प्रेडिक्शन मार्केट्स: Polymarket और Kalshi कैसे काम करते हैं और भारत में इन पर कार्रवाई क्यों हो रही है
प्रेडिक्शन मार्केट्स में यूज़र भविष्य की घटनाओं—जैसे चुनाव, खेल या आर्थिक फैसलों—पर ‘हाँ/ना’ कॉन्ट्रैक्ट खरीद‑बेच कर ट्रेड करते हैं। कॉन्ट्रैक्ट की कीमत उस घटना की संभावित संभावना दिखाती है, इसलिए इन्हें भीड़ की भविष्यवाणी (wisdom of crowds) का एक तरीका माना जाता है। भारत सरकार इन प्लेटफ़ॉर्म्स को ऑफशोर बेटिंग सेवाए...
What are prediction market platforms like Polymarket and Kalshi, how do they work (including allowing users to bet on outcomes such as sportPrediction markets allow traders to buy and sell contracts tied to the outcome of real‑world events such as elections, sports, or economic developments.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What are prediction market platforms like Polymarket and Kalshi, how do they work (including allowing users to bet on outcomes such as sport. Article summary: Platforms like Polymarket and Kalshi are online prediction markets: users buy “yes” or “no” positions on whether a future event will happen, and the trading price functions like an implied probability of that outcome. In. Topic tags: general, general web, user generated, education. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# What Is a Prediction Market? How Kalshi, Polymarket, and Major Betting & Finance Companies Sparked a New Forecasting Economy. Prediction markets have become one of the fastest-gr" source context "What Is a Prediction Market? How Kalshi, Polymarket, and Major Betting & Finance Companies Sparked a New
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प्रेडिक्शन मार्केट ऐसे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म होते हैं जहाँ लोग भविष्य में होने वाली घटनाओं के नतीजों पर ट्रेड करते हैं। ये घटनाएँ चुनाव परिणाम, खेल मुकाबले, आर्थिक फैसले या बड़े वैश्विक घटनाक्रम तक हो सकती हैं। Polymarket और Kalshi जैसे प्लेटफ़ॉर्म ने इस मॉडल को लोकप्रिय बनाया है, जहाँ यूज़र किसी घटना पर ‘हाँ’ या ‘ना’ के कॉन्ट्रैक्ट खरीदते‑बेचते हैं।
हाल के वर्षों में इन प्लेटफ़ॉर्म्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। लेकिन भारत में सरकार अब इन्हें ऑनलाइन बेटिंग या जुआ जैसी गतिविधि मानते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
प्रेडिक्शन मार्केट क्या होते हैं
प्रेडिक्शन मार्केट मूल रूप से एक ऐसा डिजिटल बाज़ार है जहाँ किसी भविष्य की घटना के होने या न होने पर कॉन्ट्रैक्ट खरीदे और बेचे जाते हैं। आम तौर पर इन कॉन्ट्रैक्ट्स का भुगतान बाइनरी (दो संभावनाओं) पर आधारित होता है—घटना हुई तो भुगतान मिलेगा, नहीं हुई तो नहीं।
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"प्रेडिक्शन मार्केट्स: Polymarket और Kalshi कैसे काम करते हैं और भारत में इन पर कार्रवाई क्यों हो रही है" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
प्रेडिक्शन मार्केट्स में यूज़र भविष्य की घटनाओं—जैसे चुनाव, खेल या आर्थिक फैसलों—पर ‘हाँ/ना’ कॉन्ट्रैक्ट खरीद‑बेच कर ट्रेड करते हैं।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
प्रेडिक्शन मार्केट्स में यूज़र भविष्य की घटनाओं—जैसे चुनाव, खेल या आर्थिक फैसलों—पर ‘हाँ/ना’ कॉन्ट्रैक्ट खरीद‑बेच कर ट्रेड करते हैं। कॉन्ट्रैक्ट की कीमत उस घटना की संभावित संभावना दिखाती है, इसलिए इन्हें भीड़ की भविष्यवाणी (wisdom of crowds) का एक तरीका माना जाता है।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
भारत सरकार इन प्लेटफ़ॉर्म्स को ऑफशोर बेटिंग सेवाएँ मानती है और रिपोर्ट्स के अनुसार इन्हें IT Act की धारा 69A के तहत ब्लॉक करने की तैयारी कर रही है।
अगर किसी घटना का ‘Yes’ कॉन्ट्रैक्ट $0.70 पर ट्रेड हो रहा है, तो इसका मतलब बाज़ार के अनुसार उस घटना के होने की संभावना लगभग 70% मानी जा रही है।
जैसे‑जैसे नई जानकारी आती है—जैसे सर्वे, खबरें या प्रदर्शन—लोग अपनी पोज़िशन बदलते हैं और कॉन्ट्रैक्ट की कीमत ऊपर‑नीचे होती रहती है। इस प्रक्रिया को कई लोग “wisdom of crowds” यानी भीड़ की सामूहिक समझ से भविष्य का अनुमान लगाने का तरीका मानते हैं।
Polymarket और Kalshi जैसे प्लेटफ़ॉर्म कैसे काम करते हैं
हालाँकि हर प्लेटफ़ॉर्म की तकनीकी संरचना अलग हो सकती है, लेकिन उनका मूल तरीका लगभग एक जैसा होता है।
