इतिहास में इस स्तर के आसपास अक्सर तीन चीजें देखी गई हैं:
यह स्तर राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। कमजोर येन का मतलब है कि जापान के लिए आयात—खासकर ऊर्जा—महंगे हो जाते हैं, जिससे घरेलू महंगाई बढ़ सकती है।
हालांकि 160 के आसपास तनाव बढ़ता है, लेकिन मुद्रा बाजार में सीधे हस्तक्षेप का फैसला तुरंत नहीं लिया जाता।
अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अमेरिका और जापान दोनों ने इस बात पर सहमति जताई है कि विनिमय दर सामान्यतः बाजार द्वारा तय होनी चाहिए, हालांकि अत्यधिक उतार‑चढ़ाव या अव्यवस्थित चाल आर्थिक स्थिरता के लिए जोखिम बन सकती है ।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी सलाह देता है कि विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाए, नियमित नीति उपकरण के रूप में नहीं ।
इस वजह से जापानी अधिकारी अक्सर पहले चेतावनी या नीति संकेतों का इस्तेमाल करते हैं, और सीधे हस्तक्षेप को अंतिम विकल्प के रूप में रखते हैं।
अगर बाजार की उम्मीदों के बावजूद BOJ ब्याज दरें नहीं बढ़ाता, तो शुरुआती प्रतिक्रिया येन के कमजोर होने के रूप में आ सकती है।
इसके पीछे कुछ व्यापक आर्थिक कारण होंगे:
विश्लेषकों के अनुसार येन की स्थायी मजबूती के लिए मजबूत आधारभूत कारकों की जरूरत होती है—जैसे BOJ की सख्ती और ऊर्जा कीमतों में राहत । यदि ये कारक न हों, तो येन पर दबाव बना रह सकता है।
ऐसी स्थिति में USD/JPY 160 से ऊपर निकलकर 165–170 तक भी जा सकता है, खासकर यदि सरकारी हस्तक्षेप देर से हो या उसे “असाधारण परिस्थितियों” की कसौटी पर उचित न माना जाए।
यदि BOJ दर बढ़ाता है तो येन में कम से कम अल्पकालिक मजबूती देखने को मिल सकती है। लेकिन असली फर्क केंद्रीय बैंक के संदेश से पड़ेगा।
दो संभावित स्थितियां हो सकती हैं:
हॉकिश हाइक
डोविश हाइक
चूंकि बाजार पहले से ही हाइक की काफी संभावना मान चुका है, इसलिए असली प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि BOJ आगे के लिए कितना सख्त रुख दिखाता है।
इस बैठक की खास बात यह है कि उम्मीदें एकतरफा हैं।
इसी असंतुलन की वजह से विश्लेषक मानते हैं कि जून का फैसला मुद्रा बाजार में बड़ा मूव ला सकता है—या तो येन की कमजोरी 170 की ओर बढ़ेगी, या फिर सख्त नीति संकेतों के साथ तेज मजबूती 140 की दिशा में दिख सकती है।
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