स्टारमेड का उपकरण गर्दन की रक्त वाहिका में प्रवेश करता है और रक्त प्रवाह के ज़रिए दिमाग के लक्षित हिस्से तक पहुंचता है। कंपनी के सह-संस्थापक झाओ झेंगतुओ ने इसे स्टेंट लगाने जैसी प्रक्रिया बताया है । बीजिंग के जुआनवू अस्पताल की सर्जन डुआन वानरु ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया कि एक अनुभवी सर्जन इस उपकरण को मात्र 10 मिनट में सही जगह पर पहुंचा सकता है ।
न्यूरालिंक के इम्प्लांट के विपरीत, जिसमें एक सर्जिकल रोबोट खोपड़ी खोलकर बारीक इलेक्ट्रोड सीधे दिमाग के टिश्यू में डालता है, स्टारमेड का तरीका न्यूनतम आक्रामक (मिनिमली इनवेसिव) है। उपकरण रक्त वाहिका की दीवार के बाहर टिक जाता है, जिससे सर्जरी का खतरा और रिकवरी का समय कम हो जाता है ।
स्टारमेड ने पिछले एक साल में 1.1 अरब युआन (लगभग 163 मिलियन डॉलर) से अधिक जुटाए हैं, जिसमें टेंसेंट और अलीबाबा जैसे दिग्गज निवेशक शामिल हैं । मार्च 2026 में अलीबाबा ने 50 करोड़ युआन की स्ट्रैटेजिक फंडिंग का नेतृत्व किया, जिसमें टेंसेंट, एसडीआईसी वेंचर कैपिटल, ऑर्बिमेड, किमिंग वेंचर पार्टनर्स और अन्य मौजूदा शेयरधारकों ने भी हिस्सा लिया ।
अब तक यह प्रक्रिया भेड़ों पर सफलतापूर्वक परखी जा चुकी है । अगस्त 2026 तक स्टारमेड ने अपने उपकरण का मानव परीक्षण शुरू नहीं किया है, यानी 10 मिनट का इम्प्लांटेशन समय फिलहाल शोधकर्ताओं द्वारा प्रदर्शित एक लक्ष्य है, मरीजों के लिए उपलब्ध प्रक्रिया नहीं ।
हालांकि, जून 2025 में नानकाई यूनिवर्सिटी के नेतृत्व वाली एक टीम ने दुनिया के पहले इंटरवेंशनल बीसीआई का मानव परीक्षण पूरा किया । इस प्रक्रिया में गर्दन की नस के ज़रिए एक स्टेंट इलेक्ट्रोड को मरीज की खोपड़ी की रक्त वाहिकाओं में पहुंचाया गया। 67 वर्षीय लकवाग्रस्त पुरुष मरीज को इससे अंगों की महत्वपूर्ण क्षमता वापस मिली । स्टारमेड ने अपने वैस्कुलर इंसर्शन प्रोग्राम के लिए चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के साथ साझेदारी की है ।
स्टारमेड सीधे तौर पर एलन मस्क के न्यूरालिंक से प्रतिस्पर्धा करने का लक्ष्य रखता है । मुख्य तकनीकी अंतर यह है कि न्यूरालिंक के लिए क्रैनियोटॉमी (खोपड़ी खोलना) और इलेक्ट्रोड लगाने के लिए सर्जिकल रोबोट की ज़रूरत होती है, जबकि स्टारमेड का एंडोवैस्कुलर तरीका रक्त प्रवाह के ज़रिए प्रवेश करता है । इससे सर्जरी का खतरा काफी कम हो सकता है और अधिक मरीजों तक पहुंच बन सकती है ।
बीजिंग की नीति का लक्ष्य 2030 तक 2-3 वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी बीसीआई कंपनियां तैयार करना है । अमेरिकी बीसीआई बाजार 2035 तक 80 अरब डॉलर का होने का अनुमान है । नानकाई यूनिवर्सिटी और जुआनवू अस्पताल जैसे चीनी शोध संस्थान भी एंडोवैस्कुलर बीसीआई दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहे हैं, जो इस क्षेत्र में एक समन्वित राष्ट्रीय प्रयास का संकेत है ।
स्टारमेड का उपकरण गर्दन की रक्त वाहिका में प्रवेश करता है और रक्त प्रवाह के ज़रिए दिमाग के लक्षित हिस्से तक पहुंचता है। कंपनी के सह-संस्थापक झाओ झेंगतुओ ने इसे स्टेंट लगाने जैसी प्रक्रिया बताया है । बीजिंग के जुआनवू अस्पताल की सर्जन डुआन वानरु ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया कि एक अनुभवी सर्जन इस उपकरण को मात्र 10 मिनट में सही जगह पर पहुंचा सकता है ।
न्यूरालिंक के इम्प्लांट के विपरीत, जिसमें एक सर्जिकल रोबोट खोपड़ी खोलकर बारीक इलेक्ट्रोड सीधे दिमाग के टिश्यू में डालता है, स्टारमेड का तरीका न्यूनतम आक्रामक (मिनिमली इनवेसिव) है। उपकरण रक्त वाहिका की दीवार के बाहर टिक जाता है, जिससे सर्जरी का खतरा और रिकवरी का समय कम हो जाता है ।
स्टारमेड ने पिछले एक साल में 1.1 अरब युआन (लगभग 163 मिलियन डॉलर) से अधिक जुटाए हैं, जिसमें टेंसेंट और अलीबाबा जैसे दिग्गज निवेशक शामिल हैं । मार्च 2026 में अलीबाबा ने 50 करोड़ युआन की स्ट्रैटेजिक फंडिंग का नेतृत्व किया, जिसमें टेंसेंट, एसडीआईसी वेंचर कैपिटल, ऑर्बिमेड, किमिंग वेंचर पार्टनर्स और अन्य मौजूदा शेयरधारकों ने भी हिस्सा लिया ।
अब तक यह प्रक्रिया भेड़ों पर सफलतापूर्वक परखी जा चुकी है । अगस्त 2026 तक स्टारमेड ने अपने उपकरण का मानव परीक्षण शुरू नहीं किया है, यानी 10 मिनट का इम्प्लांटेशन समय फिलहाल शोधकर्ताओं द्वारा प्रदर्शित एक लक्ष्य है, मरीजों के लिए उपलब्ध प्रक्रिया नहीं ।
हालांकि, जून 2025 में नानकाई यूनिवर्सिटी के नेतृत्व वाली एक टीम ने दुनिया के पहले इंटरवेंशनल बीसीआई का मानव परीक्षण पूरा किया । इस प्रक्रिया में गर्दन की नस के ज़रिए एक स्टेंट इलेक्ट्रोड को मरीज की खोपड़ी की रक्त वाहिकाओं में पहुंचाया गया। 67 वर्षीय लकवाग्रस्त पुरुष मरीज को इससे अंगों की महत्वपूर्ण क्षमता वापस मिली । स्टारमेड ने अपने वैस्कुलर इंसर्शन प्रोग्राम के लिए चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के साथ साझेदारी की है ।
स्टारमेड सीधे तौर पर एलन मस्क के न्यूरालिंक से प्रतिस्पर्धा करने का लक्ष्य रखता है । मुख्य तकनीकी अंतर यह है कि न्यूरालिंक के लिए क्रैनियोटॉमी (खोपड़ी खोलना) और इलेक्ट्रोड लगाने के लिए सर्जिकल रोबोट की ज़रूरत होती है, जबकि स्टारमेड का एंडोवैस्कुलर तरीका रक्त प्रवाह के ज़रिए प्रवेश करता है । इससे सर्जरी का खतरा काफी कम हो सकता है और अधिक मरीजों तक पहुंच बन सकती है ।
बीजिंग की नीति का लक्ष्य 2030 तक 2-3 वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी बीसीआई कंपनियां तैयार करना है । अमेरिकी बीसीआई बाजार 2035 तक 80 अरब डॉलर का होने का अनुमान है । नानकाई यूनिवर्सिटी और जुआनवू अस्पताल जैसे चीनी शोध संस्थान भी एंडोवैस्कुलर बीसीआई दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहे हैं, जो इस क्षेत्र में एक समन्वित राष्ट्रीय प्रयास का संकेत है ।