जर्मनी की ओर से दबाव अधिक साफ दिखता है। जर्मनी के केंद्रीय बैंक Bundesbank के बोर्ड सदस्य Michael Theurer ने Reuters से कहा कि यूरोपीय बैंकों को Mythos तक पहुंच मिलनी चाहिए, ताकि वे उन साइबर हमलों से बचाव कर सकें जिन्हें ऐसे नए प्रोग्राम बढ़ावा दे सकते हैं . Bundesbank के अध्यक्ष Joachim Nagel ने भी व्यापक पहुंच की वकालत की, ताकि समान प्रतिस्पर्धी स्थिति बनी रहे और दुरुपयोग रोका जा सके
.
फिलहाल एक जरूरी सीमा समझनी होगी: उपलब्ध रिपोर्टों से कोई प्रकाशित EU निर्णय या तैयार एक्सेस-मैकेनिज्म सामने नहीं आता। अभी तस्वीर बातचीत, तकनीकी ब्रीफिंग, नियामकीय निगरानी और राजनीतिक दबाव की है .
बैंकिंग सिस्टम में छोटी-सी सॉफ्टवेयर कमजोरी भी बड़ा जोखिम बन सकती है। Mythos को रिपोर्टों में ऐसे मॉडल के रूप में बताया गया है जो कंप्यूटर कोड में कमजोरियां ढूंढ सकता है . रक्षात्मक इस्तेमाल में ऐसा औजार बैंकों को अपनी प्रणालियां जांचने, खतरों को प्राथमिकता देने और हमलावरों से पहले कमजोरियां बंद करने में मदद कर सकता है।
Handelsblatt ने अंदरूनी सूत्रों के हवाले से बताया कि Anthropic यूरोपीय बैंकों को जल्द पहुंच देना चाहता है, ताकि वे अपने कंप्यूटर सिस्टम में संभावित कमजोरियों की जांच कर सकें और सुरक्षा खामियां बंद कर सकें . हालांकि समय-सीमा पर सूत्रों की जानकारी अलग-अलग थी—कुछ ने कुछ दिनों की बात कही, तो कुछ ने कुछ हफ्तों की
.
दूसरा मुद्दा सूचना-असमानता का है। Reuters के अनुसार, Mythos अब तक केवल कुछ अमेरिकी बैंकों को उपलब्ध कराया गया था . The Next Web ने यह भी बताया कि किसी EU सरकार के पास मॉडल की पहुंच नहीं है
. अगर यूरोपीय नियामक किसी सुरक्षा-संवेदनशील AI सिस्टम को केवल ब्रीफिंग और रिपोर्टों के आधार पर समझेंगे, तो नियंत्रित परीक्षण की मांग स्वाभाविक लगती है।
Mythos पर चिंता का मूल कारण इसका ‘dual-use’ स्वभाव है—यानी एक ही तकनीक रक्षा और हमले, दोनों में काम आ सकती है। Reuters के अनुसार, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ Mythos को बैंकों की IT प्रणालियों पर हमलों को तेज करने वाला संभावित औजार मानते हैं . Nagel ने Mythos को ऐसा मॉडल बताया जो वित्तीय संस्थानों के सॉफ्टवेयर में सुरक्षा कमजोरियों को जल्दी पहचानने और उनका फायदा उठाने में सक्षम प्रतीत होता है; उनके अनुसार यह डिजिटल रक्षा सुधार सकता है, लेकिन दुरुपयोग भी हो सकता है
.
जर्मन एजेंसियां भी सतर्क हैं। जर्मनी की साइबर सुरक्षा एजेंसी BSI ने ZDF के अनुसार कहा कि छिपी हुई सॉफ्टवेयर कमजोरियां खोजने वाला मॉडल साइबर खतरे की स्थिति पर बड़ा असर डाल सकता है . जर्मन वित्तीय नियामक Bafin भी Handelsblatt के अनुसार Mythos और ऐसे AI मॉडल से जुड़े जोखिमों पर गहराई से काम कर रहा है, क्योंकि ये सिस्टम अपने आप और बड़े पैमाने पर सुरक्षा कमजोरियां ढूंढ सकते हैं
.
The Next Web ने रिपोर्ट किया कि Mythos बड़े ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउजरों में zero-day कमजोरियां खोज सकता है . Zero-day आम तौर पर ऐसी कमजोरी को कहा जाता है जिसके बारे में बचाव पक्ष को पर्याप्त तैयारी या पैच उपलब्ध होने से पहले ही जोखिम पैदा हो सकता है। फिर भी इस दावे को रिपोर्टिंग के रूप में ही पढ़ना चाहिए: सार्वजनिक रूप से पक्की बात यह है कि आयोग ने Anthropic से तकनीकी जानकारी ली है और संभावित नतीजों का मूल्यांकन कर रहा है
.
मामला केवल बैंक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यह EU की AI निगरानी से भी जुड़ता है। Bloomberg के अनुसार, यूरोपीय आयोग का AI Office Anthropic के साथ AI Act के तहत सामान्य-उद्देश्य AI प्रणालियों के EU आचार संहिता के पालन पर बातचीत में है . Investing.com ने भी आयोग के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि Anthropic ने इस EU आचार संहिता का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है
.
इसलिए Mythos पर बहस सिर्फ यह नहीं है कि बैंकों को नया सुरक्षा-टूल मिले या नहीं। असली सवाल यह है कि शक्तिशाली, सामान्य-उद्देश्य AI सिस्टम, जिनमें साइबर क्षमताएं हों, उनका आकलन कैसे हो, उनकी सीमाएं कैसे तय हों और उनका नियंत्रित इस्तेमाल कैसे सुनिश्चित हो .
यह बहस सरल ‘हां’ या ‘नहीं’ की नहीं है। बहुत कम पहुंच का मतलब होगा कि यूरोपीय बैंक और नियामक एक संभावित अहम साइबर-औजार को दूरी से समझने पर मजबूर रहें। लेकिन बहुत अधिक या गलत तरीके से दी गई पहुंच वही क्षमताएं फैला सकती है जिनसे नियामक डर रहे हैं .
संभावित रास्ते कई हो सकते हैं: चुनिंदा संस्थानों को सीधे परीक्षण की अनुमति, Anthropic द्वारा बैंकों की ओर से जांच, नियामकों के साथ संयुक्त प्रक्रिया, या पहचानी गई कमजोरियों की नियंत्रित सूचना संबंधित बैंकों को देना। अभी इनमें से कोई मॉडल सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं है; उपलब्ध रिपोर्टें बातचीत, संभावित परीक्षण और अभी खुले एक्सेस-पथ की ओर इशारा करती हैं .
यूरोप Mythos के लिए खुला सार्वजनिक दरवाजा नहीं मांग रहा; वह नियंत्रित जांच और बराबरी की जानकारी चाहता है। बैंकों के लिए यह मॉडल उपयोगी हो सकता है, क्योंकि यह कमजोरियां पहले दिखा सकता है। नियामकों के लिए यही बात जोखिम है, क्योंकि उसी क्षमता से हमले तेज और दुरुपयोग आसान हो सकता है .
इसलिए असली राजनीतिक सवाल Mythos नहीं, बल्कि उसकी चाबी है: वह किसके हाथ में होगी, किस निगरानी में होगी और किस सीमा तक इस्तेमाल की जाएगी। यूरोप अंधेरे में नहीं रहना चाहता, लेकिन सुरक्षा का औजार खुद नया खतरा भी न बन जाए—यही संतुलन अब तय करना है।