1. वास्तविक घटनाओं पर मार्केट बनाए जाते हैं
प्लेटफ़ॉर्म पर अलग‑अलग सवाल या इवेंट होते हैं—जैसे चुनाव परिणाम, खेल प्रतियोगिता, या आर्थिक निर्णय।
2. यूज़र ‘Yes’ या ‘No’ कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं
यूज़र किसी परिणाम पर हिस्सेदारी खरीदते हैं। अगर उनका अनुमान सही साबित होता है तो कॉन्ट्रैक्ट तय राशि—अक्सर $1—का भुगतान करता है।
3. कीमतें लगातार बदलती रहती हैं
जैसे ही लोगों का भरोसा किसी नतीजे पर बढ़ता या घटता है, उस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत भी बदलती है। यही कीमत उस घटना की संभावित संभावना का संकेत बन जाती है।
4. परिणाम तय होने पर सेटलमेंट होता है
घटना का वास्तविक परिणाम आने के बाद सही कॉन्ट्रैक्ट धारकों को भुगतान मिलता है और गलत कॉन्ट्रैक्ट बेकार हो जाते हैं।
यह सिस्टम कई मायनों में स्टॉक एक्सचेंज जैसा दिखता है क्योंकि यूज़र एक‑दूसरे के साथ ट्रेड करते हैं, न कि सीधे किसी “बुकमेकर” या हाउस के खिलाफ।
सरकारें इन्हें कभी‑कभी जुए जैसा क्यों मानती हैं
हालाँकि समर्थक कहते हैं कि प्रेडिक्शन मार्केट जानकारी और डेटा का उपयोग करके बेहतर अनुमान लगाने में मदद करते हैं, लेकिन कई नियामक संस्थाएँ इन्हें बेटिंग या जुआ का नया रूप मानती हैं।
मुख्य चिंताएँ आम तौर पर ये होती हैं:
यूज़र्स के लिए वित्तीय जोखिम
संभावित बाजार हेरफेर या गलत जानकारी
मौजूदा जुआ या गेमिंग कानूनों से टकराव
यही कारण है कि अलग‑अलग देशों में इन प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए नियम अलग‑अलग हैं—कुछ जगह इन्हें सीमित रूप में अनुमति है, जबकि कई जगह इन्हें प्रतिबंधित किया गया है।
भारत सरकार इन्हें ब्लॉक क्यों करना चाहती है
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने हाल के महीनों में Polymarket और Kalshi जैसे ऑफशोर प्लेटफ़ॉर्म्स की गतिविधियों की जाँच शुरू की है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय यूज़र इनका उपयोग चुनाव परिणाम, IPL जैसे खेल मुकाबलों और अन्य घटनाओं पर पैसे लगाने के लिए कर रहे थे।
सरकार का कहना है कि ये प्लेटफ़ॉर्म भारत के ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग नियमों के बाहर काम कर रहे हैं, इसलिए भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए इन्हें अवैध माना जा रहा है।
अधिकारियों की चिंता के कुछ प्रमुख कारण बताए गए हैं:
चुनाव से जुड़े बेटिंग मार्केट्स में बढ़ोतरी
विदेशी प्लेटफ़ॉर्म द्वारा भारतीय यूज़र्स को सेवा देना
क्रिप्टो एसेट (जैसे stablecoins) के जरिए भुगतान कर प्रतिबंधों को दरकिनार करना।
सरकार क्या कदम उठा रही है
कार्रवाई कई चरणों में आगे बढ़ी है।
सबसे पहले, MeitY ने इंटरनेट इंटरमीडियरी और VPN सेवा प्रदाताओं को चेतावनी जारी की कि वे Polymarket और Kalshi जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स तक पहुँच उपलब्ध न कराएँ। अप्रैल 2026 में मंत्रालय ने विशेष रूप से VPN प्रदाताओं को ऐसी साइटों तक पहुँच रोकने के निर्देश दिए।
इसके बाद सरकार ने औपचारिक ब्लॉकिंग आदेश की दिशा में कदम बढ़ाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक Polymarket के खिलाफ पहले ही आदेश जारी किया जा चुका है और Kalshi के लिए भी इसी तरह की कार्रवाई की तैयारी है। यह आदेश संभवतः सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत जारी किया जा सकता है, जो सरकार को ऑनलाइन सामग्री या सेवाओं तक पहुँच रोकने का अधिकार देता है।
फिर भी प्लेटफ़ॉर्म भारत में कैसे एक्सेस हो रहे थे
सरकारी चेतावनियों के बाद भी कई भारतीय यूज़र इन साइटों तक पहुँच बना रहे थे। अधिकारियों के अनुसार इसके पीछे कुछ कारण थे:
VPN का इस्तेमाल कर क्षेत्रीय प्रतिबंधों को पार करना
मिरर साइट या वैकल्पिक डोमेन
क्रिप्टो आधारित भुगतान प्रणाली
सरकारी अधिकारियों ने इस स्थिति को कभी‑कभी “whack‑a‑mole” समस्या कहा है—जहाँ एक रास्ता बंद करने के बाद दूसरा खुल जाता है।
बड़ी बहस: वित्तीय टूल या ऑनलाइन जुआ?
प्रेडिक्शन मार्केट्स को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। समर्थक कहते हैं कि ये प्लेटफ़ॉर्म सार्वजनिक जानकारी और अपेक्षाओं को जोड़कर भविष्य के बारे में उपयोगी संकेत दे सकते हैं। वहीं आलोचकों का मानना है कि जब वास्तविक पैसे दाँव पर लगते हैं, तो यह मूल रूप से जुए का एक नया डिजिटल रूप बन जाता है।
भारत की कार्रवाई इसी बड़े वैश्विक सवाल को दिखाती है: क्या प्रेडिक्शन मार्केट भविष्यवाणी का आधुनिक उपकरण हैं—या सिर्फ ऑनलाइन बेटिंग का नया रूप?
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