह से निहत्था नहीं हो जाता। उन्होंने इस उपस्थिति को स्थायी के बजाय 'शर्त पर निर्भर' (कंडीशनल) बताया । हालाँकि, इस बदलाव ने मुख्य तनाव को हल नहीं किया, क्योंकि यह ढाँचा स्पष्ट रूप से वापसी की कल्पना हिज़बुल्लाह के निरस्त्रीकरण के बाद नहीं, बल्कि उसके साथ-साथ होने के रूप में करता है।
26 जून, 2026 को वाशिंगटन, डी.सी. में हस्ताक्षरित इस समझौते में एक प्रदर्शन-आधारित प्रक्रिया शामिल है जिसमें शामिल हैं :
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते को "पहला कदम" और "लेबनान की संप्रभुता बहाल करने के लिए एक स्पष्ट और संरचित प्रक्रिया" बताया था । इसके बाद वार्ता के कई दौर हुए, जिनमें अगस्त 2026 की शुरुआत में रोम में हुआ सातवाँ दौर भी शामिल है, जो चरणबद्ध वापसी के लिए "पायलट ज़ोन" स्थापित करने पर केंद्रित था
। कैट्ज़ के बयान ने इस बातचीत-आधारित ढाँचे को सीधी चुनौती दी।
12 अगस्त को, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दक्षिणी लेबनान में इज़राइली अभियानों की एक सशक्त निंदा जारी की, विशेष रूप से उल्लेख करते हुए :
सलाम ने इज़राइल पर सामूहिक दंड (कलेक्टिव पनिशमेंट) का आरोप लगाया और कहा कि वह "लेबनान के इतिहास को मिटाने का प्रयास कर रहा है" । उन्होंने कहा कि गाँवों को पूरी तरह से सैन्य प्रतिष्ठान बताने का दावा "किसी भी तर्क की कसौटी पर खरा नहीं उतरता और विनाश के बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता"
। सलाम ने यह भी कहा कि उनकी सरकार युद्ध अपराधों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के सबूत जुटाने में सहायता कर रही है
। एक अलग घटना में, सलाम ने बताया कि उनका X अकाउंट हैक कर लिया गया था, जब इज़राइल पर गंभीर उल्लंघनों का आरोप लगाने वाली एक पोस्ट हटा दी गई
।
दक्षिणी लेबनान में अग्निशामकों, निवासियों और पर्यावरण समूहों ने इज़राइली सेना पर जानबूझकर जंगलों में आग लगाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सेना ड्रोन, फ्लेयर्स और गोला-बारूद का इस्तेमाल करके जंगलों, जैतून के बागों और खेतों में आग लगा रही है । मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:
| पक्ष | रुख |
|---|---|
| इज़राइल (कैट्ज़) | सेना तब तक रहेगी जब तक हिज़बुल्लाह निहत्था नहीं हो जाता; पहले "स्थायी" उपस्थिति का बयान दिया, फिर अमेरिकी दबाव के बाद "शर्त पर निर्भर" बताया |
| लेबनान (सलाम) | घरों और धार्मिक स्थलों का व्यवस्थित विनाश अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है; इज़राइल पर झुलसी-पृथ्वी नीति और जानबूझकर आग लगाने का आरोप |
| अमेरिका (ट्रम्प प्रशासन) | कैट्ज़ के बयान को 26 जून के ढाँचे के विपरीत बताकर खारिज किया; हिज़बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और LAF की तैनाती से जुड़ी चरणबद्ध वापसी पर जोर |
अमेरिकी मध्यस्थता वाली वार्ता का सातवाँ दौर अगस्त 2026 की शुरुआत में रोम में संपन्न हुआ, जिसमें 'पायलट ज़ोन' पर प्रगति हुई, लेकिन कार्यान्वयन अभी भी अटका हुआ है । एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, चार देशों — ब्रिटेन, इटली, स्विट्जरलैंड और इंडोनेशिया — की एक शॉर्टलिस्ट पर सहमति होने की खबर थी, जो हिज़बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की पुष्टि करेंगे, हालाँकि एक लेबनानी अधिकारी ने बाद में इस समझौते से इनकार किया
।
मुख्य विरोधाभास बना हुआ है: इज़राइल कहता है कि जब तक हिज़बुल्लाह पूरी तरह से निहत्था नहीं हो जाता, वह पीछे नहीं हटेगा, जबकि ढाँचा समझौता निरस्त्रीकरण के साथ-साथ वापसी की कल्पना करता है, न कि उसके बाद। इस बीच, चल रहे विध्वंस और जंगल की आग के आरोप संघर्ष विराम की व्यवहार्यता को और कमजोर कर रहे हैं।