राज्य स्वामित्व वाली पावर फाइनेंसर REC सितंबर 2026 में ₹500 करोड़ से कम का भारत का पहला टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड जारी कर सकती है। चयनित निवेशकों को भुगतान के लिए RBI के थोक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (w CBDC) वॉलेट और बॉन्ड रखने के लिए अलग DEMAT 2.0 सिक्योरिटीज वॉलेट की जरूरत होगी। पायलट का लक्ष्य तेज सेटलमेंट, बेहत...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What are India’s plans for launching its first tokenised corporate bond issue through state-owned power financier REC in September 2026, inc. Article summary: India plans a tightly controlled September 2026 pilot in which state-owned power financier REC will issue the country’s first tokenised corporate bonds, testing blockchain-based securities and settlement rather than open. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
भारत सीमित दायरे में टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड का परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य-स्वामित्व वाली पावर फाइनेंसर REC इस पायलट में पहली जारीकर्ता हो सकती है। सितंबर 2026 में प्रस्तावित इश्यू का आकार ₹500 करोड़ से कम बताया जा रहा है। इसलिए इसे आम निवेशकों के लिए नया रिटेल प्रोडक्ट लॉन्च करने के बजाय ब्लॉकचेन-आधारित बॉन्ड जारी करने और सेटलमेंट का प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट समझना अधिक सही होगा। 123
टोकनाइज्ड बॉन्ड मूल रूप से पारंपरिक डेट सिक्योरिटी ही होता है। फर्क इतना है कि इसके जारी होने, स्वामित्व, ट्रांसफर और सेटलमेंट का रिकॉर्ड ब्लॉकचेन या किसी अन्य डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर पर डिजिटल रूप से रखा जाता है। REC का प्रस्तावित इश्यू यह परखेगा कि साझा डिजिटल लेजर बॉन्ड लेन-देन को तेज और बाजार संचालन को अधिक कुशल बना सकता है या नहीं। 39
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के व्यापक पायलट उद्देश्यों में तेज सेटलमेंट, बेहतर ट्रेसबिलिटी, अधिक पारदर्शिता और बॉन्ड से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं को स्वचालित करने की संभावना शामिल है। इनमें कूपन भुगतान या अन्य बॉन्ड-सर्विसिंग गतिविधियां भी आ सकती हैं। हालांकि, उपलब्ध स्रोतों में REC इश्यू का विस्तृत परिचालन मॉडल अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। 1920
इस परीक्षण का अहम सवाल यह है कि क्या एक साझा लेजर सिक्योरिटी और भुगतान—दोनों को एक साथ ट्रांसफर करा सकता है। ऐसा होने पर अलग-अलग प्रणालियों के बीच रिकॉर्ड मिलाने यानी reconciliation का काम कम हो सकता है। लेकिन पायलट इस संभावना की जांच करेगा; यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि भविष्य में हर बॉन्ड लेन-देन तुरंत सेटल होगा। 20
रिपोर्टों के अनुसार, पायलट में भुगतान के लिए RBI की थोक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी, यानी wholesale CBDC (w-CBDC) का इस्तेमाल किया जाएगा। चुने गए निवेशकों को संभवतः दो अलग-अलग डिजिटल साधनों की जरूरत होगी: 478
इस व्यवस्था का उद्देश्य पैसे और सिक्योरिटी की आवाजाही को आपस में जोड़ना है। सिद्धांत रूप से, टोकनाइज्ड बॉन्ड और w-CBDC भुगतान एक साथ ट्रांसफर हो सकते हैं। इसे डिलीवरी-वर्सेस-पेमेंट मॉडल कहा जाता है—यानी सिक्योरिटी तभी जाए जब भुगतान भी पूरा हो। पायलट इसी तरह की विनियमित डिजिटल व्यवस्था की व्यवहारिकता परखेगा। 20
कॉरपोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन पायलट को SEBI, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ समन्वय में आगे बढ़ा रहा है। टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज को RBI के wholesale-CBDC सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ना इस परीक्षण की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। 2620
SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने पहले कहा था कि टोकनाइजेशन के जरिए तेज सेटलमेंट, बेहतर ट्रेसबिलिटी, बॉन्ड-सर्विसिंग का ऑटोमेशन और डेट मार्केट में अधिक पारदर्शिता की जांच की जा सकती है। 113
REC के टोकनाइज्ड बॉन्ड पहले चरण में आम रिटेल निवेशकों के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद नहीं है। इन्हें पायलट में चुने गए सीमित निवेशकों को ही पेश किया जाएगा। बॉन्ड पर शुरुआती तीन महीने का लॉक-इन भी बताया गया है, यानी जारी होने के तुरंत बाद इन्हें ट्रांसफर करना संभव नहीं होगा। 478
पायलट के दौरान ये टोकन पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक बुक प्लेटफॉर्म पर भी दिखाई देने की उम्मीद नहीं है। एक्सचेंज दिसंबर 2026 तक इनके लिए सेकेंडरी मार्केट सुविधा तैयार करने की दिशा में काम कर सकते हैं। हालांकि, यह समयसीमा पायलट की प्रगति और जरूरी नियामकीय व तकनीकी व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगी। 46
यह प्रयोग केवल बॉन्ड का रिकॉर्ड ब्लॉकचेन पर रखने के बारे में नहीं है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या विनियमित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी का स्वामित्व, भुगतान और जारी होने के बाद की सेवाओं को मौजूदा प्रक्रियाओं की तुलना में तेज और कम जटिल तरीके से जोड़ सकता है।
यदि REC का पायलट रिपोर्ट के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो भारत यूरोपीय बाजारों और हांगकांग जैसे उन बाजारों की कतार में शामिल होगा जहां ब्लॉकचेन-आधारित बॉन्ड जारी करने या सेटलमेंट का परीक्षण किया जा चुका है या ऐसी व्यवस्था विकसित हो चुकी है। भारत का प्रस्तावित मॉडल इसलिए खास है क्योंकि इसमें टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज को RBI के wholesale CBDC से जोड़कर विनियमित डिजिटल डिलीवरी-वर्सेस-पेमेंट व्यवस्था की जांच की जाएगी। 123
निवेशकों के लिए तत्काल असर फिर भी सीमित रहेगा: पहुंच चुनिंदा प्रतिभागियों तक होगी, तीन महीने का लॉक-इन तरलता को सीमित करेगा और यह व्यापक रिटेल बाजार का लॉन्च नहीं है। नीति-निर्माताओं और बाजार इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों के लिए अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि क्या यह परीक्षण भविष्य में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में बड़े पैमाने पर टोकनाइजेशन की व्यावहारिक नींव बना सकता है।
सितंबर में लॉन्च, REC की भूमिका और ₹500 करोड़ से कम का आकार ऐसे रिपोर्टेड विवरण हैं जो योजना से परिचित सूत्रों के हवाले से सामने आए हैं। वॉलेट की जरूरत, तीन महीने का लॉक-इन और दिसंबर में सेकेंडरी मार्केट का लक्ष्य भी रिपोर्ट किए गए पायलट विवरण हैं, न कि पूरी तरह जारी सार्वजनिक नियमावली। 234
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि SEBI ने सभी भाग लेने वाले जारीकर्ताओं, एक्सचेंजों, डिपॉजिटरी या वित्तीय संस्थानों के नामों की पुष्टि नहीं की है। कुछ अपडेट में लॉन्च की तारीख भी औपचारिक रूप से तय नहीं बताई गई। 6 इसलिए फिलहाल सबसे सावधान निष्कर्ष यही है कि भारत का टोकनाइजेशन कार्यक्रम सक्रिय है और REC के सितंबर लॉन्च की योजना रिपोर्ट की गई है, लेकिन अंतिम शर्तों और परिचालन व्यवस्था में बदलाव संभव है।
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राज्य स्वामित्व वाली पावर फाइनेंसर REC सितंबर 2026 में ₹500 करोड़ से कम का भारत का पहला टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड जारी कर सकती है।
राज्य स्वामित्व वाली पावर फाइनेंसर REC सितंबर 2026 में ₹500 करोड़ से कम का भारत का पहला टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड जारी कर सकती है। चयनित निवेशकों को भुगतान के लिए RBI के थोक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (w CBDC) वॉलेट और बॉन्ड रखने के लिए अलग DEMAT 2.0 सिक्योरिटीज वॉलेट की जरूरत होगी।
पायलट का लक्ष्य तेज सेटलमेंट, बेहतर ट्रेसबिलिटी और कम परिचालन जटिलता परखना है; बॉन्ड पर शुरुआती तीन महीने का लॉक इन होगा और दिसंबर 2026 तक सेकेंडरी मार्केट सुविधा विकसित करने का लक्ष्य बताया गया है।