डेन्यूब का जलस्तर कई देशों में कम-से-कम 1996 के बाद के सबसे निचले स्तरों तक पहुंच गया। सर्बिया में नदी के प्रवेश-बिंदु बेजदान पर यह आधी सदी से अधिक समय का सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया ।
बुडापेस्ट में जलमापक का स्तर घटकर 26 से 28 सेंटीमीटर तक पहुंच गया, जिसे ऐतिहासिक न्यूनतम बताया गया । रोमानिया में डेन्यूब का बहाव लगभग 1,600 घन मीटर प्रति सेकंड रह गया, जबकि इस मौसम में सामान्य बहाव 4,000 घन मीटर प्रति सेकंड से अधिक रहता है ।
यह गिरावट केवल नदी के किनारों या नौकायन तक सीमित नहीं रही। कम जलप्रवाह ने बिजली उत्पादन, सिंचाई, माल ढुलाई और पर्यटन—सभी पर असर डाला।
रोमानिया के Cernavodă परमाणु बिजली संयंत्र का यूनिट 1 28 जुलाई को नियंत्रित तरीके से बंद किया गया। कारण था—डेन्यूब में इतना कम पानी रह जाना कि संयंत्र की कूलिंग व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया ।
अगले दिन यूनिट 2 को लेकर भी बंदी की स्थिति बनी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कम जलस्तर के कारण दोनों रिएक्टरों के एक साथ ग्रिड से बाहर होने की अभूतपूर्व आशंका पैदा हुई । यह संयंत्र सामान्य परिस्थितियों में रोमानिया की करीब 20% बिजली उपलब्ध कराता है, इसलिए इसका उत्पादन घटना राष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण झटका है।
सरकार ने एक नहर से पानी का मार्ग अस्थायी रूप से बदलकर दूसरे रिएक्टर को ग्रिड से जोड़े रखने के लिए काम कराने और पड़ोसी देशों से बिजली आयात पर बातचीत करने की बात कही ।
डेन्यूब पर निर्भर हंगरी के एकमात्र परमाणु बिजली संयंत्र Paks में भी उत्पादन घटाना पड़ा। 29 जुलाई से एक रिएक्टर का उत्पादन लगभग 50% कम किया गया । संयंत्र के अन्य रिएक्टरों पर भी उत्पादन में कटौती की गई।
30 से 31 जुलाई तक प्रधानमंत्री पीटर माज्यार ने चेतावनी दी कि यदि नदी और सिकुड़ी, तो Paks संयंत्र को उसके इतिहास में पहली बार पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है । संयंत्र डेन्यूब के पानी का इस्तेमाल रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए करता है, लेकिन जलस्तर इतना नीचे चला गया कि पानी खींचने वाली नलिकाओं की पहुंच पर सवाल उठने लगे।
माज्यार के अनुसार, पूर्ण बंदी की स्थिति में संयंत्र कई सप्ताह तक ऑफलाइन रह सकता है, क्योंकि पूर्वानुमानों में नदी के जलस्तर में और गिरावट की संभावना जताई गई थी । Paks हंगरी की बिजली व्यवस्था का एक बड़ा आधार है, इसलिए उत्पादन में कमी से बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं की खपत घटाने की योजनाएं तैयार की जाने लगीं ।
सर्बिया में घटते पानी के कारण बजरे फंस गए और कुछ हिस्सों में नदी इतनी उथली हो गई कि उसे पैदल पार किया जा सकता था । यूरोप के प्रमुख जलमार्गों में शामिल डेन्यूब पर माल ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हुई। नदी-पर्यटन कंपनियों को मार्ग बदलने पड़े और कई क्रूज सेवाओं में व्यवधान आया ।
कम जलस्तर ने किसानों के लिए सिंचाई पर भी असर डाला। इस तरह एक ही नदी संकट ने बिजली संयंत्रों, औद्योगिक आपूर्ति, कृषि, माल परिवहन और पर्यटन जैसे आपस में जुड़े क्षेत्रों को प्रभावित किया ।
यह घटना केवल एक अलग मौसमीय अपवाद के रूप में नहीं देखी जा रही। मध्य और पूर्वी यूरोप में लंबे समय तक चली गर्मी और औसत से कम बारिश ने कई देशों में डेन्यूब को एक साथ ऐतिहासिक न्यूनतम स्तरों तक पहुंचा दिया ।
नदी के किनारे बने परमाणु संयंत्रों को ठंडा करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। इसलिए सूखा और बढ़ती गर्मी सीधे उनकी संचालन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। जलवायु अनुमानों में अधिक बार और अधिक तीव्र सूखे की संभावना जताई गई है, जिससे ऐसी ऊर्जा प्रणालियों की कमजोरी और स्पष्ट हो सकती है।
रोमानिया, हंगरी, सर्बिया और क्रोएशिया में दिखे असर बताते हैं कि एक बड़ा जलवैज्ञानिक झटका सीमाओं से परे जाकर बिजली उत्पादन, नदी परिवहन, सिंचाई और पर्यटन की पूरी श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है । डेन्यूब संकट का सबसे बड़ा सबक यही है कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल ईंधन और ग्रिड का मुद्दा नहीं रही—यह पानी और बदलती जलवायु से भी उतनी ही गहराई से जुड़ी है।