Nvidia का अपना उत्सर्जन डेटा भी इसी पैमाने को दर्शाता है। एक विश्लेषण में पाया गया कि कंपनी के आपूर्ति श्रृंखला उत्सर्जन—जिन्हें स्कोप 3 के रूप में वर्गीकृत किया जाता है—तेज़ी से बढ़े हैं। ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये वित्त वर्ष 2023 में 2.97 मिलियन टन CO₂ समकक्ष से दोगुने से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 6.03 मिलियन टन हो गए, जो लगभग 1,25,700 से अधिक अमेरिकी घरों के वार्षिक उत्सर्जन के बराबर है । ग्रीनपीस के एक अन्य दस्तावेज़ ने वित्त वर्ष 2025 के लिए यह आंकड़ा 6.91 मिलियन टन CO₂ समकक्ष बताया, जो वित्त वर्ष 2023 के 3.51 मिलियन टन से लगभग दोगुना है
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गंभीर बात यह है कि Nvidia के कुल कार्बन पदचिह्न का 80% से अधिक हिस्सा इसकी आपूर्ति श्रृंखला से आता है, जिसका अधिकांश भाग पूर्वी एशिया में है । इसके बावजूद, कंपनी ने इन उत्सर्जनों में कटौती करने का कोई स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है और न ही ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे अपने मुख्य विनिर्माण केंद्रों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में प्रत्यक्ष निवेश किया है
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Nvidia के 20 सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं की एक जाँच, जो इसकी बिक्री की लागत (COGS) का 50% से अधिक प्रतिनिधित्व करते हैं, ने स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में एक बड़े अंतर का खुलासा किया। रिपोर्ट में पूर्वी एशियाई आपूर्ति श्रृंखला में 'डीकार्बोनाइजेशन की कमी' (decarbonization deficit) पाई गई, जहाँ आपूर्तिकर्ताओं की केवल 24% बिजली नवीकरणीय स्रोतों से आती थी, जबकि इसके उत्तरी अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं में यह 80% से अधिक थी । इसी विसंगति के चलते ग्रीनपीस ने AI आपूर्ति श्रृंखला के डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में प्रमुख AI कंपनियों में Nvidia को अंतिम स्थान दिया
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ताइपे में टकराव ग्रीनपीस के वैश्विक "क्लीन AI, क्लीन फ्यूचर" (स्वच्छ AI, स्वच्छ भविष्य) अभियान का हिस्सा था, जो दुनिया की इस सबसे मूल्यवान चिप निर्माता कंपनी के लिए स्पष्ट माँगों का एक सेट पेश करता है ।
इसका मूल तर्क सीधा है। ग्रीनपीस का मानना है कि Nvidia खुद को 21वीं सदी की 'AI औद्योगिक क्रांति' के इंजन के रूप में पेश नहीं कर सकता, जबकि इसकी आपूर्ति श्रृंखला उन ऊर्जा स्रोतों से चल रही हो जिन्हें वे "19वीं सदी के ऊर्जा स्रोतों" के रूप में वर्णित करते हैं ।
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