प्रेडिक्शन मार्केट मूल रूप से एक ऐसा डिजिटल बाज़ार है जहाँ किसी भविष्य की घटना के होने या न होने पर कॉन्ट्रैक्ट खरीदे और बेचे जाते हैं। आम तौर पर इन कॉन्ट्रैक्ट्स का भुगतान बाइनरी (दो संभावनाओं) पर आधारित होता है—घटना हुई तो भुगतान मिलेगा, नहीं हुई तो नहीं।
उदाहरण के लिए:
अगर किसी घटना का ‘Yes’ कॉन्ट्रैक्ट $0.70 पर ट्रेड हो रहा है, तो इसका मतलब बाज़ार के अनुसार उस घटना के होने की संभावना लगभग 70% मानी जा रही है।
जैसे‑जैसे नई जानकारी आती है—जैसे सर्वे, खबरें या प्रदर्शन—लोग अपनी पोज़िशन बदलते हैं और कॉन्ट्रैक्ट की कीमत ऊपर‑नीचे होती रहती है। इस प्रक्रिया को कई लोग “wisdom of crowds” यानी भीड़ की सामूहिक समझ से भविष्य का अनुमान लगाने का तरीका मानते हैं।
हालाँकि हर प्लेटफ़ॉर्म की तकनीकी संरचना अलग हो सकती है, लेकिन उनका मूल तरीका लगभग एक जैसा होता है।
1. वास्तविक घटनाओं पर मार्केट बनाए जाते हैं
प्लेटफ़ॉर्म पर अलग‑अलग सवाल या इवेंट होते हैं—जैसे चुनाव परिणाम, खेल प्रतियोगिता, या आर्थिक निर्णय।
2. यूज़र ‘Yes’ या ‘No’ कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं
यूज़र किसी परिणाम पर हिस्सेदारी खरीदते हैं। अगर उनका अनुमान सही साबित होता है तो कॉन्ट्रैक्ट तय राशि—अक्सर $1—का भुगतान करता है।
3. कीमतें लगातार बदलती रहती हैं
जैसे ही लोगों का भरोसा किसी नतीजे पर बढ़ता या घटता है, उस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत भी बदलती है। यही कीमत उस घटना की संभावित संभावना का संकेत बन जाती है।
4. परिणाम तय होने पर सेटलमेंट होता है
घटना का वास्तविक परिणाम आने के बाद सही कॉन्ट्रैक्ट धारकों को भुगतान मिलता है और गलत कॉन्ट्रैक्ट बेकार हो जाते हैं।
यह सिस्टम कई मायनों में स्टॉक एक्सचेंज जैसा दिखता है क्योंकि यूज़र एक‑दूसरे के साथ ट्रेड करते हैं, न कि सीधे किसी “बुकमेकर” या हाउस के खिलाफ।
हालाँकि समर्थक कहते हैं कि प्रेडिक्शन मार्केट जानकारी और डेटा का उपयोग करके बेहतर अनुमान लगाने में मदद करते हैं, लेकिन कई नियामक संस्थाएँ इन्हें बेटिंग या जुआ का नया रूप मानती हैं।
मुख्य चिंताएँ आम तौर पर ये होती हैं:
यही कारण है कि अलग‑अलग देशों में इन प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए नियम अलग‑अलग हैं—कुछ जगह इन्हें सीमित रूप में अनुमति है, जबकि कई जगह इन्हें प्रतिबंधित किया गया है।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने हाल के महीनों में Polymarket और Kalshi जैसे ऑफशोर प्लेटफ़ॉर्म्स की गतिविधियों की जाँच शुरू की है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय यूज़र इनका उपयोग चुनाव परिणाम, IPL जैसे खेल मुकाबलों और अन्य घटनाओं पर पैसे लगाने के लिए कर रहे थे।
सरकार का कहना है कि ये प्लेटफ़ॉर्म भारत के ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग नियमों के बाहर काम कर रहे हैं, इसलिए भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए इन्हें अवैध माना जा रहा है।
अधिकारियों की चिंता के कुछ प्रमुख कारण बताए गए हैं:
कार्रवाई कई चरणों में आगे बढ़ी है।
सबसे पहले, MeitY ने इंटरनेट इंटरमीडियरी और VPN सेवा प्रदाताओं को चेतावनी जारी की कि वे Polymarket और Kalshi जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स तक पहुँच उपलब्ध न कराएँ। अप्रैल 2026 में मंत्रालय ने विशेष रूप से VPN प्रदाताओं को ऐसी साइटों तक पहुँच रोकने के निर्देश दिए।
इसके बाद सरकार ने औपचारिक ब्लॉकिंग आदेश की दिशा में कदम बढ़ाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक Polymarket के खिलाफ पहले ही आदेश जारी किया जा चुका है और Kalshi के लिए भी इसी तरह की कार्रवाई की तैयारी है। यह आदेश संभवतः सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत जारी किया जा सकता है, जो सरकार को ऑनलाइन सामग्री या सेवाओं तक पहुँच रोकने का अधिकार देता है।
सरकारी चेतावनियों के बाद भी कई भारतीय यूज़र इन साइटों तक पहुँच बना रहे थे। अधिकारियों के अनुसार इसके पीछे कुछ कारण थे:
सरकारी अधिकारियों ने इस स्थिति को कभी‑कभी “whack‑a‑mole” समस्या कहा है—जहाँ एक रास्ता बंद करने के बाद दूसरा खुल जाता है।
प्रेडिक्शन मार्केट्स को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। समर्थक कहते हैं कि ये प्लेटफ़ॉर्म सार्वजनिक जानकारी और अपेक्षाओं को जोड़कर भविष्य के बारे में उपयोगी संकेत दे सकते हैं। वहीं आलोचकों का मानना है कि जब वास्तविक पैसे दाँव पर लगते हैं, तो यह मूल रूप से जुए का एक नया डिजिटल रूप बन जाता है।
भारत की कार्रवाई इसी बड़े वैश्विक सवाल को दिखाती है: क्या प्रेडिक्शन मार्केट भविष्यवाणी का आधुनिक उपकरण हैं—या सिर्फ ऑनलाइन बेटिंग का नया रूप